
पटना। बिहार की राजनीति में बदलाव की बयार अब केवल कयासों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासनिक और संगठनात्मक हलचलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता की धुरी अब अपना स्थान बदल चुकी है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 का दिन पटना के लिए किसी बड़े सियासी महाकुंभ से कम नहीं था, जहाँ राजधानी का राजनीतिक पारा अपने उच्चतम स्तर पर बना रहा। मुख्यमंत्री आवास (1 अणे मार्ग) जहाँ पिछले दो दशकों से सत्ता का निर्विवाद केंद्र रहा है, वहां सोमवार को एक अजीब सी शांति और विदाई की आहट देखी गई। इसके ठीक उलट, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का सरकारी आवास (5, देशरत्न मार्ग) सुबह से ही भारी गहमागहमी, बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का मुख्य केंद्र बना रहा। बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी की बढ़ती स्वीकार्यता और प्रशासनिक सक्रियता ने यह संकेत दे दिया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन की पटकथा अब अंतिम दौर में है। राजभवन से लेकर सचिवालय तक के आला अधिकारियों की दौड़ इस बात की तस्दीक कर रही थी कि बुधवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए अब समय बहुत कम बचा है।
मुख्यमंत्री आवास पर मंथन और विदाई की तैयारी
सोमवार की सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण ने पटना को छुआ, 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हलचल शुरू हो गई। यह वह स्थान है जहाँ से नीतीश कुमार ने बिहार की तकदीर लिखने का लंबा सफर तय किया है। सुबह 8 बजे से ही जेडीयू के कद्दावर नेताओं का वहां पहुँचना शुरू हो गया। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और संसदीय कार्यमंत्री विजय कुमार चौधरी मुख्यमंत्री आवास के भीतर नीतीश कुमार के साथ गहन चर्चा में जुटे रहे।
नीतीश कुमार का रुख इस बार काफी संयत और रणनीतिक नजर आया। उन्होंने न केवल अपने इन करीबी सहयोगियों के साथ भविष्य की योजना पर बात की, बल्कि फोन के माध्यम से कई अन्य सीनियर नेताओं से भी संपर्क साधा। इसी बीच, वर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी भी नीतीश कुमार से मिलने पहुँचे। इन तीनों नेताओं के बीच बंद कमरे में काफी देर तक चली बातचीत को नई सरकार के गठन और मंत्रिमंडल के संभावित स्वरूप से जोड़कर देखा जा रहा है। नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल के अंतिम चरणों में यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि सत्ता का यह हस्तांतरण बिना किसी बड़े राजनीतिक शोर के सुचारू रूप से संपन्न हो।
5 देशरत्न मार्ग: जहाँ से गूँज रही है नई सरकार की धमक
दोपहर होते-होते बिहार की पूरी सियासत का केंद्र 5 देशरत्न मार्ग स्थित सम्राट चौधरी का आवास बन गया। यहाँ का माहौल किसी नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री के कार्यालय जैसा दिखने लगा था। इस आवास की गतिविधियों ने उस समय सबको चौंका दिया जब राजभवन की गाड़ी अचानक यहाँ पहुँची। इस गाड़ी में राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा सवार थे। दरवाजे पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से संक्षिप्त पूछताछ के बाद यह गाड़ी सीधे अंदर चली गई, जहाँ सम्राट चौधरी के साथ उनकी करीब आधा घंटे तक वार्ता हुई। राजभवन के अधिकारी का सीधे उपमुख्यमंत्री के घर पहुँचना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सरकार गठन की प्रक्रिया अब औपचारिक चरणों में प्रवेश कर चुकी है।
प्रशासनिक स्तर पर सम्राट चौधरी के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती की गई है। इसके तुरंत बाद नीतीश कुमार के प्रधान सचिव दीपक कुमार का वहां पहुँचना भी बेहद अहम माना जा रहा है। दीपक कुमार का सम्राट चौधरी से मिलना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक फाइलों और प्रोटोकॉल के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
एनडीए के भीतर समन्वय और बैठकों का दौर
दोपहर के समय सम्राट चौधरी के आवास पर एनडीए के घटक दलों के बीच समन्वय की बड़ी कोशिशें देखी गईं। सवा बारह बजे के करीब संजय झा और ललन सिंह यहाँ पहुँचे और सम्राट चौधरी के साथ करीब 40 मिनट तक वार्ता की। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि भाजपा और जेडीयू के बीच मंत्रिमंडल के बंटवारे और विभागों के आवंटन पर अंतिम सहमति इसी दौरान बनी।
इसके तत्काल बाद भाजपा के संगठन से जुड़े बड़े चेहरे—प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया—भी सम्राट चौधरी के आवास पहुँचे। इन नेताओं के बीच बुधवार के शपथ ग्रहण समारोह की रूपरेखा, आमंत्रित किए जाने वाले विशिष्ट अतिथियों की सूची और दिल्ली से आने वाले केंद्रीय नेताओं के प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा हुई। शाम होते-होते पूर्व केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह भी वहां पहुँचे, जो इस बदलाव के पीछे के मुख्य सूत्रधारों में से एक माने जा रहे हैं।
विधायकों को निर्देश और पटना में ‘घेराबंदी’
राजनीतिक घटनाक्रम की तीव्रता को देखते हुए एनडीए के सभी विधायकों को स्पष्ट संदेश भेज दिया गया है कि वे अगले तीन दिनों तक अनिवार्य रूप से पटना में ही कैंप करें। विधायकों को किसी भी सूरत में शहर से बाहर न जाने के लिए कहा गया है। मंगलवार को शाम चार बजे होने वाली एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक के लिए सभी को विधिवत सूचित किया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह रही कि जेडीयू विधायकों की जो बैठक सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर प्रस्तावित थी, उसे अंतिम समय में स्थगित कर दिया गया। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व पहले भाजपा विधायक दल के फैसले का इंतजार करना चाहता है, ताकि मंगलवार को होने वाली साझा बैठक में किसी प्रकार का विरोधाभास न रहे। विधायकों के बीच बढ़ती उत्सुकता और पटना के होटलों व गेस्ट हाउसों में उनकी बढ़ती तादाद यह बता रही है कि बिहार की राजनीति एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ी है।
नीतीश कुमार का ‘कार्य मोड’: आखिरी दिन भी परियोजनाओं का निरीक्षण
तमाम राजनीतिक उठापटक और इस्तीफे की चर्चाओं के बीच नीतीश कुमार ने सोमवार को अपना प्रशासनिक चेहरा नहीं बदला। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कामकाज की निरंतरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोपहर 2 बजे वे अचानक सारण के लिए रवाना हो गए। उन्होंने वहां चल रही विभिन्न सड़क परियोजनाओं और गंगा नदी पर बन रहे पुल के निर्माण कार्य का जमीनी निरीक्षण किया। साढ़े तीन बजे तक वे सारण में विभिन्न इंजीनियरिंग टीमों के साथ प्रगति रिपोर्ट देखते रहे। यह संदेश देने की कोशिश थी कि सत्ता भले ही बदल रही हो, लेकिन विकास के कार्यों में उनकी रुचि और पकड़ अंतिम क्षण तक बनी हुई है। सारण से लौटने के बाद, शाम साढ़े चार बजे फिर से जेडीयू के वरीय नेताओं का उनके आवास पर जमावड़ा लगा, जहाँ देर रात तक मंथन जारी रहा।
शपथ ग्रहण और नई भूमिकाओं का इंतजार
भाजपा के खेमे में इस समय जबरदस्त उत्साह है क्योंकि आज़ादी के बाद पहली बार पार्टी बिहार में ‘लीड रोल’ में आने वाली है। सम्राट चौधरी का आवास केवल बैठकों का अड्डा नहीं, बल्कि भाजपा के लिए एक नए ‘शक्ति केंद्र’ के रूप में उभरा है। प्रशासनिक अधिकारियों का तांता यह बता रहा है कि नौकरशाही भी नए आकाओं के हिसाब से खुद को ढालने में जुट गई है।
राधामोहन सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि दिल्ली का केंद्रीय नेतृत्व इस पूरे परिवर्तन को बहुत बारीकी से देख रहा है। बुधवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह केवल सरकार बदलने का जश्न नहीं होगा, बल्कि यह बिहार में भाजपा की सांगठनिक मजबूती का प्रदर्शन भी होगा। सम्राट चौधरी के आवास पर अतिरिक्त संख्या में पुलिस की तैनाती और वहां बढ़ती भीड़ इस बात का साफ संकेत है कि मंगलवार को होने वाला औपचारिक एलान केवल एक औपचारिकता मात्र रह गया है। पटना की सड़कों पर अब चर्चा केवल इस बात की है कि नई कैबिनेट में किन नए चेहरों को जगह मिलेगी और नीतीश कुमार की अगली पारी का स्वरूप क्या होगा। सोमवार की रात पटना के लिए एक ऐसी शांत रात है जिसके बाद आने वाली सुबह बिहार की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने का वादा लेकर आ रही है।


