
सुल्तानगंज। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड अंतर्गत पीपरा गांव इन दिनों एक फिल्मी पटकथा जैसी प्रेम कहानी के सुखद अंत का गवाह बना है। कहते हैं कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती और जब इरादे मजबूत हों, तो सात समंदर तो क्या, दो राज्यों की दूरियां भी छोटी पड़ जाती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को सुल्तानगंज में देखने को मिला, जहाँ झारखंड के गोड्डा से भागकर आई एक प्रेमिका को उसका अपना प्यार मिल गया। दो साल पहले एक शादी समारोह में शुरू हुई यह प्रेम कहानी कई उतार-चढ़ाव, पुलिसिया कार्रवाई और सामाजिक पंचायत के बाद आखिरकार मंदिर की दहलीज तक पहुँच गई। अग्नि को साक्षी मानकर प्रेमी युगल ने सात फेरे लिए और जन्म-जन्म के लिए एक-दूसरे के हो गए। इस पूरी घटना में सबसे अहम भूमिका स्थानीय ग्राम कचहरी और पंचों की रही, जिन्होंने दोनों पक्षों के बीच चल रहे भारी विवाद को सुलझाते हुए प्रेम को कानूनी और सामाजिक मान्यता दिलाई।
दो साल पहले एक शादी में शुरू हुआ था मुलाकातों का सिलसिला
इस प्रेम कहानी की बुनियाद आज से करीब दो साल पहले पड़ी थी। झारखंड के गोड्डा जिला अंतर्गत पथरगामा थाना क्षेत्र के कोरकाघाट की रहने वाली पुष्पा कुमारी (पिता स्वर्गीय मुन्ना मंडल की पुत्री) सुल्तानगंज के पीपरा गांव आई थी। वह यहाँ अपने ममेरी बहन के देवर की शादी में शामिल होने पहुँची थी। इसी शादी समारोह के दौरान उसकी मुलाकात पीपरा गांव के ही रहने वाले अक्षय शर्मा (पिता स्वर्गीय राजकुमार शर्मा का पुत्र) से हुई। पहली ही मुलाकात में दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गया। शादी खत्म होने के बाद पुष्पा अपने घर गोड्डा लौट गई, लेकिन अक्षय के साथ उसका संपर्क बना रहा। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के इस दौर में दोनों के बीच दूरियां कभी आड़े नहीं आईं और उनका प्यार परवान चढ़ता रहा।
शुक्रवार की रात गोड्डा से भागलपुर का सफर
बीते दो वर्षों से चल रहे इस प्रेम संबंध को जब पुष्पा ने स्थायी मोड़ देने का फैसला किया, तो उसे घर वालों के विरोध का अंदेशा था। इसी डर और अक्षय के साथ रहने की चाहत में पुष्पा ने एक बड़ा कदम उठाया। बीते शुक्रवार को वह अपने घर से बिना किसी को बताए भाग निकली। उसने गोड्डा के पथरगामा से भागलपुर तक का सफर तय किया। भागलपुर रेलवे स्टेशन पर अक्षय पहले से ही उसका इंतजार कर रहा था। जैसे ही पुष्पा वहाँ पहुँची, अक्षय उसे अपने साथ लेकर पीपरा गांव आ गया। पुष्पा के घर से गायब होने के बाद उसके परिजनों ने पथरगामा थाने में इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिस सक्रिय हुई।
पुष्पा का लोकेशन ट्रेस करते हुए पथरगामा पुलिस भागलपुर के बाथ थाने तक पहुँची। जैसे ही पुलिसिया कार्रवाई की आहट पीपरा गांव तक पहुँची, गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। पुलिस को पता चला कि लड़की अक्षय के घर पर ही मौजूद है। मामला दो राज्यों की पुलिस के बीच पहुँच चुका था, जिससे अक्षय के परिवार पर भी दबाव बढ़ने लगा। इसी बीच स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों ने मामले को कानूनी पचड़ों में उलझाने के बजाय सामाजिक स्तर पर सुलझाने की पहल की।
करहरिया ग्राम कचहरी में दिनभर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
सोमवार की सुबह से ही सुल्तानगंज की करहरिया ग्राम कचहरी में हलचल तेज थी। सरपंच महेन्द्र शर्मा की मौजूदगी में पंचायत बुलाई गई, जहाँ दोनों पक्षों के लोग एकत्रित हुए। एक तरफ पुष्पा के परिजन थे जो उसे वापस गोड्डा ले जाने पर अड़े थे, तो दूसरी तरफ अक्षय और उसके परिवार वाले थे जो पुष्पा को अपनाने के लिए तैयार तो थे, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई से डरे हुए थे। पंचायत में मौजूद पुष्पा ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि वह अक्षय के बिना कहीं नहीं जाएगी।
पूरे दिन चली इस पंचायत में माहौल कई बार तनावपूर्ण हुआ। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंकझोंक, खींचतान और बहसबाजी चलती रही। पुष्पा के परिजनों का आरोप था कि लड़के ने उसे बहला-फुसलाकर बुलाया है, जबकि पुष्पा बार-बार अपने फैसले पर अडिग रही। सरपंच महेन्द्र शर्मा और अन्य पंचों ने दोनों परिवारों को समझाने की कोशिश की कि यदि लड़का और लड़की बालिग हैं और एक-दूसरे के साथ रहना चाहते हैं, तो विरोध का कोई अर्थ नहीं है। सामाजिक दबाव और पुलिस के हस्तक्षेप की संभावना को देखते हुए आखिरकार पुष्पा के परिजन झुकने को तैयार हुए।
स्टांप पेपर पर लिखा गया ‘सहमति का अनुबंध’
ग्रामीण परिवेश में इस तरह की शादियों में भविष्य की कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए पंचों ने एक ठोस रास्ता निकाला। कचहरी में ही स्टांप पेपर मंगवाया गया, जिस पर दोनों पक्षों की लिखित सहमति दर्ज की गई। इस कागजी कार्रवाई में स्पष्ट किया गया कि पुष्पा और अक्षय अपनी मर्जी से विवाह कर रहे हैं और इसमें किसी भी पक्ष का कोई दबाव नहीं है। दोनों तरफ के गवाहों ने इस पर हस्ताक्षर किए और सरपंच ने अपनी आधिकारिक मुहर लगाई। इस दस्तावेजीकरण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भविष्य में गोड्डा या भागलपुर पुलिस के सामने कोई भी पक्ष एक-दूसरे पर अपहरण या अन्य गंभीर आरोप न लगा सके।
स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर होने के बाद पंचायत ने अपना फैसला सुनाया और दोनों की शादी कराने का निर्णय लिया। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच की कड़वाहट थोड़ी कम हुई और वे मंदिर में विवाह की रस्मों के लिए तैयार हो गए।
मंदिर में लिए सात फेरे: पुष्पा बनी अक्षय की अर्धांगिनी
सोमवार की देर शाम सुल्तानगंज के एक स्थानीय मंदिर में विवाह की रस्मों की तैयारी की गई। गांव के लोग और पंचायत के प्रतिनिधि इस विवाह के साक्षी बने। पुष्पा और अक्षय ने अग्नि के चारों ओर सात फेरे लिए और अक्षय ने पुष्पा की मांग में सिंदूर भरकर उसे अपनी पत्नी स्वीकार किया। मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई इस शादी ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया जो पिछले तीन दिनों से पीपरा गांव में चल रही थीं।
विवाह संपन्न होने के बाद नवविवाहित जोड़े ने पंचों और अपने बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। पुष्पा के चेहरे पर अपने प्यार को पाने की खुशी साफ झलक रही थी, तो वहीं अक्षय ने भी जिम्मेदारी निभाने का भरोसा दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुल्तानगंज में इस तरह के प्रेम विवाह पहले भी हुए हैं, लेकिन इस मामले में जिस तरह से ग्राम कचहरी ने सक्रियता दिखाकर दो परिवारों को टूटने से बचाया और एक जोड़े को नया जीवन दिया, वह काबिले तारीफ है।
कानूनी और सामाजिक पहलुओं का संतुलन
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में ग्राम कचहरी और पंचायती राज व्यवस्था की महत्ता को रेखांकित किया है। यदि यह मामला केवल पुलिस के भरोसे रहता, तो शायद इसे सुलझाने में महीनों लग जाते और दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी और अधिक बढ़ जाती। सरपंच महेन्द्र शर्मा ने संतुलित भूमिका निभाते हुए कानून और समाज के बीच का रास्ता निकाला। पथरगामा और बाथ थाने की पुलिस को भी इस समझौते की जानकारी दे दी गई है, जिससे अब इस मामले में किसी भी तरह की कानूनी अड़चन की संभावना खत्म हो गई है।
अक्षय शर्मा और पुष्पा कुमारी की यह शादी अब सुल्तानगंज के पीपरा गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव के युवाओं के लिए यह एक मिसाल है कि यदि प्रेम सच्चा हो और उसे सही तरीके से समाज के सामने रखा जाए, तो पंच और बुजुर्ग भी साथ खड़े होते हैं। पुष्पा अब गोड्डा की बेटी से पीपरा गांव की बहू बन चुकी है और अक्षय के घर में उसका गृह प्रवेश भी पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे सकारात्मक बात यह रही कि किसी भी पक्ष ने हिंसा का सहारा नहीं लिया और अंततः बातचीत के जरिए एक सुखद समाधान निकला। बिहार की ग्रामीण अदालतों यानी ग्राम कचहरियों का यह लचीलापन और संवेदनशीलता ही इसे न्याय की प्राथमिक इकाई बनाती है। पीपरा गांव की गलियां अब इस नई जोड़ी के स्वागत के लिए तैयार हैं, और इसी के साथ गोड्डा से सुल्तानगंज तक का यह प्रेम सफर अपनी मंजिल पर पहुँच गया है।


