
नई दिल्ली: Iran के राजदूत Fathali ने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारतीय जहाजों से Strait of Hormuz से गुजरने के लिए टोल वसूला गया है।
नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा कि ईरान ने भारत से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को संदेह है तो वह इस बारे में भारत सरकार से पुष्टि कर सकता है।
भारत-ईरान रिश्तों पर भरोसा
राजदूत ने कहा कि India और Iran के बीच संबंध ऐतिहासिक और मजबूत हैं। उन्होंने इसे भरोसेमंद साझेदारी बताते हुए कहा कि ईरान के विदेश मंत्री भी भारत को करीबी मित्र देशों में शामिल करते हैं।
भारत के लिए Strait of Hormuz बेहद अहम है, क्योंकि देश का लगभग आधा कच्चा तेल और एलपीजी आयात इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
हालांकि, मौजूदा हालात में भारत के करीब 15 जहाज अब भी Persian Gulf में फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने की कोशिशें जारी हैं।
अमेरिका से बातचीत के संकेत
इस्लामाबाद में United States और Iran के बीच हुई वार्ता के बेनतीजा रहने के बावजूद ईरान ने बातचीत के दरवाजे बंद नहीं किए हैं।
राजदूत फतहाली ने कहा कि अगर वाशिंगटन अपनी ‘गैर-कानूनी मांगों’ को छोड़ता है, तो ईरान अगले दौर की बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने वार्ता विफल होने के लिए अमेरिकी शर्तों को जिम्मेदार ठहराया।
ट्रंप की धमकी पर सख्त रुख
Donald Trump द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और जहाजों को रोकने की धमकी पर भी ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
राजदूत ने चेतावनी देते हुए कहा कि वाशिंगटन ईरान की सैन्य क्षमताओं से अच्छी तरह परिचित है और किसी भी आक्रामक कदम के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने दोहराया कि Strait of Hormuz का बड़ा हिस्सा ईरान की क्षेत्रीय जल सीमा में आता है और इस पर उसका संप्रभु अधिकार है।


