नीट पुनर्परीक्षा में सॉल्वर गैंग का बड़ा खुलासा, मास्टरमाइंड अमृत समेत 30 गिरफ्तार; MBBS छात्र भी शामिल

लखीसराय। बिहार में नीट पुनर्परीक्षा 2026 के दौरान एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। लखीसराय में फर्जी परीक्षार्थियों के जरिए परीक्षा दिलाने वाले संगठित गिरोह का खुलासा होने के बाद शिक्षा जगत और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। इस मामले में पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड अमृत समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है।

सोमवार को समाहरणालय स्थित मंत्रणा कक्ष में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने पूरे मामले का खुलासा किया। अधिकारियों के अनुसार गिरोह लंबे समय से सुनियोजित तरीके से मोटी रकम लेकर फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षाओं में बैठाने का काम कर रहा था।

मास्टरमाइंड अमृत चला रहा था पूरा नेटवर्क

प्रशासन के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का संचालन अमृत नामक व्यक्ति कर रहा था, जिसने अलग-अलग राज्यों और मेडिकल संस्थानों से जुड़े छात्रों को जोड़कर सॉल्वर गैंग तैयार किया था।

जांच में सामने आया कि यह गिरोह वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर मेधावी छात्रों, मेडिकल विद्यार्थियों और स्कॉलर्स को परीक्षा केंद्रों में बैठाकर परीक्षा दिलाने का काम करता था।

MBBS छात्र बना बायोमैट्रिक कर्मी

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि पीएमसीएच पटना का एक एमबीबीएस छात्र मयंक कश्यप खुद को बायोमैट्रिक कर्मचारी बताकर परीक्षा केंद्र तक पहुंच गया।

आरोप है कि उसने फर्जी अभ्यर्थियों को केंद्र में प्रवेश दिलाने में अहम भूमिका निभाई। बायोमैट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में छेड़छाड़ कर डमी कैंडिडेट्स को अंदर भेजा गया।

इस खुलासे ने परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन केंद्रों पर छापेमारी

डीएम और एसपी ने बताया कि 21 जून को जिले के चार परीक्षा केंद्रों पर नीट पुनर्परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा को कदाचारमुक्त रखने के लिए सभी केंद्रों पर दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी और पर्याप्त पुलिस बल तैनात था।

इसी दौरान सूचना मिली कि कुछ केंद्रों पर वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह डमी परीक्षार्थियों को बैठाने की कोशिश हो रही है।

सूचना के सत्यापन के बाद गठित टीम ने निम्न परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी की—

  • केआरके कॉलेज
  • केंद्रीय विद्यालय
  • उच्च विद्यालय, हसनपुर

छापेमारी के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेज बरामद

जांच में सामने आया कि बायोमैट्रिक कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे। डमी कैंडिडेट्स के लिए नकली आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज बनाए गए थे ताकि वे असली अभ्यर्थियों के रूप में परीक्षा दे सकें।

पुलिस ने कई डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

देश के बड़े मेडिकल कॉलेजों के छात्र शामिल

गिरफ्तार लोगों में देश के कई प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के छात्र शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार पकड़े गए लोगों में शामिल हैं—

  • न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल College
  • एएनएमसीएच गया
  • रायबरेली
  • यूसीएमएस दिल्ली
  • एनएमसीएच पटना
  • अन्य मेडिकल संस्थानों के छात्र

इनमें MBBS, BAMS, BSc Nursing और B-Pharma के विद्यार्थी शामिल बताए गए हैं।

कुल 30 गिरफ्तार

पुलिस ने अब तक गिरफ्तार किया है—

  • 9 डमी परीक्षार्थी
  • 1 मूल अभ्यर्थी
  • 2 सहयोगी
  • 18 बायोमैट्रिक कर्मी

कुल मिलाकर 30 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

अन्य राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं तार

पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां आर्थिक लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रेल खंगाल रही हैं।

संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।

मामले में किउल थाना कांड संख्या 64/26 तथा कवैया थाना कांड संख्या 244/26 और 245/26 दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

डीएम और एसपी का कड़ा संदेश

जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने साफ कहा—

“परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।”

वहीं एसपी प्रेरणा कुमार ने बताया कि गिरोह के आर्थिक नेटवर्क, संपर्क सूत्रों और संभावित सरगनाओं की जांच जारी है।

नीट पुनर्परीक्षा में फर्जीवाड़े के खिलाफ यह कार्रवाई बिहार में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इस खुलासे ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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