
बिहार की राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के बाद अब राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुए केंद्रीय मंत्री को बिहार का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे चौहान
बीजेपी नेतृत्व द्वारा दी गई जिम्मेदारी के तहत शिवराज सिंह चौहान 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे। वहां वे विधायक दल के नेता के चयन की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
इस दौरे को बिहार में सत्ता परिवर्तन की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके आगमन के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
पार्टी ने सौंपी अहम जिम्मेदारी
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि पार्टी के संसदीय बोर्ड ने चौहान को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
यह निर्णय इस बात का संकेत है कि पार्टी इस बार मुख्यमंत्री चयन को लेकर कोई चूक नहीं करना चाहती और पूरी प्रक्रिया को केंद्रीय स्तर से नियंत्रित कर रही है।
क्या बोले शिवराज सिंह चौहान?
जिम्मेदारी मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे खुद को पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता मानते हैं और जो भी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जाती है, उसे पूरी निष्ठा से निभाना उनका कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि वे पार्टी के निर्देशों के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया को पूरा करेंगे और सभी विधायकों के साथ समन्वय बनाकर निर्णय लिया जाएगा।
बीजेपी के हाथ में अंतिम फैसला
बिहार सरकार में मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री के चयन में बीजेपी की भूमिका निर्णायक होगी।
उन्होंने कहा कि बीजेपी जिस नाम की अनुशंसा करेगी, उसी के आधार पर एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब अंतिम फैसला पूरी तरह बीजेपी के पाले में है।
राज्यसभा जाने के बाद बदली तस्वीर
हाल ही में नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
नई दिल्ली में उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और राज्य में नेतृत्व परिवर्तन होगा।
कौन होगा अगला मुख्यमंत्री?
बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। हालांकि पार्टी ने अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जातीय समीकरण, संगठनात्मक संतुलन और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
14 अप्रैल पर टिकी सबकी नजर
अब बिहार की राजनीति में सबकी नजर 14 अप्रैल पर टिकी है, जब शिवराज सिंह चौहान पटना पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
इस दिन के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि राज्य की कमान किस नेता के हाथों में जाएगी।
कुल मिलाकर, बिहार में नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है और बीजेपी इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभा रही है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी किस नाम पर मुहर लगाती है और आने वाले समय में राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।


