
बिहार के कटिहार जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जीविका (महिला स्वयं सहायता समूह) से जुड़े एक अधिकारी पर छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। इस मामले ने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी है, बल्कि महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उनका आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड की रहने वाली जीविका कैडर चुन्नी देवी ने कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर धीरेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि अधिकारी ने उनके साथ छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न किया। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब अन्य महिला कर्मियों ने भी सामने आकर इसी तरह के आरोप लगाए।
बताया जा रहा है कि यह कोई पहली शिकायत नहीं है, बल्कि पहले भी कई बार इस तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
37 महिलाओं ने पहले ही दी थी शिकायत
सूत्रों के अनुसार, करीब 37 महिलाओं ने पहले ही लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
महिलाओं का आरोप है कि उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई।
अब जब मामला FIR तक पहुंच गया है, तब भी कार्रवाई में सुस्ती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
FIR के बाद भी कार्रवाई में देरी
पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद भी आरोपी के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।
इससे महिलाओं में नाराजगी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
DM से लगाई न्याय की गुहार
मामले में पीड़िता ने जिला पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है और प्रशासन से आग्रह किया है कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए।
यह आवेदन इस बात का संकेत है कि पीड़ित पक्ष अब सीधे प्रशासन के उच्च स्तर से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है।
क्या आरोपी को मिल रहा संरक्षण?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या आरोपी को विभागीय संरक्षण मिल रहा है?
महिलाओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना इस ओर इशारा करता है कि कहीं न कहीं आरोपी को बचाने की कोशिश हो रही है।
हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आरोपी ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, आरोपी कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ये आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, जिला परियोजना प्रबंधक इंद्र शेखर इंदु ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
महिला सशक्तिकरण मॉडल पर उठे सवाल
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जीविका योजना को बिहार में महिला सशक्तिकरण के एक सफल मॉडल के रूप में देखा जाता है।
ऐसे में अगर इसी योजना से जुड़े अधिकारियों पर इस तरह के आरोप लगते हैं, तो यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है
कटिहार का यह मामला केवल एक व्यक्ति के खिलाफ आरोप नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही की भी परीक्षा है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और पीड़ित महिलाओं को कब तक न्याय मिल पाता है।


