
मधेपुरा में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान राजनीतिक रणनीतिकार ने केंद्र सरकार और बिहार की राजनीति को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने महिला आरक्षण बिल से लेकर बिहार के अगले मुख्यमंत्री तक के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
महिला आरक्षण पर सरकार की मंशा पर सवाल
प्रशांत किशोर ने संसद में प्रस्तावित महिला आरक्षण बिल के विशेष सत्र को लेकर कहा कि यह मुद्दा कोई नया नहीं है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की चर्चा कई सालों पहले हो चुकी है और इसे लागू करने की दिशा में पहले भी प्रयास हुए हैं।
उनका आरोप था कि वर्तमान समय में इस मुद्दे को उठाने के पीछे राजनीतिक मकसद है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु, वहां की महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इस मुद्दे को फिर से हवा दी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर गंभीर होती, तो इस दिशा में पहले ही ठोस कदम उठाए जाते।
बिहार के नए CM को लेकर भी साधा निशाना
बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर जारी सियासी हलचल पर भी प्रशांत किशोर ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब बिहार का मुख्यमंत्री वही बनेगा, जिसे केंद्र की सत्ता में बैठे नेता तय करेंगे।
उन्होंने सीधे तौर पर और का जिक्र करते हुए कहा कि फैसला बिहार में नहीं बल्कि बाहर से लिया जाएगा।
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री के चयन में राज्य की प्राथमिकताओं की जगह बाहरी राजनीतिक समीकरण हावी हो रहे हैं।
“बिहार नहीं, गुजरात प्राथमिकता” का आरोप
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में बदलाव देखने को मिलेगा, लेकिन यह बदलाव राज्य के विकास को केंद्र में रखकर नहीं होगा।
उनका कहना था कि जिस तरह की राजनीतिक स्थिति बन रही है, उसमें बिहार के विकास की बजाय अन्य राज्यों के राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी गर्मी
प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। सत्ताधारी दलों की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दलों ने उनके बयान को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी सियासी हलचल
बिहार में संभावित नेतृत्व परिवर्तन और केंद्र की राजनीति के असर को लेकर पहले ही चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर का यह बयान इस बहस को और हवा देने का काम कर सकता है।
मधेपुरा से दिए गए इस बयान के जरिए उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले समय में वे सरकार की नीतियों और फैसलों पर लगातार सवाल उठाते रहेंगे।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण बिल और बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर प्रशांत किशोर के बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।


