सुल्तानगंज में मानवता की मिसाल: वैदिक जागृति मंच के रक्तदान शिविर में उमड़ा जनसैलाब, सैकड़ों लोगों ने दिया जीवनदान

सुल्तानगंज (भागलपुर)। समाज सेवा और परोपकार की दिशा में काम कर रहे वैदिक जागृति मंच ने रविवार को सुल्तानगंज के अशौका सम्राट भवन में एक विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन कर मानवता की नई इबारत लिखी है। अक्सर धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहने वाले सुल्तानगंज प्रखंड में इस बार का दृश्य कुछ अलग और बेहद प्रेरणादायक था। यहाँ न केवल युवाओं ने बल्कि समाज के हर वर्ग के लोगों ने स्वेच्छा से आगे आकर रक्तदान किया। इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र में रक्त की कमी को दूर करना और लोगों के भीतर दूसरों की जान बचाने के प्रति जागरूकता पैदा करना था। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर राजनीति और शिक्षा जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की, जिससे न केवल रक्तदाताओं का उत्साह बढ़ा, बल्कि समाज में ‘रक्तदान-महादान’ का संदेश भी पूरी प्रखरता के साथ पहुँचा।

भव्य उद्घाटन और अतिथियों का समागम

​कार्यक्रम की शुरुआत अशौका सम्राट भवन के परिसर में मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर पूर्व सांसद सह पूर्व विधायक सुबोध राय, प्रशिक्षु एएसपी सायम रजा, रेफरल अस्पताल सुल्तानगंज के प्रभारी कुंदन भाई पटेल, मुरारका महाविद्यालय के प्राचार्य नागेंद्र तिवारी, ए के गोपाल कॉलेज के सचिव अर्जुन प्रसाद, नगर सभापति राज कुमार गुड्डू और जदयू नेता शशि भूषण कुमार ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर शिविर का विधिवत शुभारंभ किया।

​वैदिक जागृति मंच के अध्यक्ष दीपांकर प्रसाद ने अपने सदस्यों के साथ मिलकर सभी मुख्य अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक मर्यादाओं का पालन करते हुए सभी अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल शिष्टाचार नहीं था, बल्कि उन व्यक्तियों के प्रति आभार था जिन्होंने समाज के प्रति अपनी जवाबदेही को समझा और इस नेक कार्य में अपना समर्थन दिया। दीप प्रज्वलन के पश्चात पूरा परिसर तालियों की गूँज से भर गया, जो इस बात का संकेत था कि सुल्तानगंज की धरती सेवा के इस महायज्ञ के लिए पूरी तरह तैयार है।

रक्तदान: एक जीवन रक्षक अपील

​शिवि‍र को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद सुबोध राय ने कहा कि रक्त का कोई विकल्प नहीं होता। इसे किसी फैक्ट्री में बनाया नहीं जा सकता, यह केवल एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान को दिया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन में कम से कम साल में दो बार रक्तदान करने का संकल्प लें। वहीं प्रशिक्षु एएसपी सायम रजा ने प्रशासनिक दृष्टिकोण और मानवीय संवेदनाओं को जोड़ते हुए कहा कि कई बार दुर्घटनाओं के समय रक्त की उपलब्धता न होने के कारण कीमती जानें चली जाती हैं। ऐसे शिविर उन लोगों के लिए संजीवनी का काम करते हैं जो जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे होते हैं।

​रेफरल अस्पताल के प्रभारी कुंदन भाई पटेल ने रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ बताया कि रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि नया रक्त बनने से शरीर अधिक ऊर्जावान और स्वस्थ होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक यूनिट रक्त से कम से कम तीन व्यक्तियों की जान बचाई जा सकती है क्योंकि रक्त को प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और रेड सेल्स में विभाजित किया जा सकता है।

सैकड़ों दानवीरों ने पेश की मिसाल

​वैदिक जागृति मंच के इस आह्वान पर सुल्तानगंज और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अशौका सम्राट भवन पहुँचे। शिविर में सुबह से ही पंजीकरण के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। आंकड़ों के अनुसार, शाम तक सैकड़ों लोगों ने अपना रक्तदान किया। इसमें पहली बार रक्तदान करने वाले युवाओं की संख्या काफी अधिक थी। महिलाओं ने भी इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बदलती सोच का परिचायक है।

​रक्तदान करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे पर एक अलग ही सुकून और गौरव का भाव था। कई युवाओं का कहना था कि वे अक्सर सोशल मीडिया पर रक्त की कमी के मैसेज देखते थे, लेकिन आज प्रत्यक्ष रूप से इस प्रक्रिया का हिस्सा बनकर उन्हें वास्तविक संतुष्टि मिली है। शिविर के दौरान प्रत्येक रक्तदाता की पहले प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें उनका वजन, हीमोग्लोबिन और रक्तचाप मापा गया। पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद ही उन्हें रक्तदान करने की अनुमति दी गई।

जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की टीम की मुस्तैदी

​रक्त संग्रहण की जिम्मेदारी भागलपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) के ब्लड बैंक की टीम को सौंपी गई थी। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की एक बड़ी टीम अत्याधुनिक उपकरणों के साथ शिविर में मौजूद थी। टीम ने पूरी सावधानी और स्वच्छता के साथ रक्त का संग्रहण किया। चिकित्सकों ने बताया कि यहाँ संग्रहित किए गए रक्त को विशेष तापमान पर सुरक्षित रखा जाएगा और इसे जरूरतमंदों, विशेषकर थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और प्रसव के दौरान रक्त की कमी झेल रही महिलाओं के लिए उपयोग में लाया जाएगा।

​मायागंज अस्पताल के डॉक्टरों ने वैदिक जागृति मंच के प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे व्यवस्थित कैंपों की मदद से ही जिले के ब्लड बैंक में रक्त का पर्याप्त स्टॉक बना रहता है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को दर-दर नहीं भटकना पड़ता।

वैदिक जागृति मंच: सेवा का नया पर्याय

​इस पूरे कार्यक्रम की सफलता के पीछे दीपांकर प्रसाद और उनकी टीम की कड़ी मेहनत छिपी थी। मंच के सदस्यों ने कई दिनों तक क्षेत्र में जनसंपर्क कर लोगों को जागरूक किया था। दीपांकर प्रसाद ने कहा कि वैदिक जागृति मंच का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक चेतना जगाना नहीं है, बल्कि समाज की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना भी है। उन्होंने बताया कि रक्त की कमी एक गंभीर सामाजिक समस्या है और उनका संगठन भविष्य में भी ऐसे शिविरों का आयोजन निरंतर करता रहेगा।

​शिविर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंच के कार्यकर्ताओं ने कड़ी मेहनत की। रक्तदाताओं के लिए अल्पाहार, जूस और फल की भी व्यवस्था की गई थी ताकि रक्तदान के बाद उन्हें किसी प्रकार की अस्वस्थता महसूस न हो। इसके साथ ही प्रत्येक रक्तदाता को एक प्रशस्ति पत्र भी दिया गया, जो उनके इस महान योगदान की स्मृति के रूप में उनके पास रहेगा।

सामुदायिक सहयोग और भविष्य की राह

​शिविर में केवल नेता और अधिकारी ही नहीं, बल्कि शिक्षा जगत के दिग्गज भी शामिल हुए। मुरारका महाविद्यालय के प्राचार्य नागेंद्र तिवारी और ए के गोपाल कॉलेज के सचिव अर्जुन प्रसाद ने कहा कि वे अपने-अपने संस्थानों में भी छात्रों के बीच इस तरह की सेवा भावना को प्रोत्साहित करेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि कॉलेजों में समय-समय पर जागरूकता व्याख्यान आयोजित किए जाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी सेवा कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा सके।

​नगर सभापति राज कुमार गुड्डू ने कहा कि नगर प्रशासन इस तरह के हर सामाजिक प्रयास को अपना पूर्ण सहयोग देगा। उन्होंने सुल्तानगंज की जनता का धन्यवाद किया जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में आकर इस शिविर को सफल बनाया। जदयू नेता शशि भूषण कुमार ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।

सुल्तानगंज की नई पहचान

​अशौका सम्राट भवन में आयोजित इस रक्तदान शिविर ने यह साबित कर दिया है कि जब समाज का नेतृत्व और युवा शक्ति एक साथ मिलते हैं, तो बड़े बदलाव संभव हैं। सुल्तानगंज की धरती, जो सदियों से आध्यात्मिकता के लिए जानी जाती है, अब परोपकार के इस ‘रक्त दान’ अभियान के जरिए नई पहचान बना रही है। वैदिक जागृति मंच की यह पहल अन्य संगठनों के लिए भी एक प्रेरणा है।

​इस एक दिवसीय शिविर ने न केवल ब्लड बैंक को नई ताकत दी है, बल्कि कई अनमोल जिंदगियों को बचाने की उम्मीद भी जगाई है। सैकड़ों यूनिट रक्त का संग्रह होना इस बात का प्रमाण है कि इंसानियत आज भी जिंदा है और लोग एक-दूसरे की मदद के लिए तैयार हैं। प्रशासन और समाज के गणमान्य लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को एक सरकारी कार्यक्रम से ऊपर उठाकर एक ‘जन आंदोलन’ का रूप दे दिया। आने वाले समय में उम्मीद की जा सकती है कि भागलपुर जिले का हर प्रखंड सुल्तानगंज के इस मॉडल का अनुसरण करेगा।

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