​नवगछिया में बेखौफ अपराधियों का तांडव: घर से महज 50 मीटर दूर बासा पर सोए बुजुर्ग किसान की गोली मारकर हत्या

नवगछिया/भागलपुर। भागलपुर जिले के नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत आने वाले इस्माइलपुर थाना क्षेत्र में अपराधियों ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए खूनी खेल खेला है। शनिवार की देर रात पश्चिमी भिट्ठा गांव में अज्ञात अपराधियों ने एक 65 वर्षीय बुजुर्ग किसान की सोए हुए अवस्था में गोली मारकर हत्या कर दी। इस सनसनीखेज वारदात ने न केवल पूरे गांव को दहला दिया है, बल्कि पुलिसिया गश्ती और सुरक्षा दावों की भी पोल खोलकर रख दी है। मृतक की पहचान वार्ड संख्या 4 निवासी बुजुर्ग किसान बूट्टन मंडल के रूप में हुई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हत्या की यह वारदात मृतक के घर से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित उनके ‘बासा’ (पशु आश्रय स्थल) पर हुई, जहाँ वे रोज की तरह मवेशियों की रखवाली के लिए सोए हुए थे। गोली इतनी नजदीक से और इतने सटीक निशाने पर मारी गई कि वह पेट को चीरते हुए छाती के रास्ते बाहर निकल गई, जिससे बुजुर्ग किसान को संभलने या शोर मचाने का मौका तक नहीं मिला।

खामोश रात और खूनी वारदात: 50 मीटर के फासले पर कत्ल

​पश्चिमी भिट्ठा गांव में शनिवार की रात अन्य दिनों की तरह शांत थी। 65 वर्षीय बूट्टन मंडल अपने घर के पास ही स्थित बासा पर मवेशियों की देखभाल और रखवाली के लिए सोने गए थे। ग्रामीण क्षेत्रों में बासा पर सोना एक पुरानी परंपरा है, जहाँ किसान अपनी मेहनत की कमाई यानी पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए रात बिताते हैं। परिजनों के अनुसार, रात करीब दो से तीन बजे के बीच जब पूरा गांव गहरी नींद में था, तभी अज्ञात अपराधियों ने बासा पर धावा बोला। अपराधियों ने सोए हुए बूट्टन मंडल को निशाना बनाकर गोली दाग दी। गोली उनके पेट में लगी और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को छलनी करती हुई छाती से पार हो गई। अत्यधिक रक्तस्राव और शरीर के अंदरूनी अंगों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण बूट्टन मंडल की मौके पर ही मौत हो गई। अपराधियों ने वारदात को इतने शातिराना तरीके से अंजाम दिया कि पास ही स्थित घर के लोगों को भी किसी अनहोनी की भनक तक नहीं लगी।

सुबह का सन्नाटा और चीख-पुकार: बेटे ने देखा पिता का शव

​रविवार की सुबह जब सूरज की पहली किरण के साथ गांव जाग रहा था, तब बूट्टन मंडल के घर में मातम पसरने वाला था। रोज की तरह मृतक का बड़ा बेटा मवेशियों को चारा देने और दूध निकालने के लिए बासा पर पहुँचा। उसने देखा कि उसके पिता अभी भी चादर तानकर सोए हुए हैं। काफी आवाज देने के बाद भी जब कोई हलचल नहीं हुई, तो बेटे ने उन्हें जगाने की कोशिश की। जैसे ही उसने चादर हटाई, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। बिस्तर खून से लाल हो चुका था और उसके पिता मृत अवस्था में पड़े थे। बेटे की चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण और परिजन दौड़कर मौके पर पहुँचे। बासा पर बुजुर्ग किसान का शव देख पूरे गांव में कोहराम मच गया। घर से महज 50 मीटर की दूरी पर हुई इस हत्या ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के लोग इस बात से भी डरे हुए हैं कि अगर अपराधी घर के इतने करीब आकर हत्या कर सकते हैं, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है।

रहस्यमयी हत्या: मिलनसार व्यक्तित्व और ‘शून्य’ विवाद

​बूट्टन मंडल की हत्या के कारणों को लेकर गांव में कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उनकी हत्या क्यों की गई? ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बूट्टन मंडल एक सीधे-साधे और मिलनसार प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उनका गांव या आसपास के किसी भी व्यक्ति से कोई पुराना विवाद या दुश्मनी नहीं थी। वे अपना अधिकांश समय खेती-बारी और मवेशियों की सेवा में बिताते थे। ऐसे निष्कपट और सरल व्यक्ति की इतनी बेरहमी से हत्या क्यों की गई, यह गुत्थी अब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। क्या यह हत्या किसी भूमि विवाद का नतीजा है, या फिर इसके पीछे कोई गुप्त रंजिश है जिसकी जानकारी परिवार को भी नहीं थी? पुलिस इन तमाम पहलुओं पर बारीकी से तफ्तीश कर रही है।

पुलिसिया कार्रवाई और एफएसएल की तफ्तीश

​घटना की सूचना मिलते ही इस्माइलपुर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। मामले की गंभीरता और अपराधियों के पेशेवर अंदाज को देखते हुए भागलपुर से विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को भी बुलाया गया। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने, फिंगरप्रिंट्स और अन्य भौतिक साक्ष्यों को संकलित किया है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नवगछिया अनुमंडल अस्पताल भेज दिया है।

​थाना प्रभारी के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला सुनियोजित हत्या का प्रतीत होता है। जिस तरह से गोली मारी गई है, उससे स्पष्ट है कि अपराधी हत्या करने के इरादे से ही आए थे। पुलिस अब मृतक के परिजनों और आसपास के लोगों के बयान दर्ज कर रही है ताकि अपराधियों का कोई सुराग मिल सके। साथ ही, इलाके के संदिग्धों और पूर्व के अपराधियों की गतिविधियों को भी खंगाला जा रहा है।

क्षेत्र में बढ़ता अपराध और ग्रामीणों में आक्रोश

​इस्माइलपुर और नवगछिया के दियारा क्षेत्रों में अपराध की बढ़ती घटनाएं स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बन गई हैं। बुजुर्ग किसान की हत्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में रात के समय सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की गश्ती केवल मुख्य सड़कों तक सीमित रहती है, जबकि अंदरूनी गांवों और बासा वाले इलाकों में अपराधी बेखौफ घूमते हैं। बूट्टन मंडल जैसे सीधे किसान की हत्या के बाद किसानों में अपने बासा पर जाने और रात में रुकने को लेकर डर बैठ गया है। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस ने जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। गांव के युवाओं का कहना है कि प्रशासन केवल घटनाओं के बाद जांच का आश्वासन देता है, लेकिन अपराध रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

जांच के प्रमुख बिंदु: मोबाइल और आपसी रिश्तों पर नजर

​पुलिस की जांच अब कुछ विशेष बिंदुओं पर टिक गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बूट्टन मंडल के बेटों या परिवार के किसी अन्य सदस्य का किसी से कोई मनमुटाव था। अक्सर पारिवारिक रंजिश का बदला बुजुर्गों से लेकर अपराधियों द्वारा दहशत फैलाने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा, पुलिस आसपास के टावर डंप (Tower Dump) डाटा की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के वक्त इलाके में कौन-कौन से मोबाइल नंबर सक्रिय थे। अपराधियों ने जिस तरह से रात के अंधेरे में बासा का चुनाव किया, उससे यह भी संदेह जताया जा रहा है कि इस वारदात में किसी स्थानीय मुखबिर या गांव के ही किसी व्यक्ति की संलिप्तता हो सकती है जिसे बूट्टन मंडल के सोने के समय और स्थान की पूरी जानकारी थी।

सुशासन के दावों के बीच एक और बलि

​एक तरफ जहाँ बिहार में सुशासन और अपराध मुक्त समाज के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं नवगछिया की यह घटना उन दावों को आईना दिखा रही है। 65 साल के एक बुजुर्ग की, जिसका कोई दुश्मन नहीं था, उसके घर के द्वार पर हत्या हो जाना पुलिसिया तंत्र की विफलता है। बूट्टन मंडल का परिवार अब न्याय की आस में है। उनके बड़े बेटे और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में पसरा सन्नाटा किसी बड़े तूफान की आहट जैसा लग रहा है। अब गेंद नवगछिया पुलिस के पाले में है कि वह कितनी जल्दी इन अज्ञात हत्यारों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे पहुँचाती है। ‘द वॉइस ऑफ बिहार’ (VOB) इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और प्रशासन से मांग करता है कि इस मामले का स्पीडी ट्रायल कराकर दोषियों को फांसी की सजा दिलाई जाए ताकि भविष्य में कोई अपराधी किसी निर्दोष किसान के खून से अपने हाथ रंगने की जुर्रत न कर सके।

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