
भागलपुर। रेशम नगरी के बरारी थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले फेरी रोड इलाके में रविवार की सुबह सन्नाटे को चीरती हुई एक ऐसी चीख गूँजी, जिसने पूरे मोहल्ले के दिल को दहला दिया। एक तरफ शहर की धड़कनें अभी रफ्तार पकड़ ही रही थीं, वहीं दूसरी तरफ एक 23 वर्षीय युवक ने अपनी जिंदगी की रफ़्तार को हमेशा के लिए थाम लिया। मुंगेर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से बी-फार्मा की पढ़ाई कर रहे अंकित कुमार ने प्रेम प्रसंग में उपजी कड़वाहट के कारण फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना केवल एक परिवार के चिराग बुझने की नहीं है, बल्कि यह उन तमाम युवाओं की मानसिक स्थिरता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न है जो भावनाओं के आवेग में आकर अपने सुनहरे भविष्य को दांव पर लगा देते हैं।
अंकित, जो कल तक दवाइयों के नुस्खे पढ़कर लोगों की जान बचाने का ख्वाब देख रहा था, आज वह खुद एक ऐसी जानलेवा खामोशी का शिकार हो गया जिसका कोई इलाज उसे नहीं सूझा। रविवार की सुबह करीब 9 बजे जब उसकी मां और मौसी ने कमरे का दरवाजा खटखटाया, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि अंदर का मंजर उनकी पूरी दुनिया को उजाड़ चुका है।
रविवार की वो मनहूस सुबह और मायागंज का सन्नाटा
घटना का खुलासा तब हुआ जब अंकित काफी देर तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकला। सुबह के करीब 9 बज रहे थे और घर में नाश्ता तैयार था। मां ने कई बार उसे आवाज दी, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। जब संदेह हुआ तो परिजनों ने खिड़की से झांकने की कोशिश की और उनकी नजर सीधे फंदे से लटके अंकित पर पड़ी। इसके बाद घर में कोहराम मच गया। स्थानीय लोगों की मदद से आनन-फानन में फंदे को काटकर अंकित को नीचे उतारा गया और तत्काल भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय (मायागंज अस्पताल) ले जाया गया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सकों ने नब्ज टटोलते ही उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के उस एक वाक्य ने अंकित के परिजनों को जीते-जी मार दिया। मायागंज अस्पताल के गलियारों में अंकित की मां और मौसी का विलाप सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
इश्क, अनबन और 15 दिनों का वो मानसिक तनाव
इस आत्मघाती कदम के पीछे की कहानी अब धीरे-धीरे परतों में बाहर आ रही है। मृतक के रिश्तेदार राकेश कुमार ने बताया कि अंकित पिछले कुछ समय से भागलपुर की ही एक युवती के साथ गहरे प्रेम संबंध में था। घर वालों को इस रिश्ते की भनक करीब 15 दिन पहले ही लगी थी। परिजनों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से अंकित के व्यवहार में चिड़चिड़ापन और उदासी घर कर गई थी।
बताया जा रहा है कि अंकित और उस युवती के बीच किसी गंभीर मुद्दे को लेकर अनबन चल रही थी। यह विवाद इतना बढ़ गया था कि अंकित मानसिक तनाव के उस चरम पर पहुँच गया जहाँ उसे फांसी का फंदा ही एकमात्र समाधान नजर आया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि शनिवार रात को भी उसकी उक्त युवती से लंबी बात हुई थी। संभवतः उस बातचीत के दौरान ही कुछ ऐसा हुआ जिससे वह टूट गया। जिस उम्र में युवाओं के कंधों पर जिम्मेदारी और हाथों में डिग्री होनी चाहिए, उस उम्र में एक विवाद ने अंकित को मौत की दहलीज पर खड़ा कर दिया।
होनहार अंकित: मुंगेर से भोपाल और फिर मौत का सफर
अंकित कुमार कोई साधारण छात्र नहीं था, बल्कि वह अपने करियर को लेकर काफी गंभीर था। वह मुंगेर जिले के लखनपुर स्थित बी. चपनी चौधरी कॉलेज से बी-फार्मा का छात्र था। उसकी योग्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसे हाल ही में कॉलेज की ओर से विशेष प्रशिक्षण के लिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल भेजा गया था। भोपाल में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह सीधे घर नहीं लौटा, बल्कि वह पटना गया जहाँ उसने अपनी परीक्षाएं दीं।
परीक्षाएं खत्म करने के बाद जब वह घर लौटा, तो उसके चेहरे पर सफलता की चमक होनी चाहिए थी, लेकिन वहां केवल खामोशी थी। शनिवार की सुबह तक वह घर के सदस्यों के साथ सामान्य व्यवहार कर रहा था। किसी को इस बात की रत्ती भर भी आशंका नहीं थी कि भोपाल और पटना की सफल यात्रा करने वाला यह छात्र अपने ही घर में हार जाएगा। वह अपने माता-पिता की इकलौती उम्मीद था, जो फार्मासिस्ट बनकर उनके बुढ़ापे का सहारा बनने वाला था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
पुलिस की तफ्तीश: मोबाइल और कॉल रिकॉर्ड्स में छिपा है राज
सूचना मिलते ही बरारी थाना पुलिस ने अस्पताल पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली, हालांकि वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। थानाध्यक्ष का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला स्पष्ट रूप से प्रेम प्रसंग में आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही है।
अंकित का मोबाइल फोन इस गुत्थी को सुलझाने की सबसे बड़ी चाबी है। पुलिस ने फोन को जब्त कर लिया है और उसके कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) के साथ-साथ व्हाट्सएप चैट्स की भी सघन जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मरने से पहले उसकी आखिरी बातचीत किससे हुई थी और क्या उस दौरान उसे किसी ने उकसाया था। वह युवती कौन है और अंकित के साथ उसके संबंधों की वास्तविकता क्या थी, इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए पुलिस की एक टीम सादे लिबास में जानकारी जुटा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद मौत का सही समय और कारण और अधिक स्पष्ट हो पाएगा।
बिखरते परिवार और समाज के लिए एक चेतावनी
फेरी रोड स्थित अंकित के घर में अब केवल मातम और सन्नाटा पसरा है। उसकी मां की रुलाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। मोहल्ले के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं, क्योंकि अंकित की छवि एक शांत और पढ़ाकू लड़के की थी। इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने यह कड़वा सच रख दिया है कि हम अपनी नई पीढ़ी को तकनीकी शिक्षा तो दे रहे हैं, लेकिन उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने में विफल हो रहे हैं।
अंकित जैसे छात्र जो विज्ञान की जटिलताओं को समझ सकते थे, वे भावनाओं के भंवर में खुद को उलझा लेते हैं। प्रेम में अनबन या विवाद किसी की जान लेने का कारण नहीं होना चाहिए, लेकिन युवाओं में बढ़ती अति-संवेदनशीलता और धैर्य की कमी उन्हें ऐसे आत्मघाती रास्तों पर धकेल रही है। आज अंकित के परिवार के पास केवल उसकी यादें और वो किताबें बची हैं जिनके जरिए वह एक डॉक्टर या फार्मासिस्ट बनने का सपना देख रहा था। बरारी पुलिस ने आश्वस्त किया है कि यदि इस मामले में किसी की संलिप्तता या उकसावे की बात सामने आती है, तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुसाइड नोट नहीं, पर सवाल बड़े हैं
भागलपुर का यह मामला केवल एक पुलिस फाइल बनकर नहीं रह जाना चाहिए। यह हर उस माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जिनके बच्चे बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके बदलते व्यवहार पर नजर रखना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। अंकित कुमार का असमय जाना मुंगेर के उस कॉलेज के लिए भी एक क्षति है जिसने एक होनहार छात्र खो दिया। फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई जारी है और पूरा मोहल्ला गमगीन है। पोस्टमार्टम के बाद अंकित का शव उसके परिजनों को सौंप दिया जाएगा, जिसके बाद मुंगेर में उसका अंतिम संस्कार होगा। लेकिन फेरी रोड के उस कमरे की वो दीवारें हमेशा एक सवाल पूछती रहेंगी कि क्या एक रिश्ता किसी की अनमोल जिंदगी से बड़ा हो सकता है?


