प्रशांत किशोर का बड़ा धमाका: नीतीश कुमार की स्थिति पर उठाए सवाल, शराबबंदी और विकास कार्यों पर घेरा

सहरसा। बिहार की राजनीति में मचे भारी घमासान के बीच जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने रविवार, 12 अप्रैल 2026 को सहरसा में एक महत्वपूर्ण मीडिया ब्रीफिंग के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला। बिहार की सत्ता में होने जा रहे नेतृत्व परिवर्तन और नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबरों के बीच प्रशांत किशोर का यह बयान राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गया है। प्रशांत किशोर ने न केवल नीतीश कुमार की व्यक्तिगत स्थिति पर टिप्पणी की, बल्कि बिहार के प्रशासनिक ढांचे की विफलताओं को भी सड़कों पर लाकर खड़ा कर दिया। सहरसा की धरती से प्रशांत किशोर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में जो कुछ भी हो रहा है, वह किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं बल्कि एक ‘पॉलिटिकल फिक्सिंग’ का हिस्सा है, जिसमें जनता के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। उनके इस संबोधन ने कोसी क्षेत्र के राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है।

नीतीश कुमार की स्थिति और भाजपा का ‘मुखौटा’

​प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के नए राजनीतिक अध्याय, यानी उनके राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद से हटने के फैसले पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नीतीश कुमार की वर्तमान मानसिक और शारीरिक स्थिति अब वैसी नहीं रही कि वे इतने बड़े राज्य का भार संभाल सकें। किशोर ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार अब केवल एक ‘राजनीतिक मुखौटा’ बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने जानबूझकर उनके इस चेहरे का इस्तेमाल किया ताकि जनता को बरगलाया जा सके और सत्ता की चाबी अपने पास रखी जा सके।

​प्रशांत किशोर के अनुसार, भाजपा यह अच्छी तरह जानती थी कि नीतीश कुमार की प्रशासनिक पकड़ ढीली पड़ चुकी है, फिर भी उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाए रखा गया ताकि उनके नाम के सहारे अपनी जमीन मजबूत की जा सके। किशोर ने दावा किया कि अब जब भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है और नीतीश कुमार पूरी तरह अप्रासंगिक हो गए हैं, तो उन्हें राज्यसभा भेजकर सम्मानजनक विदाई दी जा रही है। उन्होंने इसे बिहार की जनता के साथ एक बड़ा धोखा करार दिया और कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

पंचायतों में विकास कार्य ठप: ठेकेदारों की बढ़ती नाराजगी

​बिहार सरकार की कार्यशैली पर हमला बोलते हुए प्रशांत किशोर ने जमीनी हकीकत का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिहार की पंचायतों में विकास के तमाम कार्य पूरी तरह ठप पड़ चुके हैं। नल-जल योजना हो या सात निश्चय के अन्य कार्य, हर जगह भ्रष्टाचार और धन के अभाव का बोलबाला है। किशोर ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन ठेकेदारों ने ईमानदारी से पंचायतों में काम पूरा किया है, उन्हें अब अपने भुगतान (Payment) के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

​सरकारी खजाना खाली होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ठेकेदारों को भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि भविष्य में कोई भी नया काम लेने से कतरा रहा है। प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार चलाने वालों की प्राथमिकता केवल सत्ता का हस्तांतरण हो, तो सड़कों, नालियों और शिक्षा की चिंता कौन करेगा? उन्होंने पंचायतों के मुखिया और वार्ड सदस्यों की बेबसी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें केवल कागजों पर अधिकार दिए गए हैं, लेकिन धरातल पर फंड के बिना वे पंगु बनकर रह गए हैं।

शराब कानून को हटाने की चर्चा: राजस्व का संकट

​बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को लेकर प्रशांत किशोर लंबे समय से हमलावर रहे हैं, लेकिन सहरसा की ब्रीफिंग में उन्होंने इस पर एक नया एंगल दिया। किशोर ने दावा किया कि बिहार सरकार अब इस कानून को वापस लेने या इसमें ढील देने की गुप्त चर्चाएं कर रही है। उनके अनुसार, शराबबंदी के कारण बिहार को सालाना करीब 20,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। अब जब सरकार के पास शिक्षकों को वेतन देने और विकास कार्यों के लिए पैसे नहीं बचे हैं, तो वे इस कानून को राजस्व के साधन के रूप में देख रहे हैं।

​प्रशांत किशोर ने कहा कि शराबबंदी के नाम पर बिहार में केवल एक समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हुई है, जहाँ पुलिस और माफियाओं की साठगांठ से शराब की होम डिलीवरी हो रही है। उन्होंने इसे सरकार की विफलता का सबसे बड़ा स्मारक बताया। किशोर का कहना है कि सरकार अब अपनी आर्थिक बदहाली से निपटने के लिए शराब कानून को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है। उन्होंने जनता को आगाह किया कि यह बदलाव किसी सामाजिक चेतना की वजह से नहीं, बल्कि सरकार की मजबूरी के कारण होने जा रहा है।

बिहार का भविष्य और जन सुराज का संकल्प

​मीडिया ब्रीफिंग के अंत में प्रशांत किशोर ने बिहार की जनता से आह्वान किया कि वे चेहरों के पीछे भागना बंद करें। उन्होंने कहा कि बिहार में सिर्फ नेतृत्व बदलना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था को बदलने की जरूरत है। किशोर ने अपनी ‘जन सुराज’ पदयात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि बिहार के लोग अब बदलाव के लिए तैयार हैं और वे विकल्प की तलाश में हैं।

​उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का जाना एक युग का अंत जरूर है, लेकिन यह नया सवेरा तभी होगा जब बिहार की सत्ता की बागडोर किसी अनुभवी और साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति के हाथ में होगी। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि वे बिहार के हर जिले और हर पंचायत तक पहुँचेंगे और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे। सहरसा की यह प्रेस ब्रीफिंग यह साफ कर गई कि आने वाले समय में प्रशांत किशोर बिहार की नई सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरेंगे।

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