​कटिहार सड़क हादसा: कोढ़ा में भीषण टक्कर, अब तक 13 की मौत

कटिहार/पूर्णिया। बिहार के कटिहार जिले में शनिवार की शाम एक ऐसी खौफनाक त्रासदी की गवाह बनी, जिसने न केवल सीमांचल बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। नेशनल हाईवे-31 (NH-31) पर कोढ़ा थाना क्षेत्र के बासगढ़ा चौक के पास हुई इस भीषण भिड़ंत में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 13 हो गई है। यह हादसा उस समय हुआ जब रफ्तार के जुनून और गलत ओवरटेकिंग की कोशिश ने हंसते-खेलते परिवारों को मलबे और खून के बीच तब्दील कर दिया। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 की शाम करीब छह बजे हुए इस हादसे में एक तेज रफ्तार बस, एक पिकअप वैन और एक बाइक की ऐसी त्रिकोणीय टक्कर हुई कि मौके पर केवल चीखें और सन्नाटा बाकी रह गया। इस हृदयविदारक घटना में 10 लोगों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया था, जबकि तीन अन्य घायलों की मौत इलाज के दौरान पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई। मृतकों में सात महिलाएं और एक मासूम युवती भी शामिल है, जो इस बात की तस्दीक करता है कि हादसा कितना वीभत्स था।

ओवरटेकिंग की सनक और मौत का तांडव

​हादसे की प्रत्यक्षदर्शी रिपोर्टों और शुरुआती जांच से यह साफ हो गया है कि इस खूनी मंजर की मुख्य वजह बस चालक की लापरवाही थी। पूर्णिया से भागलपुर की ओर जा रही बस, जिसमें करीब 50 यात्री सवार थे, काफी तेज रफ्तार में थी। बासगढ़ा चौक के पास बस चालक ने एक अन्य वाहन को ओवरटेक करने की कोशिश की, लेकिन सामने से आ रही पिकअप वैन को वह भांप नहीं सका। दोनों वाहनों के बीच आमने-सामने की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप वैन का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया।

​उसी दौरान वहां से गुजर रही एक मोटरसाइकिल भी इस विध्वंसक चपेट में आ गई। बाइक सवार सदानंद मुर्मू उर्फ राजेश की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पिकअप वैन में सवार 22 लोगों के लिए यह टक्कर किसी वज्रपात से कम नहीं थी। टक्कर के बाद शव और घायल लोग सड़क पर इधर-उधर बिखर गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस की गति इतनी अधिक थी कि टक्कर के बाद भी वह कई मीटर तक घिसटती चली गई, जिससे बाइक और पिकअप वैन के भीतर फंसे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

सुहवा गांव का मातम: आस्था के सफर का खौफनाक अंत

​इस हादसे की सबसे दुखद कड़ी पूर्णिया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित गौरा पंचायत का सुहवा गांव है। यहाँ के आदिवासी समुदाय के करीब 22 लोग शुक्रवार को एक पिकअप वैन किराए पर लेकर झारखंड के गोड्डा जिला स्थित ‘कठिया मेला’ देखने गए थे। वहां सिद्धू-कान्हू धाम में पूजा-अर्चना करने के बाद सभी लोग अपनी श्रद्धा और खुशियों के साथ घर वापस लौट रहे थे। उन्हें क्या पता था कि घर की दहलीज से कुछ ही किलोमीटर पहले मौत उनका रास्ता रोके खड़ी है।

​हादसे में मरने वाले अधिकांश लोग इसी गांव के रहने वाले हैं। जैसे ही शनिवार रात सुहवा गांव में मौतों की खबर पहुँची, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला और हर ओर से केवल रुदन और विलाप की आवाजें सुनाई दे रही थीं। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है; कोई अपनी मां को खो चुका है, तो कोई अपने घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य को। छोटे-छोटे बच्चे जो कल तक अपनी मां की गोद में मेले की कहानियाँ सुन रहे थे, आज वे अपनी मां के बेजान शरीर के पास बैठकर उसे पुकार रहे हैं।

पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में कराहते घायल और बढ़ता मौत का आंकड़ा

​हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने राहत कार्य शुरू किया। घायलों को पहले कोढ़ा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया, जहाँ उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में शनिवार की पूरी रात चीख-पुकार मची रही। अस्पताल के वार्डों में घायलों के दर्द की कराह और बाहर परिजनों का विलाप वातावरण को बोझिल बना रहा था।

​इलाज के दौरान ही तीन और लोगों ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों का आंकड़ा 13 तक पहुँच गया। वर्तमान में 27 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की हालत अब भी अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। कटिहार एसपी शिखर चौधरी ने अस्पताल का दौरा कर घायलों का हाल जाना और बताया कि पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर घायल को श्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा मिले। डॉक्टरों की एक विशेष टीम चौबीसों घंटे घायलों की निगरानी कर रही है।

आक्रोशित ग्रामीणों का प्रदर्शन और पुलिस की मुस्तैदी

​हादसे के बाद बासगढ़ा चौक पर स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने एनएच-31 पर जाम लगा दिया। लोगों का गुस्सा सड़क पर गुजर रही अन्य बसों पर भी फूटा। उनका आरोप था कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार बसों के कारण अक्सर हादसे होते हैं, लेकिन परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन इन पर लगाम लगाने में विफल रहा है।

​सूचना मिलते ही कोढ़ा थाना पुलिस और वरीय अधिकारी मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ को समझा-बुझाकर शांत किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद जाम हटवाया और यातायात को सुचारू कराया। कटिहार पुलिस ने बस को जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश में छापेमारी कर रही है। घटना के संबंध में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

देश के शीर्ष नेतृत्व ने जताया शोक: मुआवजे का ऐलान

​इस बड़ी त्रासदी ने देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे व्यक्तित्वों को भी मर्माहत कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘एक्स’ पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताया और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से सहायता राशि की भी घोषणा की है।

​मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया और मुआवजे की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि मृतकों के परिजनों और घायलों को बिना किसी देरी के सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।

श्रेणी

मुख्यमंत्री राहत कोष (अनुदान)

प्रधानमंत्री राहत कोष (PMNRF)

कुल सहायता राशि

प्रत्येक मृतक के परिजन

2,00,000 रुपये

2,00,000 रुपये

4,00,000 रुपये

प्रत्येक घायल व्यक्ति

50,000 रुपये

50,000 रुपये

1,00,000 रुपये

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल: क्या सबक लेंगे हम?

​कटिहार की यह घटना केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारी सड़क सुरक्षा व्यवस्था की विफलता का एक और प्रमाण है। एनएच-31 जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर, जहाँ भारी वाहनों का दबाव हमेशा बना रहता है, वहां ओवरटेकिंग और गति सीमा के नियमों का उल्लंघन जानलेवा साबित हो रहा है।

​पिकअप वैन जैसे मालवाहक वाहनों पर इंसानों का ढोया जाना भी एक बड़ा सुरक्षा जोखिम है, जिस पर प्रशासन अक्सर आंखें मूंद लेता है। यदि पिकअप में क्षमता से अधिक लोग न होते और बस की गति नियंत्रित होती, तो शायद इतने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान नहीं होता। यह हादसा उन तमाम लोगों के लिए एक चेतावनी है जो व्यर्थ की जल्दबाजी में अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं।

एक अपूरणीय क्षति

​12 अप्रैल 2026 की यह सुबह सीमांचल के लिए मातम की सुबह है। 13 जिंदगियाँ जो कल तक भविष्य के सपने देख रही थीं, आज वे केवल यादों में शेष हैं। सुहवा गांव का वह धार्मिक उत्साह अब जीवन भर के गम में बदल गया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा घोषित मुआवजा भले ही पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाने की एक कोशिश हो, लेकिन जो खालीपन इन परिवारों के जीवन में आया है, उसे कोई भी राशि नहीं भर सकती।

The Voice of Bihar की टीम इस दुःख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ है। हम प्रशासन से यह मांग करते हैं कि न केवल इस मामले के दोषियों को सजा मिले, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए एनएच-31 पर आधुनिक सुरक्षा यंत्रों और सख्त चेकिंग की व्यवस्था की जाए। जब तक रफ्तार और लापरवाही पर कानून की नकेल नहीं कसेगी, तब तक बिहार की सड़कों पर ऐसे खूनी खेल जारी रहेंगे। मृतकों को विनम्र श्रद्धांजलि।

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