मुंगेर में बनेगा इको-टूरिज्म हब, ढोल पहाड़ी को नई पहचान

मुंगेर में बनेगा इको-टूरिज्म हब, ढोल पहाड़ी को नई पहचान
मुंगेर: बिहार में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने मुंगेर जिले के असरगंज स्थित ढोल पहाड़ी को इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 12.49 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस फैसले से न केवल मुंगेर को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

सरकार की योजना के तहत तारापुर अनुमंडल के असरगंज में स्थित ढोल पहाड़ी को आधुनिक सुविधाओं से लैस एक बहुआयामी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना पर्यटन, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ने का काम करेगी, जिससे क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी।

ढोल पहाड़ी का ऐतिहासिक महत्व भी इस परियोजना को खास बनाता है। बताया जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह स्थान क्रांतिकारियों का एक महत्वपूर्ण ठिकाना था, जहां से अंग्रेजों के खिलाफ योजनाएं बनाई जाती थीं। अब इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित करते हुए इसे आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां इसके गौरवशाली इतिहास से भी परिचित हो सकेंगी।

परियोजना के तहत यहां कई आकर्षक और उपयोगी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। इसमें बैंक्वेट हॉल, हाट-बाजार, क्राफ्ट शॉप्स और वेंडिंग जोन शामिल होंगे, जहां स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा पर्यटकों की सुविधा के लिए पब्लिक टॉयलेट, पार्किंग, पक्के रास्ते (पाथवे) और सुंदर लैंडस्केपिंग का कार्य भी किया जाएगा।

पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां मेला ग्राउंड, पिकनिक स्पॉट, ग्रीन बेल्ट, बच्चों के लिए प्ले एरिया, स्पोर्ट्स कोर्ट और ऑब्जर्वेशन डेक जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। ये सभी व्यवस्थाएं इस स्थल को एक संपूर्ण पर्यटन केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए यहां भगवान शिव की एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने की भी योजना है। साथ ही बाबा मौनीनाथ मंदिर और यहां की प्राचीन गुफाओं को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत सोलर लाइटिंग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था और आधुनिक सीवरेज सिस्टम विकसित किए जाएंगे। इससे यह परियोजना एक सस्टेनेबल और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन मॉडल के रूप में उभर सकती है।

सरकार का मानना है कि इस इको-टूरिज्म हब के विकसित होने से न केवल मुंगेर में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा होंगे। होटल, रेस्टोरेंट, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय व्यवसायों को इससे सीधा लाभ मिलेगा।

स्थानीय लोगों में इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से उपेक्षित इस क्षेत्र को अब विकास की नई राह मिल रही है। लोगों को उम्मीद है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद असरगंज और आसपास के इलाकों की तस्वीर बदल जाएगी।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस ऐलान से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार सरकार अब पर्यटन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए गंभीर है। आने वाले समय में यह परियोजना न केवल मुंगेर बल्कि पूरे बिहार के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकती है।

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