​मुजफ्फरपुर में हैवानियत: 12 साल की बच्ची से दुष्कर्म, पड़ोस की तीन महिलाएं गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र मुजफ्फरपुर से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने समाज में ‘पड़ोसी’ और ‘विश्वास’ जैसे शब्दों के मायने बदल दिए हैं। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को जिले के मिठनपुरा थाना क्षेत्र में मानवता उस समय शर्मसार हो गई जब एक 12 वर्षीय मासूम बच्ची को उसकी अपनी ही पड़ोसियों ने दरिंदगी के दलदल में धकेल दिया। घर के पास रहने वाली महिलाओं ने न केवल बच्ची का भरोसा तोड़ा, बल्कि उसे बहला-फुसलाकर एक ऐसी जगह ले गईं जहाँ उसकी अस्मत को तार-तार कर दिया गया। इस घटना ने पूरे जिले में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। पुलिस की शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी बड़े और संगठित अपराध गिरोह की ओर इशारा कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस वारदात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सुरक्षित कौन है, जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं?

पड़ोसियों ने ही बुना ‘हैवानियत’ का जाल

​मिठनपुरा थाना क्षेत्र के एक घनी आबादी वाले मोहल्ले में रहने वाला यह पीड़ित परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है। शनिवार को जब बच्ची के माता-पिता रोज की तरह अपने काम पर गए हुए थे, तब घर में अकेली मौजूद 12 साल की मासूम को शिकार बनाने की साजिश रची गई। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाली तीन महिलाओं ने बच्ची के पास जाकर उसे मीठी बातों में फंसाया। ये महिलाएं बच्ची के लिए जानी-पहचानी थीं, इसलिए मासूम बिना किसी हिचकिचाहट के उनके साथ घर से बाहर निकल गई।

​उसे क्या पता था कि जिन ‘चाचियों’ या ‘दीदियों’ पर वह भरोसा कर रही है, वे उसे किसी बड़ी मुसीबत में डालने वाली हैं। जानकारी के अनुसार, इन महिलाओं ने बच्ची को बहला-फुसलाकर एक सुनसान स्थान या किसी गुप्त ठिकाने पर ले जाकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिलवाया। इस घृणित कार्य में महिलाओं की भूमिका ‘सहयोगकर्ता’ और ‘साजिशकर्ता’ के रूप में सामने आई है, जो समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक पहलू है।

माता-पिता के घर लौटते ही खुला राज: उजड़ गई खुशियां

​देर शाम जब बच्ची के माता-पिता काम से वापस लौटे, तो उन्हें घर में सब कुछ सामान्य नहीं लगा। बच्ची गुमसुम थी और उसकी हालत काफी बिगड़ी हुई थी। जब माता-पिता ने कुरेदकर पूछा, तो मासूम ने रोते हुए उन महिलाओं की पूरी करतूत बयां कर दी। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। घर में कोहराम मच गया और मोहल्ले के लोग भी जमा हो गए।

​परिजनों ने बिना देरी किए स्थानीय मिठनपुरा थाने को इसकी सूचना दी। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। शनिवार की रात ही पुलिस ने छापेमारी शुरू की और उन तीनों महिलाओं को धर दबोचा जिन पर बच्ची को घर से ले जाने का सीधा आरोप था। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, जहाँ लोग इन महिलाओं के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई: टाउन डीएसपी ने संभाली कमान

​इस पूरे मामले की कमान टाउन डीएसपी सुरेश कुमार खुद संभाल रहे हैं। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को जैसे ही सूचना मिली, तुरंत एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी गई। पुलिस ने गिरफ्तार महिलाओं से कड़ी पूछताछ की है। डीएसपी ने संकेत दिया है कि यह मामला केवल एक साधारण दुष्कर्म का नहीं हो सकता। पुलिस को शक है कि ये महिलाएं किसी संगठित अवैध गिरोह (Organized Crime Gang) का हिस्सा हो सकती हैं, जो मासूम लड़कियों को बहला-फुसलाकर देह व्यापार या अन्य अनैतिक कार्यों में धकेलते हैं।

​घटनास्थल को पुलिस ने पूरी तरह सील कर दिया है। वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए मुजफ्फरपुर से एफएसएल (FSL) की टीम को मौके पर बुलाया गया है। टीम ने वहां से कई नमूने और फिंगरप्रिंट्स एकत्र किए हैं, ताकि अदालत में दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश किए जा सकें। पुलिस अब इस मामले के मुख्य मास्टरमाइंड और अन्य पुरुष सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है, जो इस वारदात के पीछे असली सूत्रधार हो सकते हैं।

बच्ची की हालत नाजुक: अस्पताल में चल रहा इलाज

​इस जघन्य अपराध ने 12 साल की मासूम को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया है। घटना के बाद से ही बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसे मुजफ्फरपुर के एक प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसकी निगरानी कर रही है। मेडिकल रिपोर्ट में भी शुरुआती तौर पर दरिंदगी की पुष्टि की बात सामने आ रही है, हालांकि विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है।

​बच्ची इस समय गहरे सदमे (Post-traumatic stress) में है और कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने मांग की है कि बच्ची को बेहतर काउंसलिंग और सुरक्षा प्रदान की जाए। अस्पताल परिसर के बाहर भी भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार केवल एक ही बात कह रहे हैं— “हमें न्याय चाहिए।”

संगठित गिरोह का डर: क्या मुजफ्फरपुर में कोई बड़ा रैकेट है सक्रिय?

​इस मामले ने मुजफ्फरपुर पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। तीन महिलाओं का एक साथ मिलकर एक बच्ची को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। पुलिस सूत्रों की मानें तो गिरफ्तार महिलाओं का पूर्व का इतिहास भी खंगाला जा रहा है। क्या ये महिलाएं पहले भी ऐसी वारदातों में शामिल रही हैं? क्या इलाके की अन्य लड़कियां भी इनके निशाने पर थीं?

​डीएसपी सुरेश कुमार ने कहा कि पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है। अगर यह किसी रैकेट का हिस्सा है, तो इसके जड़ तक पहुँचना अनिवार्य है। मुजफ्फरपुर जैसे शहर में जहाँ ‘लोकल कनेक्टिविटी’ बहुत ज्यादा है, वहां पड़ोसियों का ऐसा आचरण डराने वाला है। इस घटना के बाद से मोहल्ले के अन्य अभिभावक भी डरे हुए हैं और अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतरा रहे हैं।

सामाजिक आक्रोश और सुरक्षा के सवाल

​मिठनपुरा की इस घटना ने मुजफ्फरपुर के सामाजिक ताने-बाने पर सवालिया निशान लगा दिया है। शनिवार को कई स्थानीय संगठनों ने कैंडल मार्च निकालने और आरोपियों को स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन बन जाएं, तो समाज का पतन निश्चित है।

​मुजफ्फरपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे कानून को अपने हाथ में न लें और जांच में सहयोग करें। पुलिस प्रशासन ने मोहल्ले में गश्त बढ़ा दी है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने का वादा किया है। हालांकि, जनता का मानना है कि केवल गश्त बढ़ा देने से समाधान नहीं होगा, बल्कि ऐसे ‘सफेदपोश’ अपराधियों की पहचान करना जरूरी है जो समाज के बीच रहकर अपराध का जाल बुनते हैं।

न्याय की लंबी लड़ाई और व्यवस्था की जिम्मेदारी

​मुजफ्फरपुर की यह घटना बिहार के ‘सुशासन’ और ‘महिला सुरक्षा’ के दावों पर एक करारा तमाचा है। 12 साल की उस मासूम का क्या दोष था, जिसने केवल अपनी पड़ोसियों पर विश्वास किया? इस मामले में पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए। गिरफ्तार तीन महिलाओं की भूमिका यह स्पष्ट करती है कि अपराध अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका स्वरूप अधिक जटिल और घातक होता जा रहा है।

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