पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से राहत, पासपोर्ट विवाद में मिली अग्रिम जमानत

नई दिल्ली/हैदराबाद, 10 अप्रैल 2026: कांग्रेस नेता को बड़ी कानूनी राहत मिली है। ने उन्हें एक सप्ताह की अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान की है। यह आदेश उस मामले में आया है, जिसमें असम में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और गिरफ्तारी की आशंका जताई जा रही थी।

क्या है पूरा मामला

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर कथित रूप से एक से अधिक पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया और रिनिकी भुइयां सरमा की ओर से असम में खेड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

एफआईआर के बाद ने उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए। संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की।

कोर्ट की सुनवाई और फैसला

गुरुवार को इस मामले पर विस्तृत सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए खेड़ा को एक सप्ताह की अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी।

इस अवधि के दौरान उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण मिलेगा और वे आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए तैयारी कर सकेंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत उन्हें नियमित जमानत के लिए संबंधित अदालत में आवेदन करने का समय देगी।

राजनीतिक माहौल गरमाया

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर दिया है। कांग्रेस इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रही है, जबकि भाजपा इसे व्यक्तिगत आरोप और मानहानि का मामला बता रही है।

चुनावी संदर्भ में बढ़ी सियासत

यह विवाद ऐसे समय सामने आया जब असम में चुनावी माहौल चरम पर था। आरोपों और एफआईआर के बाद मामला चुनावी चर्चा का हिस्सा बन गया। दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर असम पुलिस की टीम भी पहुंची थी, हालांकि वे वहां नहीं मिले।

अब जबकि कोर्ट से उन्हें अंतरिम राहत मिल गई है, यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक सियासी बहस और आरोप-प्रत्यारोप को जन्म दे सकता है।

आगे क्या

पवन खेड़ा को मिली यह अंतरिम राहत अस्थायी है। उन्हें तय समय सीमा के भीतर नियमित जमानत के लिए निचली अदालत या संबंधित न्यायालय का रुख करना होगा। वहीं, असम में दर्ज केस की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

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