राजस्व अधिकारियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, काम पर नहीं लौटे तो होगी कार्रवाई: विजय सिन्हा

पटना, 10 अप्रैल 2026 — बिहार में अंचल और राजस्व अधिकारियों की जारी हड़ताल को लेकर सरकार अब सख्त रुख में नजर आ रही है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि हड़ताली अधिकारी तय समय सीमा तक काम पर नहीं लौटते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नौकरी ब्रेक और पदोन्नति पर असर जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

सरकार की ओर से बताया गया है कि हड़ताली अधिकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए अब तक छह दौर की वार्ता हो चुकी है। मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग के प्रधान सचिव के साथ मिलकर अधिकारियों से देर रात तक बैठकर चर्चा की गई, ताकि उनकी मांगों को समझा जा सके।

विजय सिन्हा ने कहा कि अंचल और राजस्व अधिकारी विभाग के अभिन्न अंग हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि केवल वही मांगें मानी जा सकती हैं जो नीतिगत और प्रशासनिक रूप से संभव हों। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का दबाव बनाकर निर्णय करवाने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है और सभी फैसले नियमों के तहत ही लिए जाएंगे।

उन्होंने हड़ताल को लेकर कुछ अधिकारियों पर “दबाव की राजनीति” करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे समाधान नहीं निकल सकता। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता के हित सर्वोपरि हैं और उनके काम में किसी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने राजनीतिक संदर्भ में भी स्पष्ट किया कि राज्य में सरकार पहले भी की थी, वर्तमान में भी है और आगे भी रहेगी।

सरकार ने यह भी बताया कि हड़ताल के बावजूद राजस्व विभाग के 589 अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं, जिनके कारण आम जनता के कार्य प्रभावित नहीं हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार अब तक दाखिल-खारिज के 23,449 मामलों, परिमार्जन के 96,469 मामलों और ई-मापी के 14,220 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है।

उपमुख्यमंत्री ने हड़ताली अधिकारियों से अपील की कि वे संवाद की प्रक्रिया में सकारात्मक रूप से शामिल हों और जल्द से जल्द काम पर लौटें, ताकि जनता से जुड़े जरूरी कार्य बाधित न हों। उन्होंने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि शुक्रवार शाम तक काम पर लौटने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और उनकी पदोन्नति की संभावनाएं बनी रहेंगी। लेकिन जो अधिकारी तय समय सीमा के बाद भी नहीं लौटेंगे, उनके लिए सरकार सख्त कदम उठाएगी।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो सरकार नई नियुक्तियों के माध्यम से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी शुरू कर सकती है, ताकि आम लोगों के कार्य प्रभावित न हों।

कुल मिलाकर, सरकार का यह रुख साफ संकेत देता है कि प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए वह किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है और जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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