सुपौल में बड़ा घोटाला: मृत शिक्षक के नाम पर निकाले गए पैसे, फर्जी हस्ताक्षरों से करोड़ों की हेराफेरी का आरोप

सुपौल, 9 अप्रैल 2026 — बिहार के सुपौल जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक मदरसा में फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए रिटायर और मृत शिक्षकों के नाम पर एरियर की भारी रकम निकालने का आरोप लगा है। मामले में करीब एक करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।

मृत शिक्षक के नाम पर भी निकासी

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन शिक्षकों के नाम पर एरियर की राशि निकाली गई, उनमें से एक की करीब 7 साल पहले ही मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद उसके नाम से खाते का संचालन और पैसे की निकासी होना गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है।

मदरसा में फर्जीवाड़े का आरोप

यह पूरा मामला सुपौल के छातापुर प्रखंड स्थित लक्ष्मीनियां पंचायत के एक मदरसा से जुड़ा है। आरोप है कि मदरसा के सचिव और हेडमास्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर एरियर भुगतान के नाम पर बड़ी रकम निकाली गई। इस घोटाले में मदरसा के एक पूर्व प्रधानाध्यापक पर मुख्य रूप से आरोप लगाए गए हैं।

कैसे खुला मामला?

इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब वर्तमान और पूर्व प्रबंधन के बीच विवाद सामने आया। मामला बढ़ते-बढ़ते प्रशासन तक पहुंचा और शिकायत जनसुनवाई में दर्ज कराई गई। इसके बाद अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और दस्तावेजों की जांच शुरू की गई।

हर खाते से लाखों की निकासी

शिकायत के अनुसार, एरियर के नाम पर प्रत्येक शिक्षक के खाते से 15 से 20 लाख रुपये तक निकाले गए। इस आधार पर कुल घोटाले की राशि 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक होने की आशंका जताई जा रही है।

मिड-डे मील योजना पर भी सवाल

मामले में यह भी आरोप लगा है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा मध्याह्न भोजन योजना में भी अनियमितताएं की गई हैं। इससे पूरे संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जांच तेज, कार्रवाई के संकेत

प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पुराने दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का मिलान किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बड़ा सवाल: सिस्टम में इतनी बड़ी चूक कैसे?

यह मामला सिर्फ एक घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी निगरानी और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है। आखिर कैसे वर्षों पहले मृत व्यक्ति के नाम पर बैंक लेन-देन संभव हुआ?

फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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