
राजधानी पटना में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से मनमाने तरीके से शुल्क वसूली के मामलों पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि एडमिशन के बाद हर साल री-एडमिशन (पुनर्नामांकन) के नाम पर पैसे लेना पूरी तरह गलत है।

उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी और सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
7% से अधिक नहीं बढ़ेगी फीस
जिलाधिकारी कार्यालय के आदेश के अनुसार:
- कोई भी निजी स्कूल पिछले शैक्षणिक वर्ष की तुलना में अधिकतम 7% तक ही फीस बढ़ा सकता है
- इससे अधिक वृद्धि के लिए शुल्क विनियमन समिति से मंजूरी जरूरी होगी
- सभी स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर शुल्क का पूरा विवरण सार्वजनिक करना होगा
किताबों और यूनिफॉर्म की जबरन खरीद पर रोक
निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या कॉपियां खरीदने के लिए मजबूर करने की शिकायतों पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है।
- अभिभावक अब अपनी पसंद की दुकान से सामान खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे
- किसी विशेष दुकान से खरीद के लिए दबाव डालने वाले स्कूलों पर प्रशासनिक कार्रवाई होगी
- स्कूलों को किताबों और यूनिफॉर्म की सूची नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करनी होगी
जांच के लिए टीम गठित, भारी जुर्माने का प्रावधान
नियमों के पालन की निगरानी के लिए विशेष निरीक्षण टीमों का गठन किया गया है, जो स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगी।
धारा 7 के तहत उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर:
- पहला अपराध: ₹1,00,000 का जुर्माना
- दोहराने पर: ₹2,00,000 का जुर्माना
शिकायत निवारण के लिए समिति सक्रिय
अभिभावकों की शिकायतों के समाधान के लिए शुल्क विनियमन समिति का गठन किया गया है:
- समिति के अध्यक्ष प्रमंडलीय आयुक्त होंगे
- शुल्क से जुड़ी शिकायत 30 दिनों के भीतर दर्ज कराई जा सकती है
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


