अररिया में खूनी तांडव: पहले पिकअप ड्राइवर का सिर कलम किया, फिर आक्रोशित भीड़ ने कातिल को पीट-पीटकर मार डाला; फारबिसगंज में डबल मर्डर से दहला बिहार

  • अररिया जिले के फारबिसगंज में गुरुवार की सुबह मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई, जिसने कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ झकझोर कर रख दिया है।

  • कृषि उत्पादन बाजार समिति के गेट संख्या दो के पास ठेला लगाने के मामूली विवाद ने ऐसा हिंसक मोड़ लिया कि एक सत्तू विक्रेता ने पिकअप ड्राइवर का सिर धड़ से अलग कर दिया और उसे हाथ में लेकर घूमने लगा।

  • इस वीभत्स दृश्य को देख उत्तेजित हुई भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में ही आरोपी को कस्टडी से छीन लिया और पीट-पीटकर उसकी जान ले ली, जिससे मौके पर ही ‘डबल मर्डर’ की स्थिति बन गई।

  • घटना के बाद फारबिसगंज में भारी तनाव व्याप्त है; आक्रोशित लोगों ने पुलिस की सुस्ती और अवैध स्टैंडों के खिलाफ सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया।

  • प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पिकअप ड्राइवर की हत्या के साथ-साथ आरोपी की मॉब लिंचिंग करने वालों को भी चिह्नित कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


अररिया (द वॉयस ऑफ बिहार)।

बर्बरता की पराकाष्ठा: जब मामूली विवाद बना दो परिवारों की तबाही का कारण

अररिया जिले का फारबिसगंज गुरुवार की सुबह एक ऐसी भयावह त्रासदी का गवाह बना, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है। कृषि उत्पादन बाजार समिति (विघटित) के गेट संख्या दो के पास हर दिन की तरह चहल-पहल थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि एक ठेला लगाने जैसी छोटी सी बात पर वहां खून की नदियां बह जाएंगी। यह घटना केवल दो व्यक्तियों के बीच के झगड़े की परिणति नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में बढ़ते अनियंत्रित आक्रोश और धैर्य की कमी का एक डरावना उदाहरण है। जहाँ एक ओर एक व्यक्ति ने मध्ययुगीन बर्बरता दिखाते हुए दूसरे का सिर काट डाला, वहीं दूसरी ओर भीड़ ने कानून को अपने हाथ में लेकर ‘ऑन द स्पॉट’ इंसाफ के नाम पर एक और हत्या कर दी। फारबिसगंज की सड़कों पर आज केवल सन्नाटा नहीं, बल्कि एक गहरा खौफ और प्रशासनिक विफलता का अहसास पसरा हुआ है।

विवाद की जड़: ठेला हटाने के सवाल पर उपजा खूनी जुनून

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब जोगबनी नगर परिषद क्षेत्र के अमौना निवासी नबी हुसैन अपनी पिकअप गाड़ी में सब्जी लेकर बाजार समिति पहुँचे थे। गेट संख्या दो के पास राहुल चौहान नामक युवक प्रतिदिन अपना ठेला लगाता था, जहाँ वह सत्तू और अनानास बेचता था। पिकअप गाड़ी खड़ी करने और वहां से ठेला हटाने या साइड करने को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में यह एक सामान्य बहस थी जो अक्सर बाजारों में देखी जाती है। लेकिन राहुल चौहान के भीतर न जाने कैसा जुनून सवार हुआ कि उसने अचानक अपने पास रखे सत्तू काटने वाले तेज धारदार चाकू से नबी हुसैन के पेट में वार कर दिया। जब नबी हुसैन नीचे गिरे, तो राहुल ने रुकने के बजाय क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उनका सिर काटकर धड़ से अलग कर दिया।

दहशत का वह मंजर: हाथ में सिर लेकर घूमता रहा कातिल

बाजार समिति के पास मौजूद लोग तब सन्न रह गए जब उन्होंने राहुल चौहान को हाथ में कटा हुआ सिर लेकर घूमते देखा। यह दृश्य इतना खौफनाक था कि आसपास के दुकानदार और राहगीर अपनी जान बचाकर भागने लगे। वारदात को अंजाम देने के बाद राहुल ने भागने की कोशिश नहीं की, बल्कि वह बाजार समिति परिसर में बन रहे नए गोदामों के पास झाड़ियों में जाकर छिप गया। इस बीच सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने जब झाड़ियों की घेराबंदी कर राहुल को बाहर निकाला, तो वहां मौजूद भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

भीड़ का ‘इंसाफ’: पुलिस कस्टडी से छीनकर की गई मॉब लिंचिंग

पुलिस ने राहुल चौहान को हिरासत में लेकर उसे सुरक्षित सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों को घेर लिया। पुलिस बल की संख्या भीड़ के मुकाबले काफी कम थी। देखते ही देखते सैकड़ों लोगों ने पुलिस कस्टडी से राहुल को खींच लिया और उस पर लात-घूंसों और डंडों की बरसात कर दी। पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आक्रोशित लोग राहुल को तब तक पीटते रहे जब तक कि उसकी सांसें नहीं थम गईं। पुलिस की आंखों के सामने ही आरोपी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। गुरुवार की सुबह हुए इस ‘डबल मर्डर’ ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। एक हत्या के बदले दूसरी हत्या ने न्याय की अवधारणा को ही भीड़ के पैरों तले रौंद दिया।

प्रशासनिक मुस्तैदी और अधिकारियों का दौरा

हालात बिगड़ते देख फारबिसगंज एसडीएम अभय कुमार तिवारी, एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा और थानाध्यक्ष मनोज कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती है—पहली नबी हुसैन की हत्या की जांच और दूसरी राहुल चौहान की मॉब लिंचिंग करने वाले आरोपियों की पहचान। एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा ने सख्त लहजे में कहा है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। पुलिस वीडियो फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर उन लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने पुलिस कस्टडी से आरोपी को छीनकर उसकी हत्या की।

पुलिस के खिलाफ जनता का फूटा गुस्सा: सड़कें जाम, प्रदर्शन तेज

इस दोहरे हत्याकांड के बाद स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के काफी देर बाद पुलिस मौके पर पहुँची, जिसके कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई। आक्रोशित लोगों ने कृषि उत्पादन बाजार समिति के मुख्य द्वार, सुभाष चौक और अन्य प्रमुख जगहों पर सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शहर में अवैध ऑटो स्टैंड और अतिक्रमण की वजह से आए दिन विवाद होते हैं, लेकिन प्रशासन मौन रहता है। एसडीएम और एसडीपीओ घंटों तक लोगों को समझाने और जाम खुलवाने का प्रयास करते रहे। लोगों की मांग है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।

रिश्तों और समाज पर एक गंभीर टिप्पणी

अमौना के नबी हुसैन और चौहान टोला के राहुल चौहान—दोनों ही अपने परिवारों के लिए रोजी-रोटी कमाने वाले सदस्य थे। एक मामूली बहस ने दो हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया। नबी हुसैन जो अपनी पिकअप से सब्जियां लेकर आए थे, उनकी क्या गलती थी? और राहुल चौहान, जिसने क्षणिक आवेश में आकर एक जघन्य अपराध किया, क्या उसे कानून के हवाले करना भीड़ की जिम्मेदारी नहीं थी? मॉब लिंचिंग की यह घटना दर्शाती है कि समाज का कानून पर से विश्वास उठता जा रहा है। जब भीड़ खुद ही न्यायाधीश और जल्लाद बन जाए, तो वह समाज ‘जंगलराज’ की ओर अग्रसर हो जाता है।

न्याय की आस में सुलगता फारबिसगंज

फारबिसगंज का यह दोहरा हत्याकांड अररिया के इतिहास में एक काला अध्याय बन गया है। जहाँ नबी हुसैन के घर में मातम है, वहीं राहुल चौहान के घर वाले भी दोहरी मार झेल रहे हैं। पुलिस अब दोनों मामलों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। एसडीएम अभय कुमार तिवारी ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन इलाके में तनाव बरकरार है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं? क्या एक चाकू और एक लाठी किसी भी विवाद का अंतिम समाधान है? अररिया पुलिस के लिए अब यह साख की लड़ाई है कि वे हत्यारे के हत्यारों को कितनी जल्दी पकड़ते हैं।

  • ये भी पढ़े..

    OBC छात्राओं के लिए IIT पटना से कोचिंग सहयोग, मेडिकल-इंजीनियरिंग तैयारी को मिलेगा नया बल

    Share Add as a preferred…

    बिहार संग्रहालय बना देश का रोल मॉडल, 9 राज्यों के संग्रहालय विकास में निभा रहा अहम योगदान

    Share Add as a preferred…