
- भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़ी खंजरपुर के एक युवक की गंगा नदी में डूबने से असामयिक मृत्यु हो गई, जिससे पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई है।
- मृतक की पहचान ओम कुमार के रूप में हुई है, जो बुधवार दोपहर अपनी भैंस को चराकर नदी के उस पार से लौट रहा था, तभी यह हृदयविदारक घटना घटी।
- प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ओम अक्सर नाव का सहारा लेता था, लेकिन बुधवार को उसने भैंस की पूंछ पकड़कर तैरते हुए नदी पार करने का जोखिम उठाया, जो उसके लिए जानलेवा साबित हुआ।
- घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय गोताखोरों और बाद में एसडीआरएफ (SDRF) की टीम ने व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद शव को मुसहरी और खिरनी घाट के बीच से निकाला गया।
- गंगा के दियारा क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले किसानों और युवाओं के लिए यह घटना एक बड़ी चेतावनी है, जहाँ जलस्तर और लहरों के वेग का अंदाजा न होना अक्सर मौत का कारण बनता है।
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।गंगा की गोद में पसरा मातम: एक छोटी सी भूल और खत्म हो गया जीवन का सफर
प्रकृति अपनी शीतलता से जितना जीवन देती है, उसकी लहरें कभी-कभी उतनी ही निष्ठुर भी हो जाती हैं। भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र के बड़ी खंजरपुर इलाके में बुधवार की दोपहर एक ऐसी ही त्रासदी ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। गंगा नदी, जिसे यहाँ के लोग अपनी जीवनरेखा मानते हैं, वही ओम कुमार नामक युवक के लिए काल बन गई। 9 अप्रैल 2026 की यह दोपहर बड़ी खंजरपुर के निवासियों के लिए कभी न भूलने वाला जख्म दे गई। नदी के किनारे अक्सर होने वाली चहल-पहल उस वक्त चीख-पुकार में बदल गई जब लोगों ने एक युवक को लहरों के साथ संघर्ष करते और फिर ओझल होते देखा। यह हादसा उस वक्त हुआ जब ओम अपनी दिनचर्या के तहत पशुओं को चराकर घर लौट रहा था।
दियारा की दिनचर्या और पशुपालन का जोखिम भरा संघर्ष
भागलपुर के गंगा तटीय इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए ‘दियारा’ (नदी के बीच के टापू) केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। बड़ी खंजरपुर के रहने वाले ओम कुमार का परिवार भी पशुपालन से जुड़ा था। यहाँ की परंपरा रही है कि पशुपालक अपनी भैंसों और गायों को चराने के लिए नदी के उस पार ले जाते हैं, जहाँ प्रचुर मात्रा में हरी घास उपलब्ध होती है। ओम भी हर दिन की तरह अपनी भैंसों को लेकर उस पार गया था। आमतौर पर पशुपालक स्वयं नाव पर सवार होकर नदी पार करते हैं और उनके पशु पानी में तैरते हुए पीछे-पीछे चलते हैं। ओम भी अब तक इसी सुरक्षित पद्धति का पालन करता आ रहा था, लेकिन बुधवार को नियति को कुछ और ही मंजूर था।
वह मनहूस दोपहर: जब साहस और दुस्साहस के बीच की लकीर मिट गई
बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे का वक्त था। सूरज की तपिश के बीच ओम उस पार से लौटने की तैयारी कर रहा था। न जाने उसके मन में क्या आया कि उसने नाव का इंतजार करने या उस पर सवार होने के बजाय अपनी एक भैंस की पूंछ पकड़कर तैरते हुए मुख्य धारा को पार करने का निर्णय लिया। ग्रामीण इलाकों में इसे अक्सर एक कला या मनोरंजन के तौर पर देखा जाता है, लेकिन गंगा की गहराई और उसके नीचे चलने वाले भंवरों का अंदाजा लगाना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं है। जैसे ही भैंस बीच धारा में पहुँची, पानी का दबाव और लहरों का वेग बढ़ गया। चश्मदीदों का कहना है कि इसी दौरान ओम की पकड़ ढीली हो गई या शायद वह पानी के किसी शक्तिशाली भंवर (Whirlpool) की चपेट में आ गया। कुछ ही पलों में वह गहरे पानी में समा गया।
बचाव की नाकाम कोशिशें और प्रत्यक्षदर्शियों का खौफ
किनारे पर मौजूद अन्य पशुपालकों और स्थानीय लोगों ने जब ओम को डूबते देखा, तो वहां अफरा-तफरी मच गई। कुछ स्थानीय गोताखोरों ने तुरंत पानी में छलांग लगाई और उसे तलाशने की कोशिश की, लेकिन गंगा की इस धारा में गहराई इतनी अधिक थी कि ओम का कहीं पता नहीं चला। शोर सुनकर खंजरपुर घाट पर भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों को जब इसकी सूचना मिली, तो घर में कोहराम मच गया। आनन-फानन में स्थानीय पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को सूचित किया गया। सभी की नजरें गंगा की उन लहरों पर टिकी थीं, जो कुछ ही देर पहले तक शांत दिख रही थीं लेकिन अब एक मासूम की जान ले चुकी थीं।
एसडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन और शव की बरामदगी
सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद एसडीआरएफ (State Disaster Response Force) की टीम अपनी मोटर बोट और आधुनिक उपकरणों के साथ मौके पर पहुँची। विशेषज्ञ गोताखोरों ने उस स्थान को चिह्नित किया जहाँ ओम आखिरी बार देखा गया था। मुसहरी घाट से लेकर खिरनी घाट तक के बड़े दायरे में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, गोताखोरों को मुसहरी और खिरनी घाट के बीच पानी के नीचे से ओम का निष्प्राण शरीर मिला। जैसे ही शव को किनारे लाया गया, वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। ओम के पिता और अन्य सगे-संबंधियों का विलाप देखकर हर किसी का कलेजा कांप उठा।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बढ़ते जल-हादसे
भागलपुर में गंगा नदी के किनारे बसे गांवों में डूबने की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन ओम कुमार के साथ हुआ यह हादसा सुरक्षा के प्रति हमारी लापरवाही को उजागर करता है। पशुओं के सहारे नदी पार करना एक अत्यंत जोखिम भरा काम है। भैंस या अन्य जानवर अपनी क्षमता के अनुसार तैरते हैं, लेकिन मनुष्य की पकड़ और सहनशक्ति पानी के भारी दबाव के सामने जवाब दे देती है। विशेष रूप से जब नदी की मुख्य धारा में पानी का बहाव तेज हो, तो ऐसी कोशिशें आत्मघाती साबित होती हैं। जिला प्रशासन और आपदा विभाग अक्सर लोगों को चेताता रहता है कि वे गहरे पानी में न जाएं और नावों का ही प्रयोग करें, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और ‘अति-आत्मविश्वास’ ऐसे हादसों का कारण बनता है।
परिजनों का दुख और मोहल्ले में छाया सन्नाटा
ओम कुमार अपने परिवार का सहारा था और उसकी इस तरह अचानक हुई मौत ने परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। बड़ी खंजरपुर के निवासियों ने बताया कि ओम एक मेहनती और व्यवहारकुशल युवक था। वह अपने काम के प्रति समर्पित था और अक्सर पशुओं की देखभाल में ही अपना समय बिताता था। बुधवार को भी वह अपने कर्तव्य के निर्वहन में ही घर से निकला था, लेकिन किसे पता था कि यह उसका आखिरी सफर होगा। देर शाम पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद जब शव घर पहुँचा, तो पूरे मोहल्ले में चूल्हे नहीं जले। हर कोई इसी बात की चर्चा कर रहा था कि काश उसने पूंछ पकड़ने की वह जोखिम भरी कोशिश न की होती।
निष्कर्ष: जल-सुरक्षा पर सोचने की जरूरत
ओम की मौत केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों पशुपालकों के लिए एक सबक है जो हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर गंगा पार करते हैं। भागलपुर प्रशासन को चाहिए कि दियारा क्षेत्रों में जाने वाले पशुपालकों के लिए लाइफ जैकेट की उपलब्धता या नावों के परिचालन को और अधिक सुव्यवस्थित करे। साथ ही, युवाओं को यह समझाना अनिवार्य है कि नदी के साथ खिलवाड़ करना भारी पड़ सकता है। गंगा की लहरें भले ही देखने में शांत लगें, लेकिन उनके भीतर छिपे खतरे कभी भी किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं। ओम का जाना बड़ी खंजरपुर के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी।


