
- बिहार सरकार के खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत राज्य के प्रतिभावान किशोर खिलाड़ियों को वैश्विक मंच के लिए तैयार करने का एक बड़ा अभियान शुरू किया है।
- भागलपुर में 6 और 9 अप्रैल 2026 को आयोजित होने वाले इन चयन ट्रायल्स के माध्यम से तीरंदाजी, बास्केटबॉल, बैडमिंटन और वॉलीबॉल विधाओं के लिए नई प्रतिभाओं की खोज की जा रही है।
- चयनित खिलाड़ियों को न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि उनके रहने, खाने, शिक्षा और स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी भी राज्य सरकार वहन करेगी।
- विशेष रूप से 12 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है, जहाँ वे अपने खेल कौशल को तराशकर राज्य और देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।
- जिला प्रशासन और खेल पदाधिकारी ने सभी विद्यालयों के प्रधानों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक बच्चों को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करें, ताकि ग्रामीण अंचलों की प्रतिभाएं दबकर न रह जाएं।
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।
सपनों की नई पिच: जब पसीने की बूंदों से लिखा जाएगा सफलता का इतिहास
बिहार की माटी में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही, लेकिन सही समय पर सही मंच न मिल पाने के कारण कई बार प्रतिभावान खिलाड़ी पीछे छूट जाते हैं। इसी खाई को पाटने के लिए खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने ‘एकलव्य राज्य आवासीय खेल प्रशिक्षण केंद्रों’ की परिकल्पना की है। भागलपुर में इन केंद्रों के लिए खिलाड़ियों का चयन करने हेतु 6 और 9 अप्रैल 2026 की तारीखें तय की गई हैं। यह आयोजन केवल एक ट्रायल नहीं है, बल्कि उन हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की एक किरण है जो संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा को निखारने में असमर्थ थे। मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत संचालित ये केंद्र खिलाड़ियों को एक ऐसा वातावरण प्रदान करते हैं जहाँ उनकी पूरी एकाग्रता केवल खेल और अपनी शिक्षा पर बनी रहे। भागलपुर के सैंडीस कंपाउंड और शाहू उच्च विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित मैदान इन भविष्य के नायकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
चयन प्रक्रिया का विस्तृत खाका: मैदान और विधाओं का निर्धारण
चयन ट्रायल्स की योजना अत्यंत व्यवस्थित तरीके से बनाई गई है ताकि हर विधा के लिए विशेषज्ञों की निगरानी में पारदर्शी तरीके से चुनाव हो सके। 6 अप्रैल 2026 को तीन प्रमुख विधाओं—तीरंदाजी, बास्केटबॉल और बैडमिंटन के लिए ट्रायल आयोजित किए गए। तीरंदाजी के लिए शाहू उच्च विद्यालय, शाहू परबत्ता का चयन किया गया, जहाँ सुबह 8 बजे से ही खिलाड़ियों का तांता लगा रहा। बास्केटबॉल (केवल बालक वर्ग) और बैडमिंटन के लिए सैंडीस कंपाउंड के बास्केटबॉल मैदान और इनडोर हॉल को केंद्र बनाया गया है। वहीं, वॉलीबॉल विधा के लिए 9 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की गई है, जिसका आयोजन सैंडीस कंपाउंड के वॉलीबॉल मैदान में होना है। चयनकर्ताओं की टीम में अनुभवी प्रशिक्षकों को शामिल किया गया है, जिनमें चंदन कुमार, शिवम भगत, विनेश हेंब्रम, शशि प्रताप सिंह, कुंदन कुमार, निशांत कुमार, चंद्रभानु कुमार, कुमार हीरा, शुभम कुमार और आलोक कुमार पाण्डेय जैसे नाम शामिल हैं। ये विशेषज्ञ न केवल खिलाड़ियों के वर्तमान प्रदर्शन को देख रहे हैं, बल्कि उनकी शारीरिक बनावट और भविष्य की संभावनाओं (Potential) का भी आकलन कर रहे हैं।
एकलव्य केंद्रों की विशिष्टताएं: एक खिलाड़ी को क्या मिलता है?
एकलव्य केंद्रों में चयन होने का अर्थ है खिलाड़ी के उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत। यहाँ चयनित बच्चों को जो सुविधाएं मिलती हैं, वे किसी भी आधुनिक खेल अकादमी के बराबर हैं। सबसे महत्वपूर्ण है ‘नि:शुल्क आवासीय प्रशिक्षण’, जहाँ खिलाड़ियों के रहने और सोने के लिए उच्च स्तरीय छात्रावास उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रशिक्षण के लिए विशेषज्ञ कोचों की नियुक्ति की जाती है जो वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग कर खिलाड़ियों की तकनीक में सुधार लाते हैं। इसके साथ ही, खिलाड़ियों को खेल सामग्री, किट और सबसे जरूरी ‘पौष्टिक आहार’ प्रदान किया जाता है। खेल की दुनिया में पोषण का महत्व सर्वोपरि है, और सरकार यह सुनिश्चित करती है कि खिलाड़ियों को उनकी मेहनत के अनुसार कैलोरी और प्रोटीन युक्त भोजन मिले। इसके अतिरिक्त, खिलाड़ियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शैक्षणिक सुविधाएं भी दी जाती हैं। हर महीने मिलने वाली छात्रवृत्ति खिलाड़ियों को आर्थिक संबल प्रदान करती है, जबकि चिकित्सा सुविधा और बीमा उन्हें चोट या बीमारी के समय सुरक्षा कवच देते हैं।
पात्रता और नियमों का अनुशासन: आयु सीमा और दस्तावेजी औपचारिकताएं
इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य जमीनी स्तर (Grassroot level) पर प्रतिभाओं को पकड़ना है, इसलिए आयु सीमा 12 से 14 वर्ष के बीच रखी गई है। खिलाड़ियों का जन्म 1 जनवरी 2012 से 1 जनवरी 2014 के बीच होना अनिवार्य है। हालांकि, उन खिलाड़ियों के लिए नियम थोड़े लचीले रखे गए हैं जिन्होंने पहले ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले या उनमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों को आयु सीमा में 2 वर्ष की विशेष छूट प्रदान की गई है। दस्तावेजी प्रक्रिया को भी पारदर्शी रखा गया है, जिसमें जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट फोटो, खेल प्रमाण पत्र और विद्यालय प्रमाण पत्र जैसे मूल दस्तावेज अनिवार्य हैं। यह कड़ाई इसलिए बरती जाती है ताकि केवल योग्य और सही आयु वर्ग के बच्चे ही इस योजना का लाभ उठा सकें और कोई अपात्र व्यक्ति इस व्यवस्था में सेंध न लगा सके।
प्रशासनिक सक्रियता: विद्यालयों की भूमिका पर विशेष बल
जिला खेल पदाधिकारी भागलपुर, जयनारायण कुमार ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रशासनिक समन्वय स्थापित किया है। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान) को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि सभी विद्यालय प्रधानों को इस संबंध में जागरूक किया जाए। विद्यालय वह पहली जगह है जहाँ किसी बच्चे के भीतर छिपी खेल प्रतिभा की पहचान पीटी शिक्षक या हेडमास्टर द्वारा की जाती है। यदि विद्यालय स्तर पर बच्चों को प्रोत्साहित कर इन ट्रायल्स में भेजा जाता है, तो भागलपुर के ग्रामीण इलाकों से भी बड़े खिलाड़ी निकल सकते हैं। शिक्षा विभाग की सक्रियता से यह सुनिश्चित होगा कि यह सूचना हर प्राथमिक और मध्य विद्यालय के नोटिस बोर्ड तक पहुँचे और कोई भी योग्य खिलाड़ी सूचना के अभाव में इस अवसर से वंचित न रहे।
खिलाड़ियों के लिए भविष्य की राह: पदक की ओर बढ़ते कदम
एकलव्य केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों के लिए आगे की राह अत्यंत उज्ज्वल है। इन केंद्रों के माध्यम से खिलाड़ियों को विभिन्न राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का भरपूर अवसर मिलता है। यहाँ से निकले कई खिलाड़ी आज राज्य की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बिहार सरकार का यह प्रयास ‘खेलो इंडिया’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी मजबूती प्रदान करता है। खेलों के प्रति बदलते दृष्टिकोण ने अब इसे करियर के एक गंभीर विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है। आज का युवा जानता है कि यदि वह मैदान पर पसीना बहाता है, तो न केवल उसे सरकारी नौकरियों में खेल कोटे का लाभ मिलता है, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराकर अमर भी हो सकता है।
निष्कर्ष: सुरक्षित और समृद्ध खेल संस्कृति का निर्माण
भागलपुर में आयोजित यह ट्रायल प्रक्रिया बिहार की बदलती खेल संस्कृति का प्रतीक है। जब खेल विभाग और प्रशासन मिलकर खिलाड़ियों के लिए द्वार खोलते हैं, तो समाज में खेलों के प्रति सकारात्मकता बढ़ती है। 12 से 14 साल के ये बच्चे कल के नायक हैं। सैंडीस कंपाउंड की मिट्टी और इनडोर हॉल की कोर्ट आज उनकी प्रतीक्षा कर रही है। जिला खेल पदाधिकारी जयनारायण कुमार के नेतृत्व में भागलपुर का खेल विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि चयन पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो। यदि आप या आपके आसपास कोई योग्य बच्चा है, तो उसे इन ट्रायल्स तक पहुँचाना हम सबकी सामाजिक जिम्मेदारी है। पसीने की हर बूंद, जो आज मैदान पर गिरेगी, कल पदक की चमक बनकर लौटेगी।


