
वॉशिंगटन, 8 अप्रैल 2026: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर के बावजूद दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान ने दबाव में आकर खुद सीजफायर की मांग की थी।
पेंटागन में आयोजित प्रेस वार्ता में हेगसेथ के साथ जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन भी मौजूद रहे। इस दौरान अमेरिका ने अपने सैन्य अभियान को बड़ी सफलता बताते हुए ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने का दावा किया।
“ऑपरेशन ऐतिहासिक सफलता, ईरान कमजोर पड़ा”
पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने बेहद सीमित संसाधनों का उपयोग करते हुए ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा झटका दिया है। उनके मुताबिक, 40 दिनों से भी कम समय में अमेरिकी सैन्य शक्ति के एक छोटे हिस्से से ही ईरान को कमजोर कर दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि ईरान इस हमले का प्रभावी जवाब देने में असफल रहा और अंततः उसे समझौते के लिए आगे आना पड़ा।
मिसाइल और रक्षा प्रणाली पर बड़ा असर—अमेरिका का दावा
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि हमलों के बाद ईरान की रक्षा संरचना बुरी तरह प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, ईरान की वायु रक्षा प्रणाली लगभग खत्म हो चुकी है और उसकी नौसेना को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
हेगसेथ ने यह भी कहा कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुका है और अब वह निकट भविष्य में नई मिसाइलें बनाने में सक्षम नहीं होगा।
“परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा ईरान”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेगसेथ ने यह भी दावा किया कि इस समझौते के बाद ईरान के पास परमाणु हथियार विकसित करने की कोई संभावना नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार ने संभावित भारी नुकसान को देखते हुए समझौता करना ही बेहतर समझा।
जनरल डैन केन बोले—सीजफायर सिर्फ अस्थायी विराम
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी इस मौके पर कहा कि यह सीजफायर स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि केवल एक अस्थायी विराम है।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के हजारों ठिकानों को निशाना बनाया है और उसके रक्षा तंत्र को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। साथ ही चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर सेना फिर से कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकती है हलचल
अमेरिका के इन दावों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है, खासकर तब जब सीजफायर के बावजूद दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।
क्या आगे भी जारी रहेगा तनाव?
हालांकि सीजफायर के जरिए फिलहाल सैन्य टकराव थमा हुआ है, लेकिन जिस तरह से दोनों पक्षों की ओर से बयान सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि यह शांति लंबे समय तक कायम रहेगी या नहीं—यह अभी भी अनिश्चित है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।


