उत्तर कोरिया का नया मिसाइल दुस्साहस: जापान सागर की ओर दागीं कई बैलिस्टिक मिसाइलें, टोक्यो में ‘हाई अलर्ट’

टोक्यो/सियोल। 08 अप्रैल 2026 : पूर्वी एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए बुधवार (8 अप्रैल) की सुबह जापान सागर (East Sea) की ओर एक साथ कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (SRBM) दाग दी हैं। इस घटना के बाद जापान सरकार ने तत्काल ‘हाई अलर्ट’ जारी किया और अपने नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। हालांकि, जापान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर नहीं गिरी है। उत्तर कोरिया की इस उकसावे वाली कार्रवाई को दक्षिण कोरिया और जापान के साथ बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

​सुबह-सुबह ‘वोनसान’ से दगा मिसाइलों का जखीरा

​दक्षिण कोरियाई सैन्य सूत्रों और जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, मिसाइलों का यह परीक्षण उत्तर कोरिया के पूर्वी प्रांत कांगवोन के वोनसान (Wonsan) इलाके से सुबह करीब 8:50 बजे किया गया।

  • मिसाइलों की मारक क्षमता: शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, इन मिसाइलों ने आसमान में करीब 240 किलोमीटर की दूरी तय की और अंततः समुद्र में जा गिरीं।
  • लगातार दूसरा हमला: यह परीक्षण मंगलवार (7 अप्रैल) को प्योंगयांग क्षेत्र से किए गए एक अन्य संदिग्ध मिसाइल परीक्षण के ठीक 24 घंटे बाद हुआ है। बताया जा रहा है कि मंगलवार का परीक्षण असफल रहा था, जिसकी कसर निकालने के लिए बुधवार को यह बड़ी कार्रवाई की गई।

​जापान की प्रतिक्रिया: “शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा”

​जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर कोरिया के इस कदम की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा:

​”उत्तर कोरिया की हालिया कार्रवाइयां हमारे देश, क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं। हमने बीजिंग के माध्यम से उत्तर कोरिया के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है।”

​प्रधानमंत्री कार्यालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर खुफिया जानकारी साझा करें और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें। फिलहाल जापान की ओर से किसी भी जान-माल या समुद्री जहाजों को नुकसान पहुँचने की सूचना नहीं है।

​तनाव की असली वजह: ड्रोन विवाद और ‘दुश्मन देश’ का टैग

​विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के इस ताजा मिसाइल परीक्षण के पीछे हालिया ड्रोन विवाद एक बड़ी वजह है। दरअसल, इस हफ्ते की शुरुआत में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने जनवरी में उत्तर कोरिया के भीतर हुए नागरिक ड्रोन घुसपैठ पर खेद व्यक्त किया था। उत्तर कोरिया ने इसे ‘मूर्खतापूर्ण’ करार देते हुए दक्षिण कोरिया को अपना ‘स्थायी दुश्मन’ बताया है। मिसाइल परीक्षण के जरिए किम जोंग उन प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी भी तरह की शांति वार्ता के बजाय सैन्य शक्ति के रास्ते पर अडिग है।

​2026 का चौथा बड़ा परीक्षण

​वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक उत्तर कोरिया का यह चौथा बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रतिबंधों के बावजूद प्योंगयांग का यह अड़ियल रवैया बताता है कि आने वाले दिनों में कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। अमेरिका ने भी इस परीक्षण की निंदा करते हुए इसे क्षेत्र को अस्थिर करने वाला कदम बताया है।

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