
पाकिस्तान के सियासी गलियारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों तक इस समय केवल एक ही चर्चा है—’कॉपी-पेस्ट’ कूटनीति। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक ऐसा पोस्ट साझा किया, जिसने न केवल उनकी सरकार की किरकिरी कराई है, बल्कि पाकिस्तान की स्वतंत्र विदेश नीति पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यह मामला महज एक टाइपिंग की गलती नहीं, बल्कि एक ऐसी ‘डिजिटल चूक’ है जिसने परदे के पीछे चल रहे बड़े खेल को सार्वजनिक कर दिया है।

आधी रात का वो पोस्ट और ‘ड्रॉफ्ट’ का रहस्य
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब शहबाज शरीफ के आधिकारिक हैंडल से मध्य पूर्व के संकट पर एक लंबा-चौड़ा संदेश पोस्ट किया गया। इस संदेश की पहली ही पंक्ति में बड़े अक्षरों में लिखा था— “Draft – Pakistan’s PM Message on X”। जैसे ही यह पोस्ट सार्वजनिक हुआ, सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखने वाले यूजरों ने इसके स्क्रीनशॉट लेना शुरू कर दिए। हालांकि, कुछ ही मिनटों के भीतर इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया और एक संशोधित संस्करण (बिना ‘ड्रॉफ्ट’ लिखे) दोबारा पोस्ट किया गया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ ने यह साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के सोशल मीडिया मैनेजर ने बिना पढ़े सीधे उस फाइल को कॉपी कर दिया था, जो शायद उन्हें किसी बाहरी एजेंसी या किसी अन्य देश के दूतावास से मिली थी। ‘ड्रॉफ्ट’ शब्द का होना इस बात का प्रमाण था कि यह संदेश शहबाज शरीफ के अपने विचार नहीं थे, बल्कि उन्हें कहीं और से ‘तैयार’ करके दिया गया था ताकि वे इसे दुनिया के सामने पेश कर सकें।

क्या था उस विवादित संदेश में?
इस पोस्ट की सामग्री अत्यंत संवेदनशील थी। इसमें शहबाज शरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मध्य पूर्व में जारी युद्ध को रोकने के लिए अपनी समय सीमा (डेडलाइन) को दो सप्ताह बढ़ाने का आग्रह किया था। साथ ही, उन्होंने ‘ईरानी भाइयों’ से अपील की थी कि वे सद्भावना के तौर पर दो हफ्तों के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को खोल दें। यह संदेश तब आया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक सख्त चेतावनी दे रखी थी और उनकी समय सीमा समाप्त होने के करीब थी।
हैरानी की बात यह है कि इस पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद डोनाल्ड ट्रंप ने वास्तव में युद्धविराम की घोषणा कर दी। इससे यह कयास लगाए जाने लगे कि क्या पाकिस्तान का यह संदेश पहले से तयशुदा पटकथा का हिस्सा था? क्या शहबाज शरीफ केवल उस संदेश के ‘डाकिए’ की भूमिका निभा रहे थे, जिसे वॉशिंगटन या किसी अन्य वैश्विक शक्ति ने तैयार किया था?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और 10-सूत्रीय ईरानी प्रस्ताव
इस ‘ड्रॉफ्ट’ कांड ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर भी ध्यान केंद्रित कर दिया है। ईरान द्वारा इस जलमार्ग की घेराबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने की कगार पर थी। शहबाज शरीफ का यह ‘तैयारशुदा’ संदेश ईरान के उस 10-सूत्रीय प्रस्ताव का समर्थन करता दिख रहा था, जिसे ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ‘काम करने योग्य’ (Workable) माना था।
खबरों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर का नाम भी उछल रहा है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा था ताकि अमेरिका से कुछ आर्थिक लाभ हासिल किए जा सकें। लेकिन ‘ड्रॉफ्ट’ शब्द ने इस पूरी कूटनीतिक बिसात को एक ‘स्क्रिप्टेड ड्रामा’ में तब्दील कर दिया।
विपक्ष का हमला और ‘स्वतंत्रता’ पर सवाल
पाकिस्तान के भीतर इमरान खान की पार्टी पीटीआई (PTI) ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है। विपक्ष का आरोप है कि शहबाज शरीफ सरकार केवल बाहरी इशारों पर नाच रही है। जब किसी देश का प्रधानमंत्री अपना सोशल मीडिया संदेश भी खुद नहीं लिख सकता और उसे बाहर से मिले ‘ड्रॉफ्ट’ को जस का तस पोस्ट करना पड़ता है, तो वह देश वैश्विक मंच पर अपनी बात मजबूती से कैसे रख पाएगा?
सोशल मीडिया पर लोग तंज कस रहे हैं कि पाकिस्तान की विदेश नीति अब ‘कट-कॉपी-पेस्ट’ के भरोसे चल रही है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चूक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की विश्वसनीयता को खत्म कर देती है। यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय में बुनियादी प्रूफरीडिंग तक की व्यवस्था नहीं है।
क्या यह केवल एक स्टाफ की गलती है?
सरकारी बचाव पक्ष का कहना है कि यह एक सामान्य मानवीय त्रुटि (Clerical Error) है। उनके अनुसार, स्टाफ ने गलती से फाइल का शीर्षक भी पेस्ट कर दिया। लेकिन जानकारों का तर्क अलग है। उनका कहना है कि अगर यह पाकिस्तान का अपना रुख होता, तो ‘ड्रॉफ्ट’ शब्द के साथ ‘Pakistan’s PM Message on X’ जैसे निर्देश नहीं लिखे होते। यह निर्देश उन लोगों के लिए था जिन्हें यह संदेश आगे बढ़ाना था।
इस पूरे प्रकरण ने पाकिस्तान के कूटनीतिक तंत्र की पोल खोल दी है। मध्य पूर्व के इतने बड़े संकट पर, जहाँ दुनिया भर की निगाहें टिकी थीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का इस तरह ‘तैयार माल’ पेश करना यह बताता है कि वह केवल एक चेहरा हैं, जबकि फैसले कहीं और लिए जा रहे हैं।


