शिक्षा के मंदिर में ‘अधर्म’: कहलगांव के सेंट जोसेफ स्कूल के प्राचार्य पर प्रताड़ना और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप

प्रशिक्षु आईएएस सह एसडीओ के नेतृत्व में 3 घंटे तक चली हाई-प्रोफाइल जांच; शिक्षिका और उनकी बेटी के साथ ‘अनुचित’ व्यवहार का मामला गरमाया

कहलगांव (भागलपुर)। 08 अप्रैल 2026 : बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित सेंट जोसेफ स्कूल, पकड़तल्ला इन दिनों शिक्षा के कारण नहीं, बल्कि अपने प्राचार्य की ‘करतूतों’ के आरोपों के कारण चर्चा में है। स्कूल के प्राचार्य फादर बोनीफेस मरांडी पर एक महिला योगा शिक्षिका, उनके पति और उनकी पुत्री ने मानसिक प्रताड़ना, अभद्र भाषा का प्रयोग और अनुचित व्यवहार जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। मामला इतना गंभीर हो गया कि प्रशासन को स्कूल परिसर में ही ‘अदालत’ लगानी पड़ी। मंगलवार को प्रशिक्षु आईएएस सह एसडीओ कृष्ण चंद्र गुप्ता के नेतृत्व में एक विशाल जांच टीम ने स्कूल में डेरा डाला और करीब तीन घंटे तक गहन छानबीन की।

​क्या है पूरा मामला: शिक्षिका और मासूम बेटी के साथ बदसलूकी?

​शिकायतकर्ता महिला, जो इसी स्कूल में योगा शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं, ने एसडीओ को दिए अपने आवेदन में दिल दहला देने वाले खुलासे किए हैं। आरोपों के मुताबिक:

  • अनुचित व्यवहार: प्राचार्य फादर बोनीफेस मरांडी पर शिक्षिका और उनकी नाबालिग पुत्री के साथ अनुचित और अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप है।
  • अपमानजनक भाषा: जब शिक्षिका ने इस व्यवहार का विरोध किया, तो प्राचार्य ने कथित तौर पर उनके साथ बेहद अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
  • आर्थिक अनियमितता: प्रताड़ना के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन पर व्यापारिक गड़बड़ी के भी आरोप हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में बार-बार किताबें बदली जाती हैं और परिसर के भीतर ही ऊंचे दामों पर सामग्री बेची जाती है।

​प्रशासनिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 3 घंटे की सघन पूछताछ

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीओ कृष्ण चंद्र गुप्ता ने केवल कागजी कार्रवाई नहीं की, बल्कि एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया। इस टीम में प्रशासन के लगभग हर उस विभाग के अधिकारी शामिल थे जो बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े हैं:

  1. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO)
  2. महिला हेल्प डेस्क एवं चाइल्ड हेल्प डेस्क
  3. सीडीपीओ (CDPO)
  4. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग
  5. रसलपुर थाना की महिला पुलिस पदाधिकारी

​जांच टीम ने स्कूल के शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और पीड़ित पक्ष से अलग-अलग कमरों में पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों ने दबी जुबान में प्राचार्य के ‘तानाशाही’ रवैये की पुष्टि की है। एसडीओ ने स्कूल के दस्तावेजों और सीसीटीवी फुटेज (यदि उपलब्ध हो) की भी जांच के निर्देश दिए हैं।

​प्राचार्य की ‘खामोशी’: फोन बंद, संपर्क से बाहर

​हैरानी की बात यह है कि जब इतनी बड़ी जांच टीम स्कूल में मौजूद थी और उन पर गंभीर आरोप लग रहे थे, तब प्राचार्य फादर बोनीफेस मरांडी ने अपना पक्ष रखना जरूरी नहीं समझा। जांच के बाद मीडिया और स्थानीय लोगों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुए। उनका मोबाइल फोन भी बंद मिला, जिससे उन पर लगे आरोपों को लेकर संदेह और गहरा गया है।

​प्रशिक्षषु आईएएस सह एसडीओ कृष्ण चंद्र गुप्ता ने बताया:

​”हमने सभी पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं। महिला और चाइल्ड हेल्प डेस्क की रिपोर्ट के साथ-साथ शिक्षा विभाग की रिपोर्ट बुधवार तक प्राप्त हो जाएगी। इन रिपोर्टों के आधार पर दोषी पाए जाने पर प्राचार्य के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

 

​निष्कर्ष: मिशनरी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल

​कहलगांव के इस प्रतिष्ठित स्कूल में हुई इस घटना ने मिशनरी स्कूलों के अनुशासन और वहां काम करने वाली महिला कर्मियों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अगर एक शिक्षिका और उसकी बेटी ही स्कूल के भीतर सुरक्षित नहीं हैं, तो आम छात्र-छात्राओं का क्या होगा?

​कहलगांव के अभिभावकों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि शिक्षा के नाम पर ‘व्यापार’ और ‘शोषण’ करने वाले ऐसे केंद्रों पर ताला लगना चाहिए और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। अब सबकी नजरें बुधवार को आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

  • ये भी पढ़े..

    पटना हाईकोर्ट सख्त: बेऊर में अतिक्रमण और जलजमाव मामले पर सरकार से मांगी रिपोर्ट, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल

    Share Add as a preferred…