
भागलपुर/पटना। 08 अप्रैल 2026 : भागलपुर के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (मायागंज अस्पताल) में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला अब सत्ता के गलियारों तक पहुँच गया है। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग (Orthopedics) में इलाज कराने आई एक गरीब महिला के परिजनों से ऑपरेशन (सर्जरी) के नाम पर 40 हजार रुपये की अवैध मांग किए जाने की शिकायत ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए बिहार के स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। मंगलवार को उन्होंने इस घटना पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से लिखित जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला: गरीब मरीज से ‘मोटी रकम’ की डिमांड
घटना मायागंज अस्पताल के हड्डी रोग विभाग की है, जहाँ एक महिला मरीज गंभीर चोट के कारण भर्ती हुई थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे सर्जरी की सलाह दी। आरोप है कि ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू करने के बदले संबंधित डॉक्टर और उनके कुछ सहायकों ने परिजनों से 40 हजार रुपये की मांग की। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने अस्पताल के सरकारी और मुफ्त होने की बात कही, तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा।
परेशान परिजनों ने इस उगाही की शिकायत स्थानीय स्तर पर करने के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों तक पहुँचाई। जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया के जरिए वायरल हुआ, पटना स्थित स्वास्थ्य मुख्यालय में हड़कंप मच गया।
स्वास्थ्य सचिव की नाराजगी: प्राचार्य से 24 घंटे में मांगा स्पष्टीकरण
स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने इस मामले को विभाग की छवि धूमिल करने वाला करार दिया है। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को कड़े निर्देश जारी किए हैं:
- जांच और कार्रवाई की रिपोर्ट: सचिव ने पूछा है कि अस्पताल परिसर में इस तरह की अवैध मांग कैसे की गई और अब तक इस पर क्या आंतरिक कार्रवाई हुई है।
- प्राचार्य की जवाबदेही: प्राचार्य से पूछा गया है कि उनके नेतृत्व में अस्पताल के भीतर भ्रष्टाचार की ऐसी शिकायतें क्यों आ रही हैं।
- दोषियों पर गाज गिरना तय: सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित डॉक्टर और कर्मियों पर निलंबन (Suspension) की कार्रवाई की जा सकती है।
मायागंज अस्पताल: सेवा का मंदिर या ‘कमीशन’ का केंद्र?
भागलपुर का मायागंज अस्पताल पूरे पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लिए ‘लाइफलाइन’ माना जाता है। यहाँ गरीब तबके के लोग इस उम्मीद में आते हैं कि उन्हें मुफ्त और बेहतर इलाज मिलेगा। लेकिन हड्डी रोग विभाग में 40 हजार रुपये मांगे जाने की इस घटना ने एक बार फिर उन ‘सफेदपोश’ चेहरों को बेनकाब कर दिया है जो मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सर्जरी के सामान और इम्प्लांट्स (Implants) के नाम पर मरीजों से अक्सर मोटी रकम वसूली जाती है। स्वास्थ्य सचिव की इस सक्रियता से अब पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।
निष्कर्ष: भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश
स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई यह त्वरित कार्रवाई अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए भी एक कड़ा संदेश है। मुख्यमंत्री की ‘सात निश्चय’ योजनाओं के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी बनाने का दावा किया जा रहा है, ऐसे में 40 हजार रुपये की यह मांग सरकार के दावों की पोल खोलती है। अब सबकी नजरें मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या वे अपने विभाग के ‘भ्रष्ट’ सहयोगियों को बचाएंगे या फिर सख्त कार्रवाई कर अस्पताल की गरिमा बहाल करेंगे?
भागलपुर के लोगों को उम्मीद है कि इस मामले में केवल ‘कागजी खानापूर्ति’ नहीं होगी, बल्कि दोषियों को सलाखों के पीछे या कम से कम उनकी सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।


