
वाशिंगटन/तेहरान/8 अप्रैल 2026। पश्चिम एशिया में मंडरा रहे महाविनाश के बादलों के बीच राहत की सबसे बड़ी खबर Axios के हवाले से आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई ‘अंतिम चेतावनी’ (8 PM ET, मंगलवार) के खत्म होने से महज 2 घंटे पहले, अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों (14 दिन) के सशर्त संघर्ष विराम (Conditional Ceasefire) पर मुहर लग गई है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने Axios को पुष्टि की है कि यह सीजफायर उसी पल से प्रभावी हो जाएगा, जैसे ही ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अपनी घेराबंदी हटाएगा और तेल टैंकरों के लिए रास्ता खोल देगा।
Axios का बड़ा खुलासा: ट्रंप की वह ‘खतरनाक’ योजना और आखिरी वक्त का यू-टर्न
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को ‘पत्थर युग’ में भेजने की पूरी तैयारी कर ली थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि मंगलवार रात 8 बजे तक समझौता नहीं हुआ, तो ईरान का एक भी पुल और पावर प्लांट सुरक्षित नहीं बचेगा। लेकिन डेडलाइन खत्म होने से कुछ ही समय पहले, पाकिस्तान की मध्यस्थता और चीन के परदे के पीछे से डाले गए भारी दबाव ने बाजी पलट दी।
- व्हाइट हाउस का बयान: एक अधिकारी ने Axios को बताया, “राष्ट्रपति ने फिलहाल बमबारी रोकने का फैसला किया है, लेकिन यह ‘ब्लैंक चेक’ नहीं है। यदि हॉर्मुज नहीं खुला, तो सीजफायर नहीं होगा।”
- शुक्रवार को पहली बैठक: Axios के मुताबिक, दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत का पहला दौर इसी शुक्रवार को इस्लामाबाद में शुरू होने जा रहा है।
’इस्लामाबाद अकॉर्ड’: क्या है समझौते की मुख्य शर्तें?
Axios और न्यूयॉर्क टाइम्स की साझा रिपोर्टिंग के अनुसार, इस 14 दिनों के ‘ब्रेथिंग स्पेस’ (राहत के समय) में कुछ कड़ी शर्तें रखी गई हैं:
- हॉर्मुज का खुलना: ईरान को दुनिया की इस ‘ऊर्जा सप्लाई लाइन’ को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलना होगा।
- हमलों पर रोक: इन दो हफ्तों में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर कोई नया हवाई हमला नहीं होगा। बदले में ईरान अपनी मिसाइलों का रुख नीचे करेगा।
- गहन वार्ता: इस समय का उपयोग एक ‘स्थायी शांति समझौते’ (Permanent Peace) का रोडमैप तैयार करने के लिए किया जाएगा।
पर्दे के पीछे का खेल: चीन की ‘चेतावनी’ और पाकिस्तान की ‘दौड़-धूप’
सूत्रों के अनुसार, Axios ने संकेत दिया है कि इस समझौते को मुकाम तक पहुँचाने में चीन ने तेहरान पर ‘आर्थिक हंटर’ चलाया था। चीन ने साफ कर दिया था कि यदि ट्रंप के हमले शुरू हुए, तो चीन ईरान का साथ नहीं दे पाएगा। वहीं, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने पूरी रात अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम और ईरानी विदेश मंत्रालय के बीच ‘ब्रिज’ का काम किया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी 10-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव भेजा है, जिसे ट्रंप ने ‘काम करने लायक आधार’ माना है। यह पहली बार है जब ट्रंप प्रशासन ने सीधे तौर पर ईरानी वार्ताकारों को “सक्रिय और इच्छुक भागीदार” बताया है।
वैश्विक बाज़ारों में जश्न: गिरती तेल की कीमतें
Axios की इस खबर के सार्वजनिक होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है। भारत सहित एशिया के उन तमाम देशों ने राहत की सांस ली है जो इस युद्ध के कारण ऊर्जा संकट की कगार पर खड़े थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 14 दिन दुनिया को एक बड़े ‘इकोनॉमिक कोलैप्स’ से बचाने के लिए निर्णायक साबित होंगे।
एक्स्क्लूसिव विश्लेषण, द वॉइस ऑफ बिहार: यह केवल एक युद्धविराम नहीं, बल्कि कूटनीति की वह जीत है जिसने ‘परमाणु युद्ध’ की आहट को शांत कर दिया है। ट्रंप का यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ है या चीन की बढ़ती कूटनीतिक धमक, यह तो आने वाले 14 दिन बताएंगे। लेकिन फिलहाल के लिए, भागलपुर से लेकर न्यूयॉर्क तक, दुनिया ने सुकून की सांस ली है।
अब सबकी नज़रें शुक्रवार को होने वाली इस्लामाबाद बैठक पर हैं, जहाँ Axios के अनुसार, युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के ‘फाइनल ड्राफ्ट’ पर चर्चा होगी।


