वैशाली का ‘वीरू’: मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, जिद बस एक ही—’साली साहिबा से कराओ निकाह वरना दे दूंगा जान’

वैशाली। बिहार की धरती पर किस्से-कहानियों की कमी नहीं है, लेकिन वैशाली जिले में मंगलवार को जो ‘हाई वोल्टेज’ ड्रामा हुआ, उसने फिल्मी परदे की पटकथा को भी पीछे छोड़ दिया। यह कहानी किसी सिनेमाई नायक की नहीं, बल्कि एक ऐसे सरफिरे आशिक की है जिसने अपनी ‘साली’ के प्यार में सातवें आसमान (मोबाइल टावर) पर जाने का फैसला कर लिया। वैशाली के चांदपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक अपनी साली से शादी की जिद को लेकर एयरटेल के ऊंचे टावर पर चढ़ गया। इसके बाद जो हुआ, वह केवल पुलिस के लिए सिरदर्द नहीं था, बल्कि पूरे इलाके के लिए कौतूहल और दहशत का मिला-जुला मंजर बन गया। घंटों तक हवा में लटके इस ‘मजनू’ ने प्रशासन की नाक में दम कर रखा था, और नीचे खड़ी भीड़ बस इस बात की दुआ कर रही थी कि कहीं इश्क का यह भूत मौत का कारण न बन जाए।

​’शोले’ का वीरू और वैशाली का जगा: जब टावर बना जिद का मंच

​बॉलीवुड की कालजयी फिल्म ‘शोले’ में धर्मेंद्र का पानी की टंकी पर चढ़कर शादी की जिद करना आज भी लोगों को याद है, लेकिन वैशाली के धर्मपुर रामराय पंचायत में यह रील लाइफ ड्रामा ‘रियल लाइफ’ में तब्दील हो गया। जगा शर्मा का पुत्र, जो अपनी घरेलू जिंदगी की उलझनों को सुलझाने के बजाय उन्हें टावर की ऊंचाई पर ले गया, अचानक गांव के पास लगे एयरटेल टावर पर चढ़ने लगा।

​शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद कोई कर्मचारी होगा, लेकिन जैसे-जैसे वह ऊंचाई पर पहुँचा और चिल्लाना शुरू किया, गांव वालों के होश उड़ गए। उसकी मांग बिल्कुल साफ और चौंकाने वाली थी—”मेरी शादी मेरी साली से करवाओ, वरना मैं यहाँ से कूदकर जान दे दूंगा।” यह सुनते ही पूरे पंचायत में हड़कंप मच गया। लोग नीचे से उसे उतरने की मिन्नतें करने लगे, लेकिन वह टावर की सबसे ऊपरी रेलिंग के पास जाकर बैठ गया। उसके हाथ में मोबाइल था या नहीं, यह तो स्पष्ट नहीं हुआ, लेकिन उसकी आवाज नीचे तक चीख-चीख कर अपनी बेतुकी मांग दोहरा रही थी।

​दो थानों की पुलिस और रेस्क्यू का ‘अग्निपथ’

​घटना की जानकारी जैसे ही फैली, आसपास के गांवों की भीड़ धर्मपुर रामराय में जमा होने लगी। मामला पेचीदा था, इसलिए स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। मौके की गंभीरता को देखते हुए चांदपुरा थाना और देसरी थाना की पुलिस दलबल के साथ वहां पहुँची। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि युवक को बिना किसी नुकसान के नीचे उतारा जाए।

​टावर की ऊंचाई इतनी थी कि अगर युवक जरा सा भी संतुलन खोता, तो परिणाम घातक हो सकता था। पुलिस कर्मियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से उससे बात करने की कोशिश की। उसे समझाया गया कि उसकी हर जायज मांग पर विचार किया जाएगा, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा। वह बार-बार नीचे कूदने की धमकी दे रहा था, जिससे पुलिस के हाथ-पांव फूल रहे थे। स्थानीय युवाओं ने भी साहस दिखाया और कुछ लोग टावर के आधे रास्ते तक उसे समझाने के लिए चढ़े, लेकिन वह किसी की सुनने को तैयार नहीं था।

​सामाजिक ताने-बाने और ‘साली’ प्रेम का अजीब संगम

​बिहार के ग्रामीण इलाकों में जीजा-साली के रिश्तों को लेकर हंसी-मजाक की एक पुरानी परंपरा रही है, लेकिन यहाँ यह रिश्ता एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा था। युवक की जिद ने न केवल उसके परिवार को शर्मिंदा किया, बल्कि उस लड़की (साली) के जीवन को भी चर्चा का विषय बना दिया जिसे उसने अपनी जिद का केंद्र बनाया था।

​गांव में चर्चा होने लगी कि आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई कि एक विवाहित या घर-गृहस्थी वाला युवक इस तरह का आत्मघाती कदम उठाने पर उतारू हो गया। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो इस तरह की घटनाएं अक्सर गहरी कुंठा या ‘ऑब्सेसिव बिहेवियर’ का नतीजा होती हैं। जगा शर्मा के पुत्र का यह कृत्य केवल प्यार का इजहार नहीं था, बल्कि एक तरह का ‘इमोशनल ब्लैकमेल’ था, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को घंटों तक बंधक बनाए रखा।

​घंटों की जद्दोजहद और ‘हैप्पी एंडिंग’ की तलाश

​रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान माहौल पल-पल बदल रहा था। कभी लगता कि युवक नीचे उतरने को तैयार है, तो कभी वह फिर से ऊपर की ओर बढ़ने लगता। पुलिस ने उसके परिवार के सदस्यों को भी मौके पर बुलाया। मां-बाप और रिश्तेदारों ने रो-रोकर उसे नीचे आने की गुहार लगाई। घंटों तक चले इस ड्रामे के दौरान इलाके की बिजली भी सुरक्षा के लिहाज से कटवा दी गई थी, ताकि किसी भी तरह के करंट का खतरा न रहे।

​आखिरकार, पुलिस की सूझबूझ और गांव के कुछ अनुभवी लोगों की मध्यस्थता काम आई। उसे भरोसा दिलाया गया कि नीचे उतरने के बाद कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और उसके परिवार के साथ बैठकर बातचीत की जाएगी। भूख, प्यास और चढ़ती धूप ने भी युवक के हौसलों को थोड़ा पस्त किया। काफी मशक्कत के बाद, उसे सुरक्षा घेरे में धीरे-धीरे नीचे उतारा गया। जैसे ही उसके पैर जमीन पर पड़े, पुलिस और परिजनों ने राहत की सांस ली।

​कानून की नजर में ‘टावर मैन’: अब आगे क्या?

​युवक को नीचे उतारने के बाद पुलिस उसे थाने ले गई। हालांकि, प्राथमिक उद्देश्य उसकी जान बचाना था, जो पूरा हो गया, लेकिन इस तरह के कृत्यों से सार्वजनिक व्यवस्था में जो व्यवधान पैदा हुआ, उस पर कानूनी राय ली जा रही है। मोबाइल टावर पर चढ़ना न केवल जान जोखिम में डालना है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है।

​चांदपुरा थाना पुलिस ने युवक की काउंसलिंग कराने की बात कही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उसे मानसिक रूप से स्थिर होने की जरूरत है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और उनके द्वारा लिए जाने वाले अजीबोगरीब फैसलों को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता की कितनी कमी है।

​वैशाली की सड़कों पर चर्चा का विषय

​धर्मपुर रामराय पंचायत में हुई इस घटना के बाद वैशाली के चौक-चौराहों पर बस इसी की चर्चा है। कोई इसे ‘कलयुगी इश्क’ कह रहा है, तो कोई इसे नशे या मानसिक बीमारी का असर बता रहा है। बहरहाल, जगा शर्मा के बेटे का यह ‘टावर प्रेम’ जिले के इतिहास में एक अजीबोगरीब अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

​प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी निजी समस्याओं के समाधान के लिए इस तरह के आत्मघाती और अवैध रास्ते न चुनें। मोबाइल टावर संचार के लिए हैं, न कि अपनी मांगों को मनवाने के लिए ‘विरोध प्रदर्शन’ का मंच। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई और घरेलू विवाद था या यह महज एक सनकी युवक की बेतुकी जिद थी। वैशाली का यह ड्रामा भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन इसने समाज के सामने कई गंभीर सवाल जरूर छोड़ दिए हैं।

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