
पटना, 07 अप्रैल 2026: बिहार पुलिस अब केवल लाठी और तफ्तीश के भरोसे नहीं, बल्कि माइक्रोस्कोप और डीएनए टेस्ट के दम पर अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजेगी। राजधानी पटना के सरदार पटेल भवन में आयोजित दो दिवसीय ‘सैटेलाइट कॉन्फ्रेंस ऑन बायोलॉजिकल साइंसेज’ का उद्घाटन करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने बिहार के फॉरेंसिक ढांचे में होने वाले आमूलचूल बदलावों का खाका पेश किया।
DGP ने स्पष्ट किया कि अगले एक से दो वर्षों के भीतर बिहार में 13 क्षेत्रीय फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) पूरी तरह कार्यात्मक हो जाएंगी। वर्तमान में राज्य में केवल 4 FSL (पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर) काम कर रही हैं, लेकिन अन्य 9 क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं के भवन बनकर तैयार हैं और 102 सहायक निदेशकों व वैज्ञानिकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
फॉरेंसिक रिपोर्टिंग में 20 गुना से अधिक का उछाल
DGP विनय कुमार ने पिछले दो दशकों के विकास की तुलना करते हुए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक सेवाओं की पहुंच अब हर खास-ओ-आम तक हो रही है।
पैमाना | वर्ष 2012-13 | वर्ष 2025-26 (वर्तमान) |
|---|---|---|
कुल सुलझाए गए केस | 700 – 800 | 18,000+ |
वैज्ञानिकों की संख्या | ~ 30 – 35 | सैकड़ों (निरंतर नियुक्तियां जारी) |
फॉरेंसिक वैन | नगण्य | 50 वैन (40 जिलों में) |
BNSS का अनिवार्य प्रावधान और नई चुनौतियां
नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) का जिक्र करते हुए DGP ने कहा कि अब 7 साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक विशेषज्ञों का मौका-ए-वारदात पर पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है।
”हम केवल केस नहीं सुलझा रहे, हम न्याय की वैज्ञानिक नींव रख रहे हैं। 2012 में जहां हम साल भर में बमुश्किल 800 केस देख पाते थे, आज हम 18,000 केसों में फॉरेंसिक रिपोर्ट दे रहे हैं।” — DGP विनय कुमार
प्रमुख घोषणाएं और भावी योजनाएं:
- DNA लैब की मांग: वर्तमान में राज्य में केवल एक DNA लैब है। POCSO मामलों की बढ़ती पेंडेंसी को देखते हुए DGP ने केंद्र (DFSS) से निर्भया फंड के जरिए 3-4 नई DNA लैब स्थापित करने में सहयोग मांगा है।
- NFSU कैंपस का आगमन: नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) का कैंपस बिहार में स्थापित करने के लिए MOU साइन हो चुका है। फिलहाल जमीन चयन की प्रक्रिया चल रही है।
- साइबर फॉरेंसिक: पटना और राजगीर में हाई-टेक साइबर फॉरेंसिक लैब स्थापित करने के लिए भी समझौता हो चुका है।
- मोबाइल लैब: 28 जिलों में ‘डिस्ट्रिक्ट मोबाइल लेबोरेटरी’ के भवन तैयार हैं और वहां वैज्ञानिकों की तैनाती कर उन्हें फंक्शनल कर दिया गया है।
बिहार का गौरवशाली इतिहास: 1897 से 2026 तक
DGP ने बिहार के फॉरेंसिक इतिहास की याद दिलाते हुए बताया कि वैज्ञानिक जांच में बिहार हमेशा अग्रणी रहा है। 1897 में कोलकाता में दुनिया के पहले फिंगर प्रिंट ब्यूरो की स्थापना में बिहार की अहम भूमिका थी। पटना में 1963 में ही FSL की स्थापना हो गई थी, जो आज उसी 7.5 एकड़ के विशाल परिसर (सरदार पटेल भवन) का हिस्सा है।
केंद्र का सहयोग: निर्भया स्कीम और SMFC
कॉन्फ्रेंस में मौजूद DFSS (नई दिल्ली) के मुख्य फॉरेंसिक वैज्ञानिक एस. के. जैन ने बताया कि केंद्र सरकार ने फॉरेंसिक इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 535 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें से 360 करोड़ रुपये 22 राज्यों को मोबाइल फॉरेंसिक वैन खरीदने के लिए जारी किए जा चुके हैं। बिहार को भी ‘निर्भया स्कीम’ और ‘स्कीम फॉर मॉडर्नाइजेशन ऑफ फॉरेंसिक कैपेसिटीज’ (SMFC) के तहत आधुनिक उपकरण और गाड़ियां मुहैया कराई जा रही हैं।


