
पटना: बिहार में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर कार्रवाई तेज हो गई है। इसी क्रम में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने किशनगंज के पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार से उनकी कथित अवैध संपत्तियों को लेकर लंबी और गहन पूछताछ की। सोमवार को पटना स्थित ईओयू कार्यालय में उनसे करीब पांच घंटे तक लगातार सवाल-जवाब किए गए, जिसमें कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं।
करोड़ों की संपत्ति पर उठे सवाल
जांच एजेंसी को संदेह है कि गौतम कुमार के पास मौजूद संपत्तियां उनके ज्ञात आय स्रोत से कहीं अधिक हैं। पूछताछ के दौरान उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि उन्होंने अपने नाम के अलावा पत्नी, रिश्तेदारों और करीबी महिला मित्रों के नाम पर बड़ी संख्या में जमीन और संपत्ति कैसे खरीदी। जानकारी के मुताबिक, उनके नाम या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर दो दर्जन से अधिक प्लॉट और संपत्तियां सामने आई हैं।
देश-विदेश तक फैली संपत्तियों की जांच
ईओयू ने गौतम कुमार से बिहार के पूर्णिया और पटना के अलावा दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम बंगाल और यहां तक कि नेपाल में मौजूद संपत्तियों के बारे में भी विस्तार से पूछताछ की। अधिकारियों ने हर संपत्ति की खरीद की तारीख, भुगतान के स्रोत और निवेश के तरीके की जानकारी मांगी है। अब इन सभी जानकारियों का सत्यापन किया जाएगा।
महंगी गाड़ियां और लग्जरी सामान भी जांच के घेरे में
सिर्फ अचल संपत्ति ही नहीं, बल्कि चल संपत्तियों को लेकर भी कई सवाल उठाए गए। थार और क्रेटा जैसी महंगी गाड़ियों की खरीद, लाखों रुपये के सोने के आभूषण और महंगी घड़ियों के स्रोत को लेकर भी जवाब मांगा गया। जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन सबके लिए धन कहां से आया।
पूछताछ में टालमटोल, तबीयत का दिया हवाला
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान गौतम कुमार कई सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। कुछ प्रश्नों पर उन्होंने सतही जानकारी दी, जबकि कई अहम सवालों को टालने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने अपनी खराब तबीयत का हवाला भी दिया, जिससे पूछताछ में रुकावट आई।
सीमाई जिलों में पोस्टिंग पर भी उठे सवाल
जांच एजेंसी ने उनके लंबे सेवाकाल पर भी सवाल उठाए। करीब 34 वर्षों की सेवा में उनकी अधिकांश पोस्टिंग सीमावर्ती जिलों में ही क्यों रही, इसे लेकर भी पूछताछ की गई। यह भी जांच का विषय है कि क्या इसके पीछे किसी प्रभावशाली नेटवर्क या सफेदपोश लोगों की भूमिका थी।
माफिया कनेक्शन की भी जांच
ईओयू यह भी खंगाल रही है कि कहीं गौतम कुमार के आपराधिक या माफिया तत्वों से संबंध तो नहीं थे। उनकी कथित काली कमाई कहां-कहां निवेश की गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही, इसकी भी जांच जारी है।
फिर बुलाए जा सकते हैं गौतम कुमार
ईओयू ने स्पष्ट किया है कि पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर गौतम कुमार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। जल्द ही उन्हें नया नोटिस जारी होने की संभावना है।

एक और अधिकारी पर शिकंजा
इस मामले से जुड़े एक अन्य अधिकारी, सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार को भी आर्थिक अपराध इकाई ने तलब किया है। उन्हें पहले ही नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
बढ़ती सख्ती का संकेत
यह पूरा मामला इस बात का संकेत है कि बिहार में सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और उनके आय स्रोतों की गहन जांच अब प्राथमिकता बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि जांच एजेंसी हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है।


