
मालदा/साहेबगंज : पूर्व रेलवे के मालदा मंडल के अंतर्गत संचालित ईस्टर्न रेलवे हाई स्कूल, साहेबगंज ने नए शैक्षणिक सत्र 2026–27 की शुरुआत के साथ एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सह-शिक्षा (Co-Education) प्रणाली को लागू किया है। यह पहल विद्यालय के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए समावेशी और समान अवसर आधारित शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
यह निर्णय मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में लिया गया, जो भारतीय रेल के व्यापक दृष्टिकोण—समानता, समावेशिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा—को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।
पहली बार लड़कियों का नामांकन, सकारात्मक माहौल
नए सत्र में पहली बार विद्यालय में लड़कियों का नामांकन किया गया है। अब तक 12 छात्राओं का प्रवेश सुनिश्चित किया गया है, जबकि आने वाले दिनों में इस संख्या के और बढ़ने की संभावना है।
विद्यालय प्रशासन ने सभी नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें छोटे-छोटे उपहार देकर प्रोत्साहित किया, जिससे बच्चों में उत्साह और आत्मविश्वास का माहौल बना।
समावेशी शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि सह-शिक्षा की शुरुआत से छात्रों को विविध और संतुलित शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। इससे न केवल शैक्षणिक विकास होगा, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक समझ और पारस्परिक सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।
भारतीय रेल की समावेशी सोच का प्रतिबिंब
यह पहल भारतीय रेल की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक समानता और अवसरों की समान उपलब्धता को प्राथमिकता दी जा रही है।
विद्यालय प्रबंधन ने विश्वास जताया कि यह कदम आने वाले समय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और संस्थान को एक आदर्श शिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
भविष्य के लिए नई उम्मीद
सह-शिक्षा प्रणाली के लागू होने से विद्यालय में शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में और अधिक विविधता आएगी। इससे छात्रों को बेहतर सीखने का माहौल मिलेगा और वे प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए अधिक तैयार हो सकेंगे।
इस नई पहल के साथ ईस्टर्न रेलवे हाई स्कूल, साहेबगंज ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रगतिशील सोच और सामाजिक समानता का मजबूत संदेश दिया है।


