
नई दिल्ली/मदुरै | विशेष संवाददाता: तमिलनाडु के बहुचर्चित साथानकुलम कस्टोडियल डेथ मामले में अदालत ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। के प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” करार देते हुए कहा कि यह कानून के रक्षकों द्वारा की गई अमानवीयता की पराकाष्ठा है।
अदालत ने दोषियों पर मृतकों के परिजनों को 1.40 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
लॉकडाउन उल्लंघन से शुरू हुई दर्दनाक घटना
यह मामला जून 2020 का है, जब तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के साथानकुलम में एक मोबाइल दुकान चलाने वाले पिता-पुत्र—पी. जयराज (59) और जे. बेनिक्स (31)—को लॉकडाउन नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था।
आरोप है कि थाने में दोनों के साथ बर्बर मारपीट की गई। बाद में न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के कुछ ही दिनों के भीतर दोनों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
हाईकोर्ट के दखल के बाद CBI जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए ने स्वतः संज्ञान लिया और जांच को सौंप दी गई।
CBI जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। एक महिला कांस्टेबल की गवाही इस केस में बेहद अहम साबित हुई, जिसमें उसने बताया कि पिता-पुत्र को पूरी रात बेरहमी से पीटा गया था।
हालांकि, पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज सुरक्षित नहीं पाए गए, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया गया।
किन पुलिसकर्मियों को मिली सजा
इस मामले में कुल 10 आरोपी थे, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। शेष 9 दोषियों को अदालत ने मृत्युदंड सुनाया।
दोषियों में शामिल हैं:
- इंस्पेक्टर एस. श्रीधर (तत्कालीन थाना प्रभारी)
- सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश, के. बालकृष्णन
- हेड कॉन्स्टेबल एस. मुरुगन, ए. समदुरई
- कॉन्स्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस, एस. वेलुमुथु
अदालत की कड़ी टिप्पणी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का उदाहरण है।
कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से यातना दी और कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ने वाले बन गए। इसलिए यह मामला “दुर्लभतम में दुर्लभ” की श्रेणी में आता है, जहां मृत्युदंड उचित है।
6 साल बाद मिला न्याय
करीब छह वर्षों तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले को न्याय व्यवस्था की बड़ी जीत माना जा रहा है। देशभर में मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय का स्वागत किया है।
बड़ा संदेश
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय है, बल्कि उन सभी सरकारी अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है जो अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं।
साथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस का यह फैसला भारतीय न्यायपालिका की सख्ती और निष्पक्षता को दर्शाता है। यह निर्णय आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल के तौर पर देखा जाएगा, जहां मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है।


