​मोतिहारी में ‘मौत के सौदागरों’ का सरेंडर: जहरीली शराब कांड के मास्टरमाइंड सुनील साह और कन्हैया यादव ने अदालत में टेके घुटने, डीएसपी दिलीप कुमार ने शुरू की पूछताछ

मोतिहारी/पूर्वी चम्पारण। बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में पिछले दिनों हुए रूह कंपा देने वाले जहरीली शराब कांड ने जहाँ दर्जनों परिवारों के चिराग बुझा दिए थे, वहीं इस पूरे काले साम्राज्य के मुख्य किरदारों की तलाश में पुलिस की रातें काली हो रही थीं। सोमवार, 6 अप्रैल 2026 की दोपहर मोतिहारी कोर्ट परिसर में उस समय भारी गहमागहमी और सुरक्षात्मक हलचल बढ़ गई, जब इस कांड के दो सबसे बड़े वांछित मास्टरमाइंड, सुनील साह और कन्हैया यादव ने कानूनी शिकंजे और पुलिसिया दबिश के आगे घुटने टेकते हुए आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया। बिहार में शराबबंदी कानून की धज्जियां उड़ाने और ‘मौत का रस’ बेचने वाले ये दोनों आरोपी पिछले कई हफ्तों से पुलिस की रडार से बाहर थे। इनकी गिरफ्तारी के लिए चंपारण से लेकर पड़ोसी जिलों और नेपाल सीमा तक छापेमारी की जा रही थी। जैसे ही इनके आत्मसमर्पण की खबर जिला मुख्यालय पहुँची, सदर डीएसपी-1 दिलीप कुमार दलबल के साथ कोर्ट पहुँचे और मामले की कमान संभालते हुए आरोपियों से गहन पूछताछ शुरू कर दी है।

पुलिसिया घेराबंदी का दबाव: दबिश से टूटे हौसले

​मोतिहारी के जहरीली शराब कांड के बाद से ही जिला पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) पर इन मास्टरमाइंड्स को पकड़ने का भारी दबाव था। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सुनील साह और कन्हैया यादव के संभावित ठिकानों, उनके रिश्तेदारों के घरों और व्यापारिक ठिकानों पर लगातार कुर्की-जब्ती और छापेमारी की जा रही थी। पुलिस के बढ़ते दबाव और कानूनी गलियारों में उनकी संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू होने के डर ने अंततः इन ‘सौदागरों’ को मजबूर कर दिया।

​सूत्रों के अनुसार, सुनील साह और कन्हैया यादव को यह अहसास हो गया था कि अब वे ज्यादा दिनों तक फरारी नहीं काट सकते। पुलिस ने उनके पूरे रसद नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया था। सोमवार की सुबह जब दोनों आरोपी बेहद गुपचुप तरीके से कोर्ट पहुँचे, तो वहां पहले से मौजूद सिविल ड्रेस में तैनात पुलिस कर्मियों ने उन्हें पहचान लिया। हालांकि, आरोपियों ने विधिवत रूप से सक्षम न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण की अर्जी दी।

सदर डीएसपी दिलीप कुमार की एंट्री: इंटरोगेशन की मेज पर मास्टरमाइंड

​आत्मसमर्पण की सूचना मिलते ही सदर डीएसपी-1 दिलीप कुमार बिना वक्त गंवाए मोतिहारी कोर्ट पहुँचे। उन्होंने कागजी कार्रवाई पूरी होने के तुरंत बाद सुनील साह से शुरुआती पूछताछ शुरू की। पुलिस के लिए यह जानना सबसे महत्वपूर्ण है कि जहरीली शराब का वह ‘कच्चा माल’ कहाँ से आ रहा था जिसने जिले में तांडव मचाया।

द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, पूछताछ के मुख्य बिंदु:

  1. सप्लाई चेन का पर्दाफाश: शराब बनाने के लिए प्रयुक्त स्पिरिट और केमिकल का मुख्य स्रोत (Source) क्या था?
  2. स्थानीय संरक्षण: क्या प्रशासन या स्थानीय स्तर पर किन्हीं रसूखदारों का इन्हें वरदहस्त प्राप्त था?
  3. फरारी का ठिकाना: पिछले कई दिनों से वे किसके संरक्षण में और कहाँ छिपे हुए थे?
  4. नेटवर्क के अन्य सदस्य: इस काले व्यापार में उनके और कौन-कौन से साझेदार हैं जो अब भी बाहर घूम रहे हैं?

मोतिहारी शराब कांड: एक घाव जो अब भी हरा है (विशेष विश्लेषण)

​पूर्वी चम्पारण का यह जहरीली शराब कांड केवल एक अपराध नहीं था, बल्कि यह बिहार में शराबबंदी की सफलता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह था। जिस समय यह कांड हुआ, उस समय पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया था। कई लोगों ने अपनी आँखों की रोशनी खो दी और दर्जनों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

  • आर्थिक और सामाजिक चोट: मरने वालों में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर और गरीब परिवारों के लोग थे। सुनील साह और कन्हैया यादव जैसे लोग इसी वर्ग की कमजोरी का फायदा उठाकर अपना साम्राज्य खड़ा करते हैं।
  • पुलिस की साख: मास्टरमाइंड्स का पकड़ में न आना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा था। आज के आत्मसमर्पण को पुलिस अपनी ‘रणनीतिक जीत’ के रूप में देख रही है क्योंकि यह उनकी लगातार छापेमारी का ही नतीजा है कि आरोपियों ने खुद को कानून के हवाले करना बेहतर समझा।

न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस रिमांड की तैयारी

​सुनील साह और कन्हैया यादव के सरेंडर के बाद अब पुलिस उन्हें रिमांड पर लेने की तैयारी में है। दिलीप कुमार की टीम चाहती है कि इन दोनों से कम से कम 72 घंटों की गहन पूछताछ की जाए ताकि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ें काटी जा सकें। अदालत के आदेश के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा, लेकिन पुलिस ‘पुलिस रिमांड’ के लिए अर्जी दाखिल करने की प्रक्रिया में जुटी है।

​आरोपियों के वकीलों का तर्क है कि उन्होंने कानून का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण किया है, जबकि पुलिस का कहना है कि यह केवल एक रणनीतिक कदम है ताकि वे एनकाउंटर या सख्त पुलिसिया कार्रवाई से बच सकें। दिलीप कुमार ने कोर्ट परिसर में मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

द वॉयस ऑफ बिहार का विशेष विश्लेषण: क्या थमेगा मौत का सिलसिला?

​6 अप्रैल 2026 की यह दोपहर मोतिहारी के लिए एक बड़ी खबर लेकर आई है, लेकिन क्या इन दो चेहरों के सरेंडर से शराब का अवैध व्यापार पूरी तरह बंद हो जाएगा?

  • सिस्टम की सफाई: जब तक छोटे-छोटे वितरण केंद्रों और कच्ची शराब की भट्टियों को पूरी तरह नष्ट नहीं किया जाता, तब तक सुनील और कन्हैया जैसे नए नाम उभरते रहेंगे।
  • स्पीडी ट्रायल की मांग: मोतिहारी की जनता चाहती है कि इस मामले में ‘स्पीडी ट्रायल’ हो और इन अपराधियों को ऐसी सजा मिले जो पूरे प्रदेश के लिए एक नजीर बन जाए।

न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम

​मोतिहारी के जहरीली शराब कांड के मास्टरमाइंड्स का आत्मसमर्पण यह साबित करता है कि जब पुलिस और प्रशासन कड़ा रुख अपनाते हैं, तो अपराधियों को भागने का रास्ता नहीं मिलता। दिलीप कुमार का खुद कोर्ट पहुँचकर पूछताछ करना मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है। सुनील साह और कन्हैया यादव अब सलाखों के पीछे हैं, लेकिन उनके द्वारा बोए गए जहर के बीज अब भी समाज में कहीं न कहीं मौजूद हो सकते हैं।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस मामले की हर कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ के बाद निकलने वाले तथ्यों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। हमारा लक्ष्य केवल खबर पहुँचाना नहीं, बल्कि उस न्याय प्रक्रिया का हिस्सा बनना है जो पीड़ित परिवारों को सुकून दे सके। फिलहाल, मोतिहारी कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस की टीमें आगे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

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