
पटना/दानापुर। बिहार की राजधानी पटना के व्यस्ततम इलाकों में शुमार खगौल ओवरब्रिज शनिवार की दोपहर एक ऐसी फिल्मी पटकथा का गवाह बना, जिसने पुलिसिया सुरक्षा दावों और राजधानी की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुजरात के राजकोट से करीब 15 किलो सोने के जेवरात लेकर पटना आ रहे दो व्यापारियों को अपराधियों ने बड़ी चालाकी से अपना शिकार बनाया। अपराधियों ने न केवल ‘कस्टम अधिकारी’ का स्वांग रचा, बल्कि दिनदहाड़े ओवरब्रिज पर ट्रैफिक के बीच इस बड़ी लूट को अंजाम देकर फरार हो गए। शनिवार, 4 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब एक बजे हुई इस वारदात ने राजधानी के सर्राफा बाजार और व्यापारिक जगत में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। 15 किलो सोना, जिसकी बाजार में कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है, उसे अपराधियों ने महज कुछ मिनटों में ‘जांच’ के नाम पर लूट लिया। 5 अप्रैल की यह रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल लूट के हर उस पहलू को उजागर करती है जिसे अपराधियों ने बड़ी सावधानी से बुना था।
राजकोट से पटना: केबीएस एंड संस के सोने का ‘खूनी’ सफर
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब राजकोट (गुजरात) के प्रसिद्ध संस्थान ‘केबीएस एंड संस’ के दो कर्मचारी, महेश मामतोरा और प्रिंस रामपरिया, अहमदाबाद-सहरसा एक्सप्रेस से दानापुर रेलवे स्टेशन पहुँचे। इनके पास तीन बैगों में लगभग 15 किलो सोने के बने-बनाए जेवरात थे, जिन्हें पटना के स्थानीय व्यापारियों को सप्लाई किया जाना था। दानापुर स्टेशन से बाहर निकलने के बाद, सुरक्षा कारणों या जल्दबाजी में दोनों व्यापारियों ने एक ऑटो बुक किया और पटना शहर की ओर रवाना हुए।
जैसे ही उनका ऑटो खगौल ओवरब्रिज के बीचों-बीच पहुँचा, वहां पहले से घात लगाए बैठे अपराधियों ने अपनी योजना को अमली जामा पहनाया। एक कार और दो मोटरसाइकिलों पर सवार 5 से 7 बदमाशों ने अचानक ऑटो को ओवरब्रिज पर घेरकर रुकवा दिया। अपराधियों का पहनावा ऐसा था कि कोई भी धोखा खा जाए; वे सफेद शर्ट और खाकी पैंट पहने हुए थे, जो आमतौर पर जांच एजेंसियों के अधिकारियों की अनौपचारिक वर्दी मानी जाती है।
‘जांच’ का नाटक और अपहरण: महेश मामतोरा की आपबीती
ऑटो रुकते ही बदमाशों ने खुद को ‘कस्टम विभाग’ का अधिकारी बताया। उन्होंने व्यापारियों को डराते हुए कहा कि उन्हें गुप्त सूचना मिली है कि इस ऑटो में अवैध रूप से सोना ले जाया जा रहा है। व्यापारियों ने जब अपना परिचय देना चाहा, तो कथित अधिकारियों ने उन्हें चुप करा दिया और ‘जांच’ के नाम पर सोने से भरे तीनों बैग अपने कब्जे में ले लिए।
अपराधियों ने अपनी योजना को और पुख्ता करने के लिए महेश मामतोरा को जबरन अपनी कार में बैठा लिया, जबकि प्रिंस रामपरिया को वहीं ऑटो में छोड़ दिया गया। महेश के अनुसार, कार के भीतर अपराधियों ने उनके चेहरे पर नकाब डाल दिया और उनके हाथ बांध दिए ताकि वे रास्ता न देख सकें। महेश ने बताया कि बदमाशों की बातचीत और उनका आत्मविश्वास इतना गहरा था कि उन्हें एक पल के लिए भी संदेह नहीं हुआ कि वे असली अधिकारी नहीं हैं। करीब आधे घंटे तक कार में घुमाने के बाद, बदमाशों ने महेश को नौबतपुर रोड स्थित ‘फौजी ढाबा’ के पास फेंक दिया और सोने के साथ फरार हो गए।
अपराध का ‘मॉडस ऑपेरंडी’: वर्दी की आड़ में बेखौफ लुटेरे (विशेष विश्लेषण)
द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, पटना में पिछले कुछ समय से ‘छद्म अधिकारी’ (Impersonation) बनकर लूट करने की घटनाओं में इजाफा हुआ है।
- सटीक मुखबिरी: अपराधियों को यह पता था कि राजकोट के व्यापारी किस ट्रेन से आ रहे हैं, उनके पास कितने बैग हैं और वे ऑटो से किस रास्ते से गुजरेंगे। यह बिना किसी ‘इनसाइडर’ या सटीक मुखबिरी के संभव नहीं है।
- स्थान का चयन: खगौल ओवरब्रिज एक ऐसा स्थान है जहाँ से भागने के कई रास्ते (दानापुर, खगौल, फुलवारीशरीफ और नौबतपुर) निकलते हैं। दोपहर के समय यहाँ ट्रैफिक तो होता है, लेकिन पुलिस की मौजूदगी कम रहती है।
- मनोवैज्ञानिक दबाव: ‘कस्टम अधिकारी’ शब्द का इस्तेमाल व्यापारियों के मन में कानून का डर पैदा करने के लिए किया गया, ताकि वे मौके पर कोई विरोध या शोर-शराबा न करें।
पुलिस की कार्रवाई: नौबतपुर से संदिग्ध कार बरामद
महेश मामतोरा के किसी तरह पुलिस से संपर्क करने के बाद खगौल थाना पुलिस हरकत में आई। खगौल थाना प्रभारी रंजन कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीमों ने नौबतपुर और आसपास के इलाकों में घेराबंदी शुरू की। पुलिस को एक बड़ी सफलता तब मिली जब नौबतपुर रोड से वह संदिग्ध कार लावारिस हालत में बरामद कर ली गई, जिसका उपयोग लूट और अपहरण में किया गया था।
रंजन कुमार ने बताया कि कार को जब्त कर लिया गया है और उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि फिंगरप्रिंट्स के जरिए अपराधियों तक पहुँचा जा सके। पुलिस ने गुजरात स्थित ‘केबीएस एंड संस’ के मालिक सुनील भाई को घटना की आधिकारिक सूचना दे दी है। रंजन कुमार ने स्पष्ट किया कि लूटे गए सोने की वास्तविक मात्रा और उसकी शुद्धता का सटीक पता सुनील भाई के पटना आने और उनके स्टॉक रजिस्टर की जांच के बाद ही चल पाएगा।
सुरक्षा पर सवाल: 15 किलो सोना और एक ‘ऑटो’ का सफर
इस पूरी घटना ने व्यापारियों की सुरक्षा पद्धति पर भी सवाल खड़े किए हैं। करोड़ों रुपये मूल्य का 15 किलो सोना लेकर दानापुर स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके से एक साधारण ऑटो में सफर करना जोखिम भरा कदम था। अक्सर बड़े व्यापारी सुरक्षा के नाम पर निजी गार्ड या सुरक्षित वाहनों का उपयोग करते हैं, लेकिन यहाँ ‘साधारण दिखने’ की कोशिश ही व्यापारियों पर भारी पड़ गई।
पटना पुलिस अब दानापुर रेलवे स्टेशन और खगौल ओवरब्रिज के आसपास लगे सभी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। पुलिस को उम्मीद है कि कार और मोटरसाइकिलों के नंबर प्लेट्स से अपराधियों के ठिकाने का पता चल सकेगा। साथ ही, उन सभी मोबाइल टावरों का डेटा (Dump Data) निकाला जा रहा है जो घटना के समय ओवरब्रिज और नौबतपुर रोड के बीच सक्रिय थे।
सुशासन की साख पर लगा ‘सोने’ का दाग
5 अप्रैल 2026 की यह रिपोर्ट बताती है कि पटना में अपराधी अब केवल असलहे के दम पर नहीं, बल्कि ‘दिमाग’ और ‘छलावे’ के दम पर भी वार कर रहे हैं। खगौल ओवरब्रिज की यह घटना पुलिस के लिए एक कड़ी चुनौती है। यदि दिनदहाड़े 15 किलो सोना लूट लिया जाता है, तो यह निवेशकों और व्यापारियों के मनोबल को तोड़ता है। रंजन कुमार और उनकी टीम पर अब इस मामले का जल्द से जल्द उद्भेदन करने का भारी दबाव है।
द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस हाई-प्रोफाइल मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। हमारा मानना है कि जब तक पुलिस इस गिरोह के ‘मास्टरमाइंड’ और ‘मुखबिर’ तक नहीं पहुँचती, तब तक राजधानी की सड़कों पर ऐसे ‘नकली अधिकारी’ व्यापारियों को शिकार बनाते रहेंगे। फिलहाल, पुलिस की कई टीमें अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही हैं।


