मुजफ्फरपुर से दिल्ली तक क्यों अचानक बंद हो रहे E-Rickshaw? BAT-BMS ऐप को लेकर सामने आई पूरी सच्चाई

पिछले कुछ दिनों से बिहार समेत देश के कई हिस्सों में ई-रिक्शा चालकों के बीच एक नई चिंता तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और दावों ने इस डर को और बढ़ा दिया है। दावा किया जा रहा है कि एक मोबाइल ऐप की मदद से चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक बीच सड़क पर रोका जा सकता है। खासकर मुजफ्फरपुर, पटना, दरभंगा, समस्तीपुर, मोतिहारी, बेतिया और दिल्ली जैसे शहरों में यह चर्चा तेजी से फैल रही है, जहां हजारों परिवार ई-रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका चलाते हैं।

वायरल वीडियो में कुछ लोग मोबाइल फोन हाथ में लेकर ई-रिक्शा के पास खड़े दिखाई देते हैं और कुछ सेकंड बाद वाहन बंद हो जाता है। ऐसे वीडियो सामने आने के बाद चालकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या सचमुच कोई व्यक्ति सिर्फ फोन के जरिए उनके वाहन को रोक सकता है, या फिर यह केवल अफवाह है। इस पूरे मामले की तकनीकी पड़ताल करने पर जो तस्वीर सामने आती है, वह वायरल दावों से काफी अलग है।

BAT-BMS नाम का ऐप इस पूरे विवाद के केंद्र में है। सोशल मीडिया पर इसे एक खतरनाक ऐप की तरह पेश किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि BAT-BMS अपने आप में कोई हैकिंग टूल नहीं है। यह एक Battery Management System Monitoring Application है, जिसे लिथियम बैटरी की स्थिति मॉनिटर करने के लिए विकसित किया गया है। इसका मूल काम बैटरी की सेहत, चार्जिंग स्थिति और अन्य तकनीकी पैरामीटर की जानकारी देना है।

यह ऐप ब्लूटूथ के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर कई तरह की जानकारियां दिखाता है। इसमें बैटरी चार्ज प्रतिशत, वोल्टेज, करंट, तापमान, बैटरी हेल्थ, चार्ज-डिस्चार्ज साइकिल और बैटरी के प्रत्येक सेल की स्थिति जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। सामान्य स्थिति में यह ऐप बैटरी मालिकों और तकनीशियनों के लिए उपयोगी माना जाता है, क्योंकि इससे बैटरी की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है।

विवाद तब शुरू हुआ जब इंटरनेट पर ऐसे वीडियो वायरल होने लगे जिनमें दावा किया गया कि इस ऐप के जरिए किसी भी ई-रिक्शा को चलते-चलते बंद किया जा सकता है। कई लोगों ने इन वीडियोज को देखकर यह मान लिया कि अब हर ई-रिक्शा खतरे में है। हालांकि तकनीकी विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह सही नहीं मानते।

मुजफ्फरपुर के साहेबगंज इलाके के एक ई-रिक्शा चालक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से चालकों के बीच इस ऐप को लेकर डर बढ़ गया है। उनका कहना है कि अगर कोई अनजान व्यक्ति वाहन के पास आकर ब्लूटूथ के जरिए बैटरी से जुड़ जाए और सिस्टम में छेड़छाड़ कर दे, तो गाड़ी बीच रास्ते में बंद हो सकती है। इससे चालक और यात्रियों दोनों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

इस दावे की सच्चाई समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि Battery Management System यानी BMS आखिर होता क्या है। किसी भी लिथियम बैटरी में BMS को उसका दिमाग माना जाता है। यही सिस्टम नियंत्रित करता है कि बैटरी कितनी चार्ज होगी, कब चार्जिंग रोकी जाएगी, कितना करंट मोटर तक भेजा जाएगा और बैटरी ओवरहीट तो नहीं हो रही। आधुनिक लिथियम बैटरी पैक में BMS एक महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र होता है।

जो असली जोखिम सामने आ रहा है, वह ऐप से नहीं बल्कि कमजोर सुरक्षा वाले BMS से जुड़ा है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार केवल उन्हीं बैटरियों में खतरा हो सकता है जिनमें Bluetooth Enabled BMS लगा हो और जिसकी सुरक्षा पर्याप्त मजबूत न हो। यदि उस सिस्टम में पासवर्ड नहीं लगाया गया हो या डिफॉल्ट पासवर्ड अभी भी सक्रिय हो, तो ब्लूटूथ रेंज के भीतर मौजूद कोई व्यक्ति उससे कनेक्ट होने की कोशिश कर सकता है।

कुछ BMS सिस्टम में Discharge Disable या Output Cut-Off जैसे फीचर मौजूद होते हैं। यदि कोई व्यक्ति अनधिकृत रूप से इन फीचर्स को सक्रिय कर दे, तो बैटरी मोटर को बिजली देना बंद कर सकती है। यही स्थिति ई-रिक्शा के अचानक रुकने का कारण बन सकती है। लेकिन यह केवल सीमित मामलों में संभव है।

सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में चल रहे सभी ई-रिक्शा इस जोखिम की श्रेणी में नहीं आते। बड़ी संख्या में ई-रिक्शा अब भी Lead Acid बैटरियों पर चलते हैं, जिनमें इस तरह का ब्लूटूथ आधारित BMS नहीं होता। वहीं कई कंपनियां Proprietary Battery Systems का उपयोग करती हैं, जिनसे सामान्य मोबाइल ऐप कनेक्ट ही नहीं कर सकता। इसलिए यह कहना कि देश के सभी ई-रिक्शा मोबाइल ऐप से बंद किए जा सकते हैं, गलत और भ्रामक है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि सबसे ज्यादा खतरा उन सस्ती लिथियम बैटरियों में होता है जिनमें सुरक्षा फीचर कमजोर होते हैं। जिन बैटरियों में ब्लूटूथ हमेशा ऑन रहता है, डिफॉल्ट पासवर्ड नहीं बदला गया होता या सुरक्षा लेयर कमजोर होती है, उनमें जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा रहता है। ऐसी बैटरियां गलत हाथों में पड़ने पर परेशानी पैदा कर सकती हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल अधिकांश वीडियो की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई तकनीकी जानकारों का कहना है कि इंटरनेट पर वायरल होने वाले कई वीडियो पहले से तैयार किए गए सेटअप पर आधारित हो सकते हैं। कुछ वीडियो प्रैंक कंटेंट या रील्स के रूप में बनाए गए हो सकते हैं, जिनका उद्देश्य केवल दर्शकों को आकर्षित करना होता है। इसलिए हर वायरल वीडियो को वास्तविक घटना मान लेना उचित नहीं है।

ई-रिक्शा चालकों के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बेहद उपयोगी हो सकती हैं। यदि वाहन में Bluetooth आधारित Lithium Battery लगी है, तो सबसे पहले BMS का डिफॉल्ट पासवर्ड बदलना चाहिए। जरूरत न होने पर ब्लूटूथ को बंद रखना बेहतर है। केवल अधिकृत मोबाइल ऐप का ही उपयोग करना चाहिए और समय-समय पर बैटरी फर्मवेयर अपडेट करवाना चाहिए। साथ ही विश्वसनीय निर्माता की बैटरी खरीदना भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

नई बैटरी खरीदते समय चालकों को कुछ सवाल जरूर पूछने चाहिए। जैसे—क्या बैटरी में ब्लूटूथ है, क्या पासवर्ड प्रोटेक्शन उपलब्ध है, क्या डिफॉल्ट पासवर्ड बदला जा सकता है, क्या सिक्योरिटी अपडेट मिलते हैं और निर्माता साइबर सुरक्षा सपोर्ट देता है या नहीं। इन सवालों के जवाब भविष्य में बड़ी समस्या से बचा सकते हैं।

प्रशासन की भूमिका भी इस मामले में अहम मानी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी चलते वाहन को रोकने की कोशिश करता है, तो यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसी स्थिति में साइबर पुलिस, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन को शिकायत मिलने पर तत्काल जांच करनी चाहिए। साथ ही बैटरी निर्माताओं के लिए न्यूनतम साइबर सुरक्षा मानक तय किए जाने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।

ई-रिक्शा चालक रोज कमाने-खाने वाले लोग होते हैं। यदि वाहन बीच रास्ते में अचानक बंद हो जाए तो उनकी दिनभर की कमाई प्रभावित होती है। यात्रियों का भरोसा कम होता है और सड़क दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है। यही कारण है कि BAT-BMS ऐप को लेकर भय का माहौल बना हुआ है।

निष्कर्ष रूप में देखा जाए तो BAT-BMS ऐप स्वयं कोई खतरनाक टूल नहीं है। असली समस्या कमजोर सुरक्षा वाले Bluetooth आधारित Battery Management Systems में है। केवल कुछ असुरक्षित लिथियम बैटरियां ही इस तरह के जोखिम की श्रेणी में आती हैं। मजबूत पासवर्ड, सुरक्षित BMS और भरोसेमंद बैटरी का उपयोग ही इस संभावित खतरे से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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