
पटना सिटी, पटना सिटी के सबलपुर स्थित विष्णु मंदिर में कमेटी को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। धार्मिक न्यास पर्षद के आदेश के बावजूद पुराने और नए सदस्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। मामला अब पटना हाई कोर्ट पहुंच चुका है, जहां इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।
मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भी नहीं बनी सहमति
शुक्रवार को मंदिर परिसर में कमेटी की अहम बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में अनुमंडलाधिकारी द्वारा नियुक्त दंडाधिकारी सुनील कुमार की मौजूदगी में कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होनी थी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी किए गए थे ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
धार्मिक न्यास पर्षद के निर्देशानुसार नवनियुक्त सचिव बंगाली सिंह और कोषाध्यक्ष को कार्यभार संभालना था। इसके तहत मंदिर से जुड़े दस्तावेजों और जिम्मेदारियों का औपचारिक हस्तांतरण होना था, लेकिन बैठक के दौरान पुराने सदस्यों के विरोध के कारण माहौल गरमा गया और पूरी प्रक्रिया ठप पड़ गई।
पुराने सदस्यों का इनकार, लगाए गंभीर आरोप
मंदिर के पूर्व सचिव नरेश चंद्र ने नए पदाधिकारियों को कार्यभार सौंपने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि धार्मिक न्यास पर्षद को गलत जानकारी देकर यह आदेश जारी कराया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और नियमों की अनदेखी की गई है। नरेश चंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अब अदालत के निर्णय का इंतजार किया जाएगा।
नए सदस्यों की मांग: आदेश का हो पालन
दूसरी ओर, नवनियुक्त सचिव बंगाली सिंह ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक न्यास पर्षद के आदेश का पालन हर हाल में होना चाहिए और उन्हें विधिवत रूप से कार्यभार दिलाया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने सदस्य जानबूझकर प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं और प्रशासन को इस पर सख्त कदम उठाना चाहिए।
प्रशासन की भूमिका और अगला कदम
दंडाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि बैठक के दौरान उत्पन्न स्थिति और पुराने सदस्यों के विरोध की जानकारी धार्मिक न्यास पर्षद को दे दी जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि आगे की कार्रवाई पर्षद और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
हाई कोर्ट में टिकी नजरें
अब यह पूरा विवाद न्यायालय के पाले में पहुंच चुका है। पटना हाई कोर्ट इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला करेगा, जिससे मंदिर कमेटी के भविष्य की दिशा तय होगी।
धार्मिक संस्थानों में बढ़ते विवाद पर सवाल
यह मामला एक बार फिर धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन को लेकर उठने वाले विवादों को उजागर करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और स्पष्ट प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
फिलहाल, सबलपुर विष्णु मंदिर का यह विवाद न सिर्फ स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि अब कानूनी मोड़ लेने के बाद पूरे इलाके की नजरें हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।


