​भागलपुर में बालू माफिया के ‘डिजिटल कवच’ पर प्रहार: पीरपैंती में पुलिस को ट्रैक करने वाला ‘पासिंग गिरोह’ धराया, व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए चलता था अवैध ट्रकों का खेल

भागलपुर/पीरपैंती। बिहार के भागलपुर जिले का पीरपैंती इलाका, जो अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण पड़ोसी राज्य झारखंड की सीमा से सटा हुआ है, लंबे समय से अवैध बालू उत्खनन और ओवरलोड ट्रकों की तस्करी का ‘हब’ बना हुआ है। लेकिन इस बार भागलपुर पुलिस ने केवल ट्रकों को पकड़ने की रस्म अदायगी नहीं की, बल्कि उस ‘अदृश्य और तकनीकी नेटवर्क’ को ध्वस्त कर दिया है जो पुलिस की हर हरकत पर साये की तरह नजर रखता था। पीरपैंती थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे हाई-टेक ‘पासिंग गिरोह’ का भंडाफोड़ किया है, जो व्हाट्सएप और मोबाइल तकनीक का इस्तेमाल कर अवैध कारोबार को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) मुहैया करा रहा था। 3 अप्रैल 2026 की रात साधु मड़िया फोरलेन रोड स्थित हीरानंद मोड़ के पास हुई यह छापेमारी पुलिस की रणनीतिक जीत मानी जा रही है। सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह ने शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में इस पूरे गोरखधंधे की परतों को खोलते हुए बताया कि किस तरह अपराधी तकनीक को अपनी ढाल बनाकर कानून की आंखों में धूल झोंक रहे थे।

पुलिस का ‘पीछा’ करते अपराधी: हीरानंद मोड़ पर फिल्मी अंदाज में गिरफ्तारी

​इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 अप्रैल की रात को हुई, जब पीरपैंती थानाध्यक्ष पंकज राउत और पुलिस अवर निरीक्षक आमोद कुमार ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम नियमित गश्ती पर निकली थी। गश्ती के दौरान पुलिस टीम ने गौर किया कि साधु मड़िया फोरलेन रोड पर कुछ चारपहिया वाहन (एक कार और एक स्कॉर्पियो) लगातार पुलिस की गाड़ी का पीछा कर रहे हैं। जैसे ही पुलिस की गाड़ी अपनी रफ़्तार धीमी करती या मुड़ती, ये वाहन भी अपनी स्थिति बदल लेते।

​पुलिस को इन वाहनों पर गहरा संदेह हुआ और जब उन्हें रोकने का प्रयास किया गया, तो वे तेजी से भागने लगे। पुलिस ने घेराबंदी कर हीरानंद मोड़ के पास इन वाहनों को रोका और उनमें सवार चार लोगों को हिरासत में लिया। जब इनसे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो जो सच सामने आया उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। पकड़े गए लोग कोई सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि पुलिस की ‘लोकेशन ट्रेस’ करने वाले विशेषज्ञ थे। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने झारखंड की सीमा से सटे मिर्जाचौकी क्षेत्र में एक और वाहन को रोका और गिरोह के तीन अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।

मास्टरमाइंड अभिषेक और ‘पासिंग’ का काला साम्राज्य

​इस पूरे गिरोह का सरगना पीरपैंती के लकड़ाकोल निवासी अभिषेक कुमार उर्फ चंदन कुमार यादव है। सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह के अनुसार, अभिषेक का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी कई संगीन मामलों में संलिप्त पाया गया है। उसके खिलाफ पीरपैंती थाने में दो और शिवनारायणपुर थाने में एक मामला पहले से दर्ज है। अभिषेक ने ही इस ‘पासिंग गिरोह’ का ताना-बाना बुना था।

गिरफ्तार आरोपियों की सूची:

  1. अभिषेक कुमार उर्फ चंदन यादव (सरगना): लकड़ाकोल, पीरपैंती (भागलपुर)
  2. शुभम: नीमगाछी, मिर्जाचौकी (साहेबगंज, झारखंड)
  3. बजरंगी भगत: गांधी नगर, मिर्जाचौकी (साहेबगंज, झारखंड)
  4. नीतीश कुमार: मरैया (खगड़िया)
  5. धर्मदेव पंडित: फौजदारी, पीरपैंती (भागलपुर)
  6. नंदजी यादव: लकड़ाकोल, पीरपैंती (भागलपुर)
  7. अहमद रजा: राजगंज, पीरपैंती (भागलपुर)

​पुलिस ने इनके पास से 1,30,500 रुपये नकद, एक कार, एक स्कॉर्पियो और सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह नगदी उस वसूली का हिस्सा है जो ट्रक मालिकों से ‘सुरक्षित पासिंग’ के नाम पर ली गई थी।

60 सदस्यों वाला व्हाट्सएप ग्रुप: डिजिटल युग की नई अपराध शैली (विशेष विश्लेषण)

​द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, पीरपैंती का यह गिरोह ‘डिजिटल इंटेलिजेंस’ (Digital Intelligence) का उपयोग कर एक समानांतर खुफिया तंत्र चला रहा था। पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आई है कि यह पूरा गिरोह एक खास व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए संचालित हो रहा था, जिसमें कुल 60 सदस्य जुड़े हुए थे।

गिरोह की कार्यप्रणाली:

  • लोकेशन साझा करना: गिरोह के सदस्य अलग-अलग चारपहिया और दुपहिया वाहनों में तैनात रहते थे। जैसे ही पुलिस की गश्ती गाड़ी निकलती, ग्रुप में ‘वॉइस मैसेज’ या ‘लोकेशन’ भेज दी जाती थी। कोड वर्ड में पुलिस की स्थिति बताई जाती थी।
  • सुरक्षित मार्ग का चयन: पुलिस की लोकेशन के आधार पर ओवरलोड और अवैध बालू लदे ट्रकों को उन रास्तों पर मोड़ दिया जाता था जहाँ पुलिस की तैनाती नहीं होती थी।
  • वसूली का मॉडल: गिरोह के सदस्य वाहन मालिकों से मासिक (Monthly) या दैनिक (Daily) आधार पर मोटी रकम वसूलते थे। जो ट्रक मालिक पैसे नहीं देते थे, उनकी जानकारी ये लोग पुलिस को दे देते थे, ताकि केवल उन्हीं ट्रकों पर कार्रवाई हो जो इनके नेटवर्क का हिस्सा नहीं हैं।
  • झारखंड-बिहार कनेक्शन: चूंकि पीरपैंती और मिर्जाचौकी के बीच सीमा साझा होती है, अपराधी एक राज्य की पुलिस से बचने के लिए तुरंत दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश कर जाते थे।

प्रशासनिक चुनौती: 60 सदस्यों की कुंडली खंगाल रही पुलिस

​सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि 7 लोगों की गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत है। पुलिस अब उस व्हाट्सएप ग्रुप के सभी 60 सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। इनमें से कई सदस्य सफेदपोश व्यवसायी या अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोग हो सकते हैं जो परदे के पीछे रहकर इस अवैध कारोबार को संरक्षण दे रहे थे। जब्त किए गए सात मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है ताकि डिलीट किए गए डेटा और पुराने मैसेज को रिकवर किया जा सके।

​पुलिस की इस कार्रवाई ने बालू माफिया के उस नेटवर्क को तगड़ी चोट पहुँचाई है जो सरकारी राजस्व को हर महीने करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे थे। अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारण न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि फोरलेन सड़कों की हालत भी समय से पहले खराब हो रही है।

तकनीक का दुरुपयोग और पुलिस की मुस्तैदी

​एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो पीरपैंती की यह घटना यह दर्शाती है कि अपराधी अब पारंपरिक हथियारों से अधिक तकनीकी हथियारों पर भरोसा कर रहे हैं। जब पुलिस हाई-टेक हो रही है, तो अपराधी भी पुलिस की ही तकनीक का इस्तेमाल पुलिस के खिलाफ कर रहे हैं।

  • सकारात्मक पक्ष: पीरपैंती पुलिस की गश्ती टीम ने जिस सूझबूझ से यह पकड़ा कि कोई उनका पीछा कर रहा है, वह प्रशंसनीय है। पंकज राउत और आमोद कुमार ठाकुर की तत्परता ने एक बड़े नेटवर्क को उजागर कर दिया।
  • नकारात्मक पक्ष: व्हाट्सएप ग्रुप में 60 लोगों का जुड़ना और लंबे समय तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकना यह बताता है कि स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र (Local Intelligence) को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

समाधान की दिशा में बढ़ते कदम

​भागलपुर पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक केस का उद्भेदन नहीं है, बल्कि यह उन सभी तत्वों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अवैध बालू और ओवरलोडिंग के खेल में शामिल हैं। सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पीरपैंती के लकड़ाकोल से लेकर झारखंड के मिर्जाचौकी तक फैले इस सिंडिकेट के टूटने से क्षेत्र में अवैध परिवहन पर लगाम लगने की उम्मीद है।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। 1,30,500 रुपये की बरामदगी यह साबित करती है कि यह एक संगठित अपराध (Organized Crime) था, जिसमें धन और तकनीक का बड़ा समावेश था। अब देखना यह होगा कि क्या पुलिस उन 60 नामों तक पहुँच पाएगी जो इस ग्रुप में शामिल होकर ‘सुरक्षित पासिंग’ के इस अवैध धंधे को हवा दे रहे थे।

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