
बिहार के नवादा जिले में जदयू विधायक विभा देवी के बेटे की मौत का मामला अब तूल पकड़ चुका है। परिजनों की शिकायत के आधार पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में भारी लापरवाही और पैसों के लालच में जान जोखिम में डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
सड़क हादसे के बाद अस्पताल पहुंचा था मरीज
जानकारी के अनुसार, 19 मार्च 2026 को एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद 41 वर्षीय अखिलेश कुमार को नवादा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का दावा है कि अस्पताल पहुंचने के समय वह होश में थे और बातचीत भी कर रहे थे।
प्रारंभिक जांच में उनके शरीर के अंदर गंभीर चोट और खून के थक्के (ब्लड क्लॉट) की पुष्टि हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद इलाज की प्रक्रिया में देरी होने का आरोप लगाया गया है।
7 घंटे तक अस्पताल में रोके रखने का आरोप
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, इसके बावजूद मरीज को लगभग 7 घंटे तक वहीं रोके रखा गया।
आरोप है कि समय पर उचित इलाज या बड़े अस्पताल के लिए रेफर नहीं किया गया, जिससे उनकी हालत बिगड़ती चली गई।
वेंटिलेटर एम्बुलेंस नहीं मिलने से बढ़ी मुश्किल
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि जब मरीज की स्थिति गंभीर हुई और उसे रेफर किया गया, तब अस्पताल वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस उपलब्ध कराने में भी विफल रहा।
काफी देर बाद बाहर से एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई और मरीज को पटना ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
मुफस्सिल थाना पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304A (लापरवाही से मौत) सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।
जांच के दौरान पुलिस ने अस्पताल से CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, एक्स-रे रिपोर्ट और रेफरल से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल के बाहर प्रदर्शन, बढ़ा राजनीतिक दबाव
घटना के बाद स्थानीय लोगों और समर्थकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करते हुए लोगों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
विधायक विभा देवी और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
नवादा का यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता मानी जाएगी।
अब सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी।


