सबौर कृषि विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप: सांसद सुधाकर सिंह ने उठाए नियुक्ति, शोध और वित्तीय अनियमितताओं के सवाल

पटना/भागलपुर: बिहार की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने भागलपुर स्थित सबौर कृषि विश्वविद्यालय को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान दस्तावेजों के साथ दावा किया कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों से लेकर शोध और वित्तीय मामलों तक बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं।

नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियों का आरोप
सांसद का कहना है कि कृषि विज्ञान केंद्र में सीमित पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था, लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी करते हुए अतिरिक्त नियुक्तियां कर दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
सुधाकर सिंह ने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय में बाहरी राज्यों के लोगों की संख्या असामान्य रूप से अधिक है, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है।

सरकारी निर्देशों की अनदेखी का दावा
सांसद ने कहा कि राज्य में विश्वविद्यालयों की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए स्पष्ट नियम तय हैं, जिनके तहत चयन आयोग या निर्धारित संस्थाओं के माध्यम से नियुक्तियां होनी चाहिए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय स्तर पर सीधे नियुक्ति किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित विभाग द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

परिवारवाद और हितों के टकराव के आरोप
सुधाकर सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, कुलपति के करीबी परिजनों को संस्थान से जुड़े प्रोजेक्ट्स और पदों में लाभ पहुंचाया गया।
सांसद ने दावा किया कि कुछ मामलों में वेतन और नियुक्ति से जुड़े निर्णय भी पारदर्शी तरीके से नहीं लिए गए।

शोध और पेटेंट पर उठे सवाल
सांसद ने विश्वविद्यालय में शोध कार्यों और पेटेंट को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने कहा कि अल्प अवधि में बड़ी संख्या में पेटेंट दर्ज कराए जाने के पीछे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है।
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि शोध और अन्य मदों के लिए आवंटित सरकारी धन के उपयोग में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई।

उपकरण खरीद में गड़बड़ी का आरोप
सुधाकर सिंह ने विदेशी उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, उपकरणों की खरीद के दौरान तय शर्तों का पालन नहीं किया गया और बिना आवश्यक प्रक्रियाओं के भुगतान कर दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि कई उपकरण उपयोग में नहीं हैं और संसाधनों की बर्बादी हो रही है।

जांच और कार्रवाई की मांग
सांसद ने राज्यपाल से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य की कृषि शिक्षा और शोध व्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
इन आरोपों के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि इन गंभीर आरोपों पर प्रशासन क्या सफाई देता है और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।

सबौर कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े ये आरोप बिहार की शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करते हैं। अब सभी की नजर संभावित जांच और उसके परिणामों पर टिकी है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

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