
फर्जी कागजात, फायरिंग और कब्जे की कोशिश का मामला; पुलिस की कार्रवाई से मचा हड़कंप
पटना/गोपालगंज, 3 अप्रैल: बिहार के गोपालगंज जिले में जमीन कब्जाने वाले एक कथित गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में जबरन कब्जे और फायरिंग के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक स्थानीय विधायक और उनके भाई के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज होने से सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
फायरिंग और कब्जे की कोशिश से खुला मामला
जानकारी के अनुसार, घटना 1 अप्रैल की है जब मीरगंज थाना क्षेत्र के निवासी जितेंद्र कुमार राय अपनी जमीन पर लगी फसल देखने बेलवा गांव पहुंचे थे। इसी दौरान आरोप है कि भोला पांडेय उर्फ राकेश पांडेय अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और जमीन खाली करने का दबाव बनाने लगा।
विरोध करने पर आरोपियों ने कथित रूप से फायरिंग शुरू कर दी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पीड़ित किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकले और पुलिस को सूचना दी।
चार आरोपी गिरफ्तार, हथियार बरामद
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों—भोला पांडेय, गुड्डू कुमार, दीपक कुमार और नीतीश कुमार—को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से हथियार और मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच से कई अहम सुराग मिले हैं।
विधायक और उनके भाई पर केस
इस मामले में कुचायकोट क्षेत्र के एक विधायक और उनके भाई के खिलाफ भी गंभीर आरोपों के आधार पर केस दर्ज किया गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
फर्जी कागजात बनाकर कब्जे का खेल
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर ग्रामीणों की जमीन हड़पने का काम करता था। पहले नकली कागजात तैयार किए जाते थे, फिर उसी आधार पर रजिस्ट्री और जमाबंदी कराकर जमीन पर कब्जा कर लिया जाता था।
इसके बाद दबंगई और हथियारों के बल पर पीड़ितों को डराकर जमीन अपने कब्जे में ले ली जाती थी।
ED जांच की तैयारी, मनी लॉन्ड्रिंग एंगल पर फोकस
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आर्थिक पहलुओं की भी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने साइबर और आर्थिक जांच इकाइयों को आरोपियों की संपत्तियों की जांच का निर्देश दिया है। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि अवैध संपत्ति की जांच और जब्ती की कार्रवाई हो सके।
गरीबों को बनाते थे निशाना
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह खासतौर पर गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाता था। उन्हें कम कीमत पर जमीन बेचने के लिए मजबूर किया जाता था और बाद में उसी जमीन को ऊंचे दाम पर बेचकर मुनाफा कमाया जाता था।
पुलिस की अपील और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी की जमीन पर इस तरह कब्जा किया गया है, तो वे आगे आकर शिकायत दर्ज कराएं। सभी मामलों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


