
न्यूज डायरी: विकास की राह पर ‘फिस्कल टाइगर’ बनकर उभरा बिहार
- ऐतिहासिक आंकड़ा: वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार ने जीएसटी, वैट और अन्य करों को मिलाकर कुल 43,324.79 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है।
- विकास की दर: पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) के मुकाबले राजस्व में 4.09 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
- जीएसटी की ताकत: अकेले वस्तु एवं सेवा कर (GST) के मद में 32,077.22 करोड़ रुपये का शुद्ध संग्रह हुआ है।
- राष्ट्रीय स्तर पर चमक: बिहार में जीएसटी ग्रोथ रेट 9.20% रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 6% है। बिहार विकास दर में देश में चौथे स्थान पर है।
- मार्च का धमाका: केवल मार्च 2026 में बिहार ने जीएसटी संग्रह में 13% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत (5%) से लगभग तीन गुना अधिक है।
- निबंधन का रिकॉर्ड: जमीन और संपत्तियों के निबंधन से 8,403.46 करोड़ रुपये की आय हुई, जो तय लक्ष्य का 101.86% है।
- VOB इनसाइट: बिहार के बारे में अक्सर यह धारणा रही है कि यह एक उपभोक्ता राज्य है और राजस्व के लिए पूरी तरह केंद्र पर निर्भर है। लेकिन 2025-26 के ये आंकड़े एक नई कहानी बयां कर रहे हैं। टैक्स की दरों में कमी और विधानसभा चुनावों की व्यस्तता के बावजूद राजस्व में यह उछाल प्रशासनिक दक्षता और राज्य के भीतर बढ़ते आर्थिक लेन-देन का प्रमाण है। जब राष्ट्रीय औसत 6% हो और बिहार 9.20% की रफ्तार से कर संग्रह करे, तो इसका सीधा मतलब है कि राज्य का बाजार तेजी से ‘ऑर्गनाइज्ड सेक्टर’ की ओर बढ़ रहा है। निबंधन विभाग द्वारा 31 मार्च को एक ही दिन में 100 करोड़ से अधिक का राजस्व जुटाना यह बताता है कि बिहार की रियल एस्टेट इकॉनमी में भी नई जान आई है। यह धन राज्य के बुनियादी ढांचे, सड़कों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक मजबूत नींव साबित होगा।
पटना | 2 अप्रैल, 2026
बिहार की वित्तीय सेहत को लेकर गुरुवार को पटना के ‘कर भवन’ से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे न केवल उत्साहजनक हैं बल्कि राज्य की आर्थिक क्षमता पर मुहर लगाते हैं। वाणिज्य कर विभाग के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह ने एक विशेष संवाददाता सम्मेलन के दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों का कच्चा-चिट्ठा पेश किया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, बिहार अब देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जो कर अनुपालन (Tax Compliance) और राजस्व प्रबंधन में राष्ट्रीय मानकों को चुनौती दे रहे हैं।
राजस्व का ‘सुपर’ कलेक्शन: 43 हजार करोड़ के पार
वित्तीय वर्ष 2025-26 बिहार के लिए ‘राजस्व क्रांति’ का वर्ष साबित हुआ है। विभाग द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, कुल राजस्व संग्रह 43,324.79 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह राशि पिछले वर्ष के 41,623.96 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है। मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि तब हासिल हुई है जब कई उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी के स्लैब (दरों) में कटौती की गई थी।
राजस्व का यह ढांचा मुख्य रूप से चार श्रेणियों पर टिका है: वस्तु एवं सेवा कर (GST), पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट (VAT), बिजली शुल्क और व्यावसायिक कर (Profession Tax)। इन चारों मोर्चों पर विभाग ने संतुलित और आक्रामक कार्यशैली अपनाई, जिसके परिणामस्वरूप नकद संग्रह (Cash Collection) में बिहार, कर्नाटक के बाद देश में दूसरे स्थान पर काबिज हुआ है।
जीएसटी का ‘बिहार मॉडल’: राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ा
बिहार की इस आर्थिक सफलता की रीढ़ ‘जीएसटी’ रहा है। सचिव संजय कुमार सिंह ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने कुल 32,801 करोड़ रुपये का जीएसटी जुटाया था। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा आईजीएसटी (IGST) बैलेंस में 724 करोड़ रुपये की कटौती के बाद राज्य का शुद्ध जीएसटी संग्रह 32,077.22 करोड़ रुपये रहा।
हैरानी की बात यह है कि इस कटौती के बावजूद बिहार की जीएसटी वृद्धि दर 9.20 प्रतिशत रही। इसकी तुलना यदि राष्ट्रीय स्तर के 6 प्रतिशत से की जाए, तो बिहार की प्रगति स्पष्ट नजर आती है। विशेष रूप से मार्च 2026 के आंकड़ों ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। पिछले साल मार्च की तुलना में इस बार बिहार में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि देश के अन्य हिस्सों में यह औसत केवल 5 प्रतिशत पर सिमट गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बिहार में कर चोरी पर लगाम लगी है और व्यापारियों के बीच जीएसटी फाइलिंग को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
गैर-जीएसटी स्रोत: पेट्रोल और बिजली का योगदान
जीएसटी के अलावा भी राज्य की झोली भरने में अन्य मदों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वाणिज्य कर विभाग ने गैर-जीएसटी स्रोतों से कुल 11,247.57 करोड़ रुपये की आय अर्जित की।
गैर-जीएसटी राजस्व का विवरण:
- पेट्रोलियम (वैट): डीजल और पेट्रोल की बिक्री पर वैट के रूप में राज्य को 10,037.38 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह राज्य के राजस्व का एक बड़ा और स्थिर हिस्सा है।
- बिजली शुल्क: बिजली की खपत पर लगने वाले शुल्क से 983.81 करोड़ रुपये की आय हुई।
- पेशा कर (Profession Tax): नियोजित व्यक्तियों और पेशेवरों से 226.38 करोड़ रुपये का संग्रह किया गया। विभाग का मानना है कि पेशा कर के कुछ और आंकड़े आने शेष हैं, जिससे यह राशि और बढ़ सकती है।
निबंधन विभाग का ‘शत-प्रतिशत’ से अधिक प्रदर्शन
बिहार के राजस्व में जमीन और मकानों की रजिस्ट्री का हमेशा से बड़ा योगदान रहा है। बिजेंद्र प्रसाद यादव ने निबंधन विभाग की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8,250 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था। विभाग ने इस लक्ष्य को भेदते हुए 8,403.46 करोड़ रुपये का संग्रह किया, जो लक्ष्य का 101.86 प्रतिशत है।
पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस मद में 754.58 करोड़ रुपये (लगभग 9.86%) की सीधी वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन यानी 31 मार्च को तो मानो रजिस्ट्री कार्यालयों में मेला लगा रहा। केवल एक दिन में 14,905 दस्तावेजों का निबंधन हुआ, जिससे राज्य सरकार को 107.74 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व प्राप्त हुआ। यह बताता है कि बिहार में संपत्ति में निवेश की भूख अभी कम नहीं हुई है।
तुलनात्मक चार्ट: राजस्व संग्रह 2024-25 vs 2025-26
मद (Category) | वित्त वर्ष 2024-25 | वित्त वर्ष 2025-26 | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
कुल राजस्व (Total Revenue) | ₹41,623.96 Cr | ₹43,324.79 Cr | 4.09% |
जीएसटी संग्रह (GST) | ₹29,374 Cr (अनुमानित) | ₹32,077.22 Cr | 9.20% |
निबंधन (Registration) | ₹7,648.88 Cr | ₹8,403.46 Cr | 9.86% |
पेट्रोल पर वैट (VAT) | ₹9,500 Cr (अनुमानित) | ₹10,037.38 Cr | 5.6% |


