
- बिहार के पूर्णिया जिले से मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जहाँ एक युवती जिसे अपनी मोहब्बत पर अटूट विश्वास था, उसे उसके ही प्रेमी ने चंद रुपयों के लालच में एक अधेड़ व्यवसायी के हाथों नीलाम कर दिया।
- विश्वासघात की यह पटकथा 13 महीने पहले लिखी गई थी, जब शादी का झांसा देकर घर से निकली युवती को गुलाबबाग के रसूखदार व्यवसायी प्रह्लाद कुमार जायसवाल के घर ‘बंधक’ बनाकर सौंप दिया गया।
- पिछले 400 से अधिक दिनों तक वह युवती एक अंधेरे कमरे में कैद रही, जहाँ आरोपी व्यवसायी प्रह्लाद जायसवाल लगातार उसकी अस्मत से खिलवाड़ करता रहा और विरोध करने पर जान से मारने की धमकियां देता रहा।
- भवानीपुर पुलिस ने जब सुराग मिलने के बाद गुलाबबाग स्थित व्यवसायी के ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देख अधिकारियों के होश उड़ गए; युवती की रिहाई के साथ-साथ पुलिस को वहां हथियारों का जखीरा और ‘ब्लैक मनी’ का बड़ा भंडार मिला है।
- पुलिस ने मौके से एक देसी कट्टा, दो रिवॉल्वर, 157 जिंदा कारतूस, भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर और करीब 6 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं, जिसके बाद अब आयकर विभाग (Income Tax) भी इस जांच में कूद पड़ा है।
पूर्णिया (द वॉयस ऑफ बिहार)।
इश्क का कत्ल और गुलामी की जंजीरें: पूर्णिया की वह ‘अदृश्य’ त्रासदी
सीमांचल के हृदय स्थल पूर्णिया में कानून और नैतिकता की धज्जियां उड़ाने वाला एक ऐसा मामला उजागर हुआ है, जिसने आधुनिक समाज में ‘मानव तस्करी’ (Human Trafficking) के डरावने स्वरूप को सामने ला दिया है। एक युवती, जिसने अपने प्रेमी के साथ सुखी संसार के सपने देखे थे, उसे क्या पता था कि उसका हमसफर ही उसका ‘कसाई’ बन जाएगा। यह कहानी केवल एक अपराध की नहीं है, बल्कि उस मानसिक प्रताड़ना की है जिसे एक युवती ने 13 महीनों तक एक बंद कमरे की चहारदीवारी के भीतर झेला। गुलाबबाग जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र में, जहाँ दिन भर हजारों लोगों की आवाजाही होती है, वहां एक व्यवसायी के घर में एक लड़की को ‘गुलाम’ बनाकर रखा गया और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई।
शादी का झांसा और ‘बाजार’ में बिकती अस्मत
पुलिस की सघन तफ्तीश में जो तथ्य छनकर सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। करीब 13 महीने पहले, पीड़िता अपने प्रेमी के साथ जीवन बिताने के वादे पर घर की दहलीज लांघकर निकली थी। उसे लगा था कि वह एक नई शुरुआत कर रही है, लेकिन उसका प्रेमी उसे सीधे गुलाबबाग ले गया। वहां अनाज और अन्य व्यवसायों की आड़ में अपनी साख बनाने वाले प्रह्लाद कुमार जायसवाल से उसकी ‘डीलिंग’ पहले ही हो चुकी थी। प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को एक वस्तु की तरह प्रह्लाद के हाथों बेच दिया और खुद पैसे लेकर रफूचक्कर हो गया। इसके बाद शुरू हुआ पीड़िता के जीवन का वह काला अध्याय, जिसमें सूरज की रोशनी भी उसके लिए पराई हो गई।
13 महीने का ‘कैदखाना’: हवस और खौफ के बीच सिसकती जिंदगी
व्यवसायी प्रह्लाद जायसवाल के घर में युवती को एक कैदी की तरह रखा गया था। उसे घर के किसी भी सदस्य या बाहरी व्यक्ति से बात करने की अनुमति नहीं थी। प्रह्लाद उसे अपनी हवस का शिकार बनाता रहा और उसे डराकर रखा गया कि अगर उसने भागने या शोर मचाने की कोशिश की, तो उसके परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। 13 महीनों तक वह युवती हर रोज तिल-तिल कर मरती रही। बदनामी के डर और पुख्ता जानकारी के अभाव में युवती का परिवार भी लंबे समय तक खामोश रहा, लेकिन जब उन्हें अपनी बेटी के गुलाबबाग में होने का ठोस सुराग मिला, तो उन्होंने 31 मार्च को भवानीपुर थाने में अपनी गुहार लगाई।
पुलिसिया दबिश: जब व्यवसायी का घर बना ‘हथियारों का डिपो’
पूर्णिया एसपी स्वीटी सहरावत के निर्देश पर जब पुलिस की विशेष टीम ने गुलाबबाग स्थित प्रह्लाद जायसवाल के आवास पर धावा बोला, तो पुलिस को केवल एक पीड़ित युवती ही नहीं मिली, बल्कि वहां अपराध और अवैध संपत्तियों का एक पूरा साम्राज्य दिखाई दिया। युवती को एक गुप्त कमरे से सुरक्षित मुक्त कराया गया, जिसकी आंखों में 13 महीने का खौफ साफ तैर रहा था। लेकिन तलाशी के दौरान जो चीजें बरामद हुईं, उसने पुलिस को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि प्रह्लाद जायसवाल केवल एक बलात्कारी व्यवसायी नहीं, बल्कि किसी बड़े आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा है।
बरामदगी की सूची और अवैध साम्राज्य का सच
पुलिस ने प्रह्लाद जायसवाल के घर से जो सामान जब्त किया है, वह किसी पेशेवर अपराधी के ठिकाने जैसा है:
- हथियार: 1 देसी कट्टा और 2 अत्याधुनिक रिवॉल्वर।
- गोला-बारूद: 157 जिंदा कारतूस और 7 खाली खोखे (जो इस बात का प्रमाण हैं कि वहां फायरिंग की प्रैक्टिस या इस्तेमाल हुआ है)।
- नकदी: 5,80,250 रुपये नगद, जिसका कोई वैध हिसाब नहीं मिला।
- दस्तावेज: 11 बैंक पासबुक और जमीन के भारी मात्रा में कागजात, जो बेनामी संपत्ति की ओर इशारा करते हैं।
- जेवरात: भारी मात्रा में सोने और चांदी के आभूषण, जिनकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है।
आयकर विभाग की एंट्री: अब ‘काली कमाई’ का होगा हिसाब
पूर्णिया एसपी स्वीटी सहरावत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे केवल एक यौन शोषण का मामला नहीं माना है। इतनी बड़ी संख्या में बैंक पासबुक और नकदी की बरामदगी यह बताती है कि व्यवसायी बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और अवैध धन के लेन-देन में शामिल था। एसपी ने आधिकारिक रूप से आयकर विभाग (Income Tax Department) को पत्र लिखकर इन संपत्तियों की जांच करने का आग्रह किया है। 157 कारतूसों का मिलना यह भी संकेत देता है कि प्रह्लाद जायसवाल का संबंध हथियारों की तस्करी या किसी निजी सेना से हो सकता है। पुलिस अब इन कारतूसों के ‘बैच नंबर’ के जरिए इनके स्रोत तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।
फरार प्रेमी: विश्वासघात के मुख्य सूत्रधार की तलाश
भले ही मुख्य अपराधी प्रह्लाद जायसवाल जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुका है, लेकिन उस ‘कलयुगी प्रेमी’ की गिरफ्तारी अभी बाकी है जिसने इस पूरी वारदात की नींव रखी थी। पुलिस की कई टीमें उस धोखेबाज प्रेमी की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि उसने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया हो सकता है। उस पर मानव तस्करी, अपहरण और धोखाधड़ी की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का बयान कोर्ट में 164 के तहत दर्ज कराया जा रहा है, जिससे केस को और मजबूती मिलेगी।
कानूनी प्रक्रिया और सामाजिक सुरक्षा पर सवाल
पीड़िता को फिलहाल मेडिकल जांच के बाद सुरक्षा घेरे में रखा गया है। कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद उसे उसके परिजनों को सौंप दिया जाएगा। लेकिन यह घटना समाज के लिए कई सवाल छोड़ गई है। गुलाबबाग जैसे घने इलाके में 13 महीने तक एक लड़की कैद रही और पड़ोसियों को भनक तक नहीं लगी, यह हमारे सामाजिक ताने-बाने की विफलता को दर्शाता है। साथ ही, व्यवसायी वर्ग में छिपे ऐसे ‘भेड़ियों’ की पहचान करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है जो अपनी दौलत और रसूख के पीछे घिनौने अपराधों को छिपाए रखते हैं।
निष्कर्ष: न्याय की उम्मीद और कड़ा संदेश
प्रह्लाद जायसवाल की गिरफ्तारी पूर्णिया पुलिस की एक बड़ी कामयाबी है। लेकिन असली न्याय तब होगा जब उस प्रेमी को भी कड़ी सजा मिलेगी और इस व्यवसायी की अवैध संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा। एसपी स्वीटी सहरावत के नेतृत्व में पुलिस ने जिस तरह से त्वरित कार्रवाई की, उससे अपराधियों के बीच एक कड़ा संदेश गया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ की टीम पीड़ित युवती के साहस को सलाम करती है और प्रशासन से मांग करती है कि इस मामले को ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ में ले जाया जाए ताकि दोषियों को उनके किए की सजा जल्द से जल्द मिल सके। मोहब्बत के नाम पर व्यापार करने वालों और रसूख की आड़ में हवस का खेल खेलने वालों के लिए यह मामला एक नजीर बनना चाहिए।


