मधेपुरा में नशे के सौदागरों पर पुलिस का कड़ा प्रहार: पति-पत्नी मिलकर चला रहे थे गांजे का काला कारोबार, 6 किलो खेप के साथ पटना का ‘तस्कर दंपती’ गिरफ्तार

मधेपुरा (द वॉयस ऑफ बिहार)।बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बीच नशे के तस्करों ने अब मादक पदार्थों के अन्य रास्तों को अपनी काली कमाई का जरिया बना लिया है। मधेपुरा जिले के चौसा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतर-जिला गांजा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। बुधवार को की गई इस छापामारी में पुलिस ने न केवल भारी मात्रा में गांजा बरामद किया, बल्कि एक ऐसे ‘तस्कर दंपती’ को भी दबोचा है, जो परिवार की आड़ में नशे के इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे थे। पटना से मधेपुरा तक फैले इस तस्करी के जाल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब गिरफ्तारी से बचने के लिए सामाजिक और पारिवारिक ढांचों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

चौसा में ‘ऑपरेशन क्लीन’: खाकी की सक्रियता ने नाकाम की तस्करी की बड़ी साजिश

​मधेपुरा पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिले भर में चलाए जा रहे ‘नशा मुक्त बिहार’ अभियान के तहत चौसा पुलिस को एक गुप्त लेकिन बेहद सटीक सूचना मिली थी। सूचना थी कि पटना जिले से गांजे की एक बड़ी खेप मधेपुरा के ग्रामीण इलाकों में खपाने के लिए लाई जा रही है। थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया और संदिग्ध ठिकानों की घेराबंदी शुरू की गई।

​बुधवार की दोपहर जब चौसा थाना क्षेत्र के चिह्नित स्थान पर पुलिस ने छापेमारी की, तो वहां मौजूद तीन लोगों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। पुलिस को देखते ही उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। जब उनके पास मौजूद बैग और अन्य सामानों की तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। साधारण से दिखने वाले बैगों के भीतर तस्करी के लिए तैयार किया गया 6 किलो उच्च गुणवत्ता वाला गांजा बरामद हुआ।

पटना से मधेपुरा तक तस्करी का जाल: बुलंद और पार्वती के ‘काले कारनामों’ का अंत

​गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान ने पुलिस को भी चौंका दिया है। पकड़े गए तस्करों में पटना जिले के मरांची थाना क्षेत्र के जलालपुर निवासी बुलंद सिंह और उसकी पत्नी पार्वती देवी शामिल हैं। इनके साथ एक अन्य सहयोगी को भी हिरासत में लिया गया है।

तथ्य तालिका: बरामदगी और गिरफ्तारी का विवरण

| विवरण | जानकारी |

| :— | :— |

| गिरफ्तार मुख्य आरोपी | बुलंद सिंह और पार्वती देवी (पति-पत्नी) |

| निवासी | जलालपुर, मरांची, पटना |

| बरामद मादक पदार्थ | 6 किलोग्राम गांजा |

| छापेमारी का स्थान | चौसा थाना क्षेत्र, मधेपुरा |

| कार्रवाई की तारीख | 1 अप्रैल 2026 |

 

​जांच में यह बात सामने आई है कि बुलंद सिंह और उसकी पत्नी पार्वती देवी लंबे समय से इस अवैध धंधे में शामिल थे। पटना से गांजा लेकर मधेपुरा और आसपास के सीमावर्ती जिलों में सप्लाई करना इनका मुख्य पेशा बन चुका था। राजधानी से दूर ग्रामीण इलाकों में गांजे की मांग अधिक होने के कारण ये लोग यहां के छोटे डीलरों को ऊंचे दामों पर माल बेचते थे।

आखिर क्यों बढ़ रही है ‘फैमिली स्मगलिंग’? पुलिस के लिए नई चुनौती बने तस्कर दंपती

​मधेपुरा और कोसी क्षेत्र में हाल के दिनों में ‘तस्कर दंपती’ या पूरे परिवार के साथ तस्करी में शामिल होने के मामले बढ़े हैं। इसके पीछे अपराधियों की एक सोची-समझी रणनीति काम करती है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अकेले पुरुष संदिग्ध की तलाशी लेना या उस पर नजर रखना आसान होता है, लेकिन जब कोई व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्चों के साथ यात्रा कर रहा होता है, तो वह ‘संदेह के घेरे’ से बाहर रहने की कोशिश करता है।

​तस्कर दंपती का इस्तेमाल करने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • पारिवारिक आड़: पति-पत्नी के साथ होने पर पुलिस अक्सर उन्हें सामान्य यात्री समझकर छोड़ देती है।
  • महिला कार्ड का उपयोग: पार्वती देवी जैसी महिला तस्करों की मौजूदगी से पुरुष पुलिसकर्मी तुरंत तलाशी लेने में हिचकिचाते हैं, जिसका फायदा उठाकर ये लोग गांजे की खेप को शरीर में या निजी सामानों में छिपाकर ले जाते हैं।
  • भावनात्मक ढाल: गिरफ्तारी की स्थिति में बच्चे या परिवार का हवाला देकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की जाती है।

रूट और नेटवर्क: कैसे पटना का गांजा पहुँच रहा मधेपुरा के गांवों तक?

​चौसा पुलिस की पूछताछ में यह संकेत मिले हैं कि यह तस्करी एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा है। पटना का मरांची इलाका जो गंगा के दियारा क्षेत्रों से जुड़ा है, वहां से गांजे का परिवहन सड़क और रेल मार्ग, दोनों के जरिए किया जाता है। बुलंद सिंह और पार्वती देवी अक्सर बस या निजी वाहनों का उपयोग करते थे ताकि चेकिंग से बचा जा सके।

​मधेपुरा का चौसा इलाका भौगोलिक रूप से पूर्णिया, कटिहार और भागलपुर की सीमाओं के करीब है, जो इसे तस्करों के लिए एक ‘ट्रांजिट पॉइंट’ बनाता है। यहाँ से गांजे की छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर स्थानीय मेलों, हाट-बाजारों और युवाओं के बीच बेची जाती है। पुलिस अब उन स्थानीय खरीदारों की तलाश कर रही है जिन्हें यह 6 किलो गांजा डिलीवर किया जाना था।

नशे की लत और समाज पर प्रहार: मधेपुरा के युवाओं के लिए बढ़ता खतरा

​गांजे की इस तस्करी का सबसे भयावह पहलू इसका सामाजिक प्रभाव है। मधेपुरा के ग्रामीण इलाकों में गांजे और स्मैक जैसे नशों की पकड़ मजबूत होती जा रही है। सस्ती दर पर उपलब्ध होने के कारण स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र इसकी चपेट में आ रहे हैं।

​पुलिस का मानना है कि 6 किलो गांजा हजारों ‘पुड़िया’ बनाने के लिए पर्याप्त है। अगर यह खेप बाजार में पहुँच जाती, तो न जाने कितने घरों के चिराग बुझने की कगार पर पहुँच जाते। बुलंद सिंह जैसे तस्कर केवल व्यापार नहीं कर रहे, बल्कि वे एक पूरी पीढ़ी को नशे के अंधकार में धकेल रहे हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई: न्यायिक हिरासत और आगे की जांच

​चौसा थानाध्यक्ष ने बताया कि गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। बुधवार की शाम कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद उन्हें मधेपुरा व्यवहार न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

​पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाल रही है ताकि उनके मुख्य ‘आका’ तक पहुँचा जा सके। यह भी पता लगाया जा रहा है कि बुलंद सिंह ने इससे पहले कितनी बार मधेपुरा में खेप पहुँचाई है और उसके बैंक खातों में होने वाले लेन-देन का स्रोत क्या है।

निष्कर्ष: सतर्कता ही बचाव है

​मधेपुरा के चौसा में हुई यह गिरफ्तारी पुलिस की सतर्कता का प्रमाण है, लेकिन यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है। जब तस्कर ‘दंपती’ बनकर हमारे बीच घूमने लगें, तो नागरिकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नशे के इस अवैध कारोबार को केवल पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी होगी।

​बुलंद सिंह और पार्वती देवी की जेल यात्रा यह संदेश देती है कि कानून की नजर से कोई नहीं बच सकता, चाहे वह परिवार की कितनी ही बड़ी आड़ क्यों न ले ले। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ की टीम प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना करती है और पाठकों से अपील करती है कि एक नशा मुक्त समाज बनाने में अपना सहयोग दें।

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