जमुई के नागी डैम में पसरा मातम: सैर पर निकले शिक्षक पिता और मासूम बेटे की जल-समाधि, खुशियों की तलाश का खौफनाक अंत

  • ​जमुई जिले के झाझा थाना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध नागी डैम मंगलवार को एक बड़ी त्रासदी का गवाह बना, जहां सैर पर निकले एक युवा शिक्षक और उनके पांच वर्षीय मासूम बेटे की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।
  • ​मृतक की पहचान झाझा के बाराजोर गांव निवासी तौफीक अंसारी (27 वर्ष) के रूप में हुई है, जो टहवा बलियाडीह स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय (उर्दू) में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे।
  • ​तौफीक अपने पांच साल के पुत्र अहान गाजी के साथ सुबह की नमाज के बाद घर से घूमने निकले थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और पिता-पुत्र की यह जोड़ी कभी वापस नहीं लौटी।
  • ​स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की मदद से डैम के दक्षिणी हिस्से में बने एक गहरे गड्ढे से दोनों के शव बरामद किए गए, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
  • ​घटना के बाद बाराजोर गांव और शिक्षक समुदाय में मातम छाया हुआ है, वहीं स्थानीय लोगों ने डैम परिसर में खुदाई के बाद छोड़े गए जानलेवा गड्ढों को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।

झाझा, जमुई (द वॉयस ऑफ बिहार)।

सुबह की वो खामोश सैर और खौफनाक सन्नाटा

मंगलवार की वह सुबह झाझा के बाराजोर गांव के लिए किसी आम दिन की तरह ही शुरू हुई थी। तौफीक अंसारी, जो पेशे से एक समर्पित शिक्षक थे, रोज की तरह सुबह की नमाज अदा कर अपने घर लौटे थे। उनके साथ उनका पांच साल का बेटा अहान गाजी था। अहान, जो जन्म से ही बोलने में असमर्थ (मूक) था, तौफीक की आंखों का तारा था। पिता अक्सर उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर पास के सुंदर इलाकों की सैर कराते थे ताकि वह प्रकृति की खूबसूरती को निहार सके। मंगलवार की सुबह भी तौफीक ने अपनी बाइक निकाली और अहान को साथ लेकर नागी डैम की ओर निकल पड़े। किसी को क्या पता था कि पिता और पुत्र का यह साथ महज कुछ घंटों का ही बचा है और वे जिस ‘सैर’ पर जा रहे हैं, वह उनकी अंतिम यात्रा साबित होगी।

घंटों का इंतजार और अनहोनी की आशंका

जब सुबह के 10 बज गए और तौफीक वापस घर नहीं लौटे, तो परिजनों के मन में शंका होने लगी। मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जैसे-जैसे सूरज चढ़ता गया, बाराजोर गांव में बेचैनी बढ़ती गई। तौफीक के करीबी दोस्त और रिश्तेदार शफीक अंसारी, शाहिद और चांद ने मिलकर उनकी तलाश शुरू की। वे उन तमाम रास्तों पर गए जहां तौफीक अक्सर जाया करते थे। अंततः जब कोई सुराग नहीं मिला, तो भारी मन से ये लोग झाझा थाने पहुंचे ताकि उनकी गुमशुदगी की आधिकारिक रपट दर्ज कराई जा सके। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत छानबीन शुरू की और अंतिम लोकेशन व लोगों से पूछताछ के आधार पर नागी डैम की ओर रुख किया।

डैम के दक्षिणी छोर पर मिली मौत की आहट

नागी डैम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन मंगलवार को इसका पानी किसी काल से कम साबित नहीं हुआ। पुलिस और स्थानीय गोताखोरों ने डैम के किनारों पर तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद डैम के दक्षिणी हिस्से में एक जगह तौफीक की मोटरसाइकिल और कुछ निजी सामान लावारिस हालत में मिले। इस बरामदगी ने अनहोनी की आशंका को पुख्ता कर दिया। गोताखोरों ने जब पानी के भीतर गोता लगाया, तो एक-एक कर पिता और पुत्र के बेजान शरीर बाहर आए। शवों को देखते ही वहां मौजूद परिजनों की चीख-पुकार से पूरा डैम परिसर दहल उठा। जिस मासूम अहान को तौफीक ने दुनिया दिखाने का वादा किया था, वह अपने पिता की बाहों में ही हमेशा के लिए सो चुका था।

खुदाई का वो जानलेवा गड्ढा: लापरवाही ने ली दो जानें

झाझा थानाध्यक्ष ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शवों की बरामदगी डैम के उस हिस्से से हुई है जहां हाल ही में खुदाई की गई थी। बताया जाता है कि मिट्टी निकालने या किसी निर्माण कार्य के लिए वहां एक गहरा गड्ढा बन गया था, जो डैम के पानी के कारण ऊपर से दिखाई नहीं दे रहा था। आशंका जताई जा रही है कि सैर के दौरान तौफीक या उनका बेटा अनजाने में उस गहरे गड्ढे के करीब चले गए होंगे और पैर फिसलने के कारण दोनों गहरे पानी में समा गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि डैम परिसर में इस तरह की खुदाई के बाद गड्ढों को खुला छोड़ देना और वहां कोई चेतावनी बोर्ड न लगाना एक आपराधिक लापरवाही है। तौफीक जैसे युवा और जानकार व्यक्ति का इस तरह से दुर्घटना का शिकार होना सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शिक्षा जगत में शोक: एक योग्य शिक्षक का असमय जाना

तौफीक अंसारी केवल एक पिता ही नहीं थे, बल्कि वे टहवा बलियाडीह स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय (उर्दू) के एक प्रिय शिक्षक भी थे। उनके सहकर्मियों और छात्रों के लिए यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी। तौफीक को उनके मिलनसार स्वभाव और शिक्षण के प्रति उनके जुनून के लिए जाना जाता था। स्कूल के प्रधान शिक्षक और अन्य सहयोगियों ने बताया कि वे न केवल बच्चों को पढ़ाते थे, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। एक शिक्षक का इस तरह असमय चले जाना उस विद्यालय और उन सैकड़ों छात्रों के लिए एक बड़ी अपूरणीय क्षति है। बुधवार को विद्यालय में शोक सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, जहां हर आंख नम थी।

मूक मासूम अहान और पिता का अटूट प्रेम

इस पूरी त्रासदी में सबसे मार्मिक पहलू नन्हे अहान गाजी का है। पांच वर्ष की उम्र में जहां बच्चे तुतलाकर अपनी बातें कहते हैं, अहान केवल अपनी आंखों और इशारों से संवाद करता था। तौफीक ने कभी उसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि वे उसे और अधिक समय देते थे। गांव वालों के अनुसार, तौफीक का अधिकांश समय अहान की देखभाल और उसे खुश रखने में ही व्यतीत होता था। शायद यही वजह थी कि मौत के आगोश में भी दोनों साथ ही रहे। यह सोचकर ही बाराजोर गांव के लोगों का कलेजा फट रहा है कि उस आखिरी पल में उन दोनों ने क्या महसूस किया होगा।

प्रशासनिक जवाबदेही और मुआवजे की मांग

घटना के बाद बाराजोर गांव में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों की मांग है कि नागी डैम जैसे सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। जहां भी खुदाई के कारण गड्ढे बने हैं, उन्हें तत्काल भरा जाए या वहां मजबूत बैरिकेडिंग की जाए। साथ ही, पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग भी उठ रही है। तौफीक अपने परिवार के मुख्य आधार थे। उनकी मौत ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सरकार से आपदा प्रबंधन विभाग के तहत मिलने वाली राशि को जल्द से जल्द निर्गत करने की अपील की है।

निष्कर्ष: सुरक्षित पर्यटन और हमारी जिम्मेदारी

जमुई की यह घटना एक सबक है कि जल स्रोतों और बांधों के किनारे सैर-सपाटा करते समय सावधानी कितनी अनिवार्य है। नागी डैम में हुई यह मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामियों और कुदरत की अनिश्चितता का मिला-जुला परिणाम है। तौफीक अंसारी और उनके बेटे अहान की जल-समाधि हमें याद दिलाती रहेगी कि एक छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। बाराजोर गांव आज अपने उस बेटे को याद कर रहा है जो कल तक सबके बीच था, और अब उसकी यादें केवल नागी डैम की लहरों में कहीं खो गई हैं।

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