
पटना/बेगूसराय | 31 मार्च 2026: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए बेगूसराय जिले के डंडारी अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) राजीव कुमार को एक बार फिर निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस मामले में की गई है, जिसमें उन्हें वर्ष 2025 में ₹2 लाख रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए राजीव कुमार को पुनः निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पूर्णिया प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है।
रिश्वत लेते हुए हुई थी गिरफ्तारी
दरअसल, 9 सितंबर 2025 को निगरानी ब्यूरो की टीम ने डंडारी प्रखंड के अंचल अधिकारी राजीव कुमार को ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए ट्रैप कर गिरफ्तार किया था। उनके साथ एक डाटा ऑपरेटर को भी इस मामले में हिरासत में लिया गया था।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें निगरानी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजते हुए केंद्रीय कारा, भागलपुर में रखा गया था।
पहले हुआ निलंबन, फिर मिली थी राहत
इस मामले के सामने आने के बाद 5 अक्टूबर 2025 को राजीव कुमार को पहली बार निलंबित किया गया था। हालांकि, जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने 26 नवंबर 2025 को विभाग में पुनः योगदान दिया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्हें निलंबन से मुक्त कर दिया गया था।
लेकिन अब विभाग ने मामले की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए फिर से कार्रवाई करते हुए उन्हें दोबारा सस्पेंड कर दिया है।
पटना में हुआ था बड़ा विरोध प्रदर्शन
राजीव कुमार की गिरफ्तारी के बाद यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था। गिरफ्तारी के विरोध में राज्य भर के अंचल अधिकारी पटना पहुंच गए थे और सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था।
11 सितंबर 2025 को गर्दनीबाग में सैकड़ों अंचल अधिकारियों ने धरना दिया और निगरानी ब्यूरो के खिलाफ नारेबाजी की थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
सरकार का संदेश: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
बेगूसराय के डंडारी अंचल अधिकारी राजीव कुमार का दोबारा निलंबन यह साफ संकेत देता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। यह कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने और आम जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।


