सहरसा DRDA निदेशक वैभव कुमार के ठिकानों पर विजिलेंस का छापा: 2.41 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा, मुजफ्फरपुर तक फैला काली कमाई का जाल

सहरसा/मुजफ्फरपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे महाभियान के बीच एक और बड़ी मछली कानून के जाल में फंस गई है। सहरसा जिले के जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) के निदेशक वैभव कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। निगरानी विभाग और विशेष जांच टीम ने मंगलवार की अहले सुबह वैभव कुमार के सहरसा और मुजफ्फरपुर स्थित आधा दर्जन ठिकानों पर एक साथ दस्तक दी। इस कार्रवाई ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि सरकारी महकमे के भीतर जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को भी हिलाकर रख दिया है। जांच टीम को अब तक की तलाशी में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति, जमीन के दस्तावेज और निवेश से जुड़े कागजात मिले हैं, जिनकी स्क्रूटनी जारी है।

आय से 78 प्रतिशत अधिक संपत्ति: आंकड़ों ने चौंकाया

निदेशक वैभव कुमार के खिलाफ दर्ज कांड संख्या 04/26 की जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी को भी हैरान करने के लिए काफी हैं। जांच एजेंसी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वैभव कुमार के पास उनकी ज्ञात आय के वैध स्रोतों से लगभग 2.41 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति पाई गई है। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो यह उनकी कुल आय से लगभग 78.03% अधिक है। यह आंकड़ा केवल शुरुआती जांच का है, जिसमें उनकी चल और अचल संपत्ति का मूल्यांकन किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे छापेमारी आगे बढ़ेगी और बैंक लॉकरों व गुप्त निवेशों का खुलासा होगा, यह राशि और भी ज्यादा बढ़ सकती है। एक सरकारी अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संपत्ति इकट्ठा करना प्रशासनिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सहरसा से मुजफ्फरपुर तक 6 ठिकानों पर एक साथ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई को पूरी तरह से गुप्त रखा गया था ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न हो सके। मंगलवार सुबह जब लोग अपनी नींद से जाग ही रहे थे, तभी निगरानी विभाग की विशेष टीमों ने सहरसा और मुजफ्फरपुर में वैभव कुमार से जुड़े 6 ठिकानों की घेराबंदी कर दी। सहरसा में उनके सरकारी आवास और कार्यालय के साथ-साथ मुजफ्फरपुर स्थित उनके निजी आवास और पैतृक ठिकानों पर भी सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। मुजफ्फरपुर के पॉश इलाकों में स्थित उनके आवासों पर जब टीम पहुंची, तो वहां मौजूद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। घर के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है और अलमारियों से लेकर महत्वपूर्ण फाइलों को खंगाला जा रहा है। सुरक्षा के लिहाज से सभी ठिकानों पर स्थानीय पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है ताकि जांच में कोई बाधा न आए।

काली कमाई का निवेश: जमीन के कागजात और कीमती जेवर बरामद

छापेमारी के दौरान अब तक की जो खबरें छनकर आ रही हैं, उनके मुताबिक वैभव कुमार ने अपनी काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट और जमीन की खरीद-फरोख्त में निवेश किया है। मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में कई बेशकीमती भूखंडों के दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो बेनामी संपत्तियों की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके अलावा, भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर और महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी टीम के हाथ लगे हैं। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वैभव कुमार ने शेयर बाजार या किसी निजी व्यवसाय में भी निवेश किया है। बरामद किए गए दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि पद पर रहते हुए वैभव कुमार ने ठेकेदारों और योजनाओं के आवंटन में कथित तौर पर मोटी कमीशनखोरी की थी, जिससे यह अकूत संपत्ति जमा की गई।

कांड संख्या 04/26: भ्रष्टाचार के खिलाफ दर्ज हुई पुख्ता प्राथमिकी

वैभव कुमार के खिलाफ यह कार्रवाई किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही गोपनीय जांच का नतीजा है। निगरानी विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सहरसा DRDA में विकास योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर बंदरबांट हो रही है। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर विभाग ने वैभव कुमार की संपत्तियों का एक ‘एसेट प्रोफाइल’ तैयार किया। जब उनकी आय और खर्चों के बीच एक विशाल अंतर देखा गया, तब जाकर कांड संख्या 04/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इस प्राथमिकी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं को शामिल किया गया है। कानून के जानकारों का मानना है कि 78% से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का मामला काफी मजबूत है और आने वाले दिनों में वैभव कुमार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

प्रशासनिक महकमे में मची खलबली: कई और अधिकारियों पर शक की सुई

DRDA निदेशक स्तर के अधिकारी पर इस तरह की छापेमारी ने सहरसा जिला प्रशासन के भीतर भी डर का माहौल पैदा कर दिया है। विकास योजनाओं से जुड़े अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी अब जांच के रडार पर आने के डर से सहमे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि वैभव कुमार के संपर्कों में जिले के कई अन्य प्रभावशाली लोग और सफेदपोश भी शामिल हैं, जिन्होंने इस काली कमाई को सफेद करने में उनकी मदद की होगी। जांच एजेंसियां उनके मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स और व्हाट्सएप चैट्स को भी खंगाल रही हैं ताकि उन कड़ियों को जोड़ा जा सके जो भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क को संचालित कर रही थीं। सहरसा कलेक्ट्रेट में आज दिन भर इसी छापेमारी की चर्चा रही और कामकाज पर भी इसका असर देखने को मिला।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: सरकार का कड़ा संदेश

बिहार सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत की जा रही यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि पद का दुरुपयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सहरसा और मुजफ्फरपुर में चल रही यह छापेमारी केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के खिलाफ है जो गरीबों के हक का पैसा डकार जाती है। DRDA जैसी संस्था, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास और गरीबों का उत्थान है, वहां के निदेशक का आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसना बेहद शर्मनाक है। आम जनता के बीच इस कार्रवाई को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, लेकिन लोगों की मांग है कि केवल छापेमारी और निलंबन काफी नहीं है, बल्कि ऐसी संपत्तियों को जब्त कर सरकारी खजाने में वापस लाया जाना चाहिए।

मुजफ्फरपुर के ठिकानों पर देर शाम तक जारी रही जांच

मुजफ्फरपुर में वैभव कुमार के ठिकानों पर जांच टीम ने तकनीकी विशेषज्ञों का भी सहारा लिया है ताकि डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट होने से बचाया जा सके। घर में मौजूद लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और अन्य स्टोरेज डिवाइसेज को टीम ने अपने कब्जे में ले लिया है। पड़ोसी बताते हैं कि वैभव कुमार का परिवार यहां काफी शांत रहता था, लेकिन उनके रहन-सहन और अचानक बढ़ते वैभव को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती थीं। टीम ने घर में मौजूद कैश काउंटिंग मशीन के इस्तेमाल की भी संभावना जताई है, हालांकि अभी तक बरामद नकद राशि का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है। मुजफ्फरपुर के विभिन्न बैंकों में मौजूद उनके खातों और लॉकरों को भी फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अगली कार्रवाई: पूछताछ और संभावित गिरफ्तारी के संकेत

छापेमारी और साक्ष्यों के संकलन के बाद अगला चरण वैभव कुमार से आमने-सामने पूछताछ का होगा। साक्ष्यों के आधार पर अगर वे अपनी संपत्ति का वैध स्रोत बताने में विफल रहते हैं, तो उनकी गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। निगरानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की पल-पल की रिपोर्ट मुख्यालय भेज रहे हैं। यह भी जांचा जा रहा है कि क्या वैभव कुमार ने विदेशी निवेश या हवाला के जरिए भी पैसा बाहर भेजा है। फिलहाल सहरसा और मुजफ्फरपुर के ठिकानों पर छापेमारी बदस्तूर जारी है और जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है, वैभव कुमार की ‘काली डायरी’ के पन्ने खुलने लगे हैं।

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