भागलपुर में गंगा स्नान के दौरान दर्दनाक हादसा: बच्चों के सामने गहरे पानी में समाया पिता, बाबूपुर घाट पर मची चीख-पुकार

  • ​भागलपुर जिले के सबौर थाना क्षेत्र स्थित बाबूपुर गंगा घाट पर स्नान के दौरान एक अत्यंत हृदयविदारक हादसा सामने आया है, जहां एक युवक नदी की तेज धार में लापता हो गया।
  • ​गजरेली थाना क्षेत्र निवासी प्रमोद यादव का पुत्र करीब डेढ़ सौ ग्रामीणों के एक बड़े जत्थे के साथ गंगा स्नान करने के लिए बाबूपुर घाट पर पहुंचा था।
  • ​पानी की गहराई का अंदाजा न लग पाने के कारण युवक अचानक भंवर में फंस गया और सैकड़ों लोगों की मौजूदगी के बावजूद गहरे पानी में ओझल हो गया।
  • ​इस पूरी घटना का सबसे दुखद और झकझोर देने वाला पहलू यह रहा कि युवक के दो छोटे बच्चों के सामने ही उनके पिता नदी में डूब गए, जिसके बाद से घाट पर कोहराम मचा हुआ है।
  • ​घटना की सूचना मिलते ही सबौर थाना की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई है और स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में सघन तलाशी अभियान लगातार चलाया जा रहा है।

भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।

गंगा की तेज धार में समाई एक और जिंदगी और बाबूपुर घाट पर पसरा मातम

भागलपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जिसने आस्था के नाम पर नदी घाटों पर उमड़ने वाली भीड़ की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से ध्यान खींचा है। सबौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बाबूपुर गंगा घाट पर रविवार की सुबह उस वक्त अफरातफरी और मातम का माहौल छा गया, जब गंगा स्नान के लिए आया एक युवक अचानक गहरे पानी में चला गया। पलक झपकते ही वह युवक नदी की तेज लहरों के बीच कहीं खो गया। जो घाट कुछ समय पहले तक ग्रामीणों की चहल-पहल और स्नान-ध्यान के मंत्रों से गूंज रहा था, वह अचानक चीख-पुकार और रुदन में तब्दील हो गया। यह घटना इस बात की भयावह याद दिलाती है कि नदियों के बदलते जलस्तर और घाटों की भौगोलिक स्थिति को समझे बिना पानी में उतरना कितना जानलेवा साबित हो सकता है।

डेढ़ सौ ग्रामीणों के जत्थे के साथ आस्था की डुबकी लगाने पहुंचा था परिवार

इस पूरी घटना के पीछे की पृष्ठभूमि ग्रामीण आस्था और सामूहिक स्नान की परंपरा से जुड़ी हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लापता युवक कजरेली थाना क्षेत्र का रहने वाला है और उसके पिता का नाम प्रमोद यादव है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर किसी विशेष अवसर या सामान्य धार्मिक मान्यता के तहत भारी संख्या में लोग एक साथ गंगा स्नान के लिए निकलते हैं। इसी कड़ी में गजरेली से करीब 150 लोगों का एक बड़ा समूह ट्रैक्टर और अन्य वाहनों के माध्यम से सबौर के बाबूपुर गंगा घाट पर पहुंचा था। समूह में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे। सभी लोग घाट के किनारे अपनी-अपनी जगह बनाकर स्नान की तैयारियों में जुटे थे और माहौल पूरी तरह से सामान्य था। किसी ने भी सपने में नहीं सोचा था कि आस्था की यह डुबकी एक परिवार के लिए जिंदगी भर का नासूर बन जाएगी।

गहरे पानी के भंवर में फंसा युवक और देखते ही देखते आंखों से हुआ ओझल

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब ग्रामीण एक-एक कर नदी में उतरने लगे, उसी दौरान प्रमोद यादव का पुत्र भी स्नान करने के लिए आगे बढ़ा। बाबूपुर घाट के किनारे कुछ हिस्सों में पानी का बहाव सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर नदी की गहराई अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है और तेज भंवर बनते हैं। युवक संभवतः इसी धोखे का शिकार हो गया। पानी में कुछ कदम आगे बढ़ते ही उसका पैर अचानक गहराई में फिसल गया। जब तक वह खुद को संभाल पाता, गंगा की तेज लहरों और नीचे की ओर खींचते भंवर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। वहां मौजूद लोगों ने देखा कि युवक पानी की सतह पर संघर्ष कर रहा है, लेकिन लहरों का वेग इतना अधिक था कि वह चंद सेकंड के भीतर ही पानी के भीतर पूरी तरह से गायब हो गया।

मासूम बच्चों की आंखों के सामने पिता का डूबना बना सबसे हृदयविदारक दृश्य

इस त्रासदी का सबसे झकझोर देने वाला हिस्सा वह था, जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया। युवक जब गंगा स्नान के लिए पानी में उतरा था, तब उसके दो छोटे और मासूम बच्चे घाट के किनारे ही खड़े थे। वे बच्चे उत्साह के साथ अपने पिता को देख रहे थे, लेकिन अगले ही पल उनके पिता लहरों से जिंदगी की जंग हारते हुए नजर आए। बच्चों की आंखों के ठीक सामने उनका पिता गहरे पानी में समा गया। इस खौफनाक दृश्य को देखकर बच्चों के भीतर जो दहशत और पीड़ा पैदा हुई, उसे शब्दों में बयान करना असंभव है। पिता के पानी में गायब होते ही घाट पर बच्चों की चीखें गूंजने लगीं। उनका रो-रोकर बुरा हाल है और वे लगातार अपने पिता को पुकार रहे हैं। वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी इन मासूमों की बेबसी देखकर नम हो गईं।

स्थानीय लोगों की भारी मशक्कत और आंखों के सामने बेबस होता पूरा गांव

जैसे ही युवक पानी में डूबने लगा, उसके साथ आए 150 ग्रामीणों के जत्थे में हड़कंप मच गया। जो लोग तैरना जानते थे, उन्होंने बिना समय गंवाए पानी में छलांग लगा दी। कई लोगों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर एक मानव श्रृंखला बनाने की भी कोशिश की ताकि गहराई तक जाकर युवक को खींचा जा सके। लेकिन नदी के उस हिस्से में पानी इतना गहरा था और बहाव इतना तीव्र था कि स्थानीय तैराकों की सारी कोशिशें नाकाम साबित हुईं। पूरा गांव अपने ही एक सदस्य को अपनी आंखों के सामने डूबते हुए देखने को विवश था। किनारे पर खड़ी महिलाएं दहाड़ मारकर रोने लगीं और पूरा घाट चीख-पुकार से दहल उठा। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर काफी देर तक पानी में गोते लगाते रहे, लेकिन युवक का कोई सुराग हाथ नहीं लगा।

सबौर थाना पुलिस का त्वरित एक्शन और नदी में शुरू हुआ सघन तलाशी अभियान

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस प्रशासन को सूचना दी। खबर मिलते ही सबौर थाना की पुलिस टीम पूरे दलबल के साथ बाबूपुर घाट पर पहुंच गई। पुलिस ने सबसे पहले घाट के किनारे जमा भीड़ को नियंत्रित किया ताकि कोई और व्यक्ति उथले या गहरे पानी में जाकर अपनी जान जोखिम में न डाले। इसके तुरंत बाद स्थानीय स्तर पर कुशल गोताखोरों की टीम को काम पर लगाया गया। पिछले कई घंटों से गोताखोर लगातार नदी के उस हिस्से और बहाव की दिशा में आगे तक सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को भी सूचना दे दी गई है ताकि मोटर बोट और आधुनिक उपकरणों के जरिए नदी की गहराइयों में तलाश की जा सके। समय बीतने के साथ ही युवक के जीवित बचने की उम्मीदें लगातार कम होती जा रही हैं, जिससे परिजनों का हाल बेहाल है।

नदी घाटों पर सुरक्षा इंतजामों की कमी और प्रशासनिक तंत्र पर उठते गंभीर सवाल

बाबूपुर घाट पर हुई यह त्रासदी केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि यह नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की भारी कमी की ओर एक स्पष्ट इशारा है। अक्सर देखा जाता है कि जिन घाटों पर भारी संख्या में ग्रामीण स्नान के लिए आते हैं, वहां प्रशासन की ओर से गहराई नापने वाले बैरिकेडिंग या खतरे के निशान (डेंजर जोन) वाले बोर्ड नहीं लगाए जाते हैं। बाहर से आने वाले लोगों को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं होता कि पानी के नीचे खाई या भंवर कहां मौजूद है। इसके अलावा, ऐसे प्रमुख घाटों पर नियमित रूप से गोताखोरों या लाइफ गार्ड की तैनाती भी नदारद रहती है। यह घटना इस बात की जरूरत पर बल देती है कि प्रशासन को ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां लाल झंडे लगाने चाहिए और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए, ताकि भविष्य में मासूम बच्चों को अपने पिता और परिवारों को अपने चिराग न खोने पड़ें। पुलिस और गोताखोरों का अभियान अभी भी घाट पर बदस्तूर जारी है और हर किसी की निगाहें नदी की लहरों पर टिकी हैं।

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