भागलपुर SDM कार्यालय में ‘भ्रष्टाचार का ब्लास्ट’; 70 हजार की घूस लेते लिपिक और स्टेनो का ‘खेल’ खत्म; पटना निगरानी ब्यूरो की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक

समाचार के मुख्य बिंदु: सुशासन की नाक के नीचे ‘रिश्वतखोरी’ का साम्राज्य ध्वस्त

  • बड़ी कार्रवाई: पटना से आई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की 9 सदस्यीय टीम ने भागलपुर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) कार्यालय में एक बड़ी छापेमारी को अंजाम दिया है।
  • गिरफ्तारी का विवरण: सेवा संपुष्टि (Service Confirmation) के बदले 70 हजार रुपये की नकद रिश्वत लेते हुए लिपिक मयंक कुमार और स्टेनो प्रेम कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।
  • शिकायतकर्ता की पीड़ा: नाथनगर आपूर्ति कार्यालय में पदस्थापित कर्मी अभिजीत कुमार से उसके जायज काम के लिए मोटी रकम की मांग की जा रही थी।
  • ऑपरेशन का नेतृत्व: निगरानी ब्यूरो के डीएसपी विद्यांचल प्रसाद के नेतृत्व में इस ‘ट्रैप ऑपरेशन’ को बड़ी गोपनीयता के साथ सफल बनाया गया।
  • प्रशासनिक हड़कंप: एसडीएम कार्यालय जैसी संवेदनशील जगह पर इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी मच गई है और भ्रष्टाचार में लिप्त कई अन्य कर्मियों के पसीने छूट रहे हैं।
  • VOB इनसाइट: भागलपुर का अनुमंडल कार्यालय (SDM Office) किसी भी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था का हृदय स्थल होता है। यहाँ से पूरे अनुमंडल की न्याय और व्यवस्था का संचालन होता है। लेकिन इस हृदय स्थल में ‘घूसखोरी’ का कैंसर कितनी गहराई तक फैला है, यह आज की गिरफ्तारी ने साबित कर दिया है। लिपिक और स्टेनो का यह गठजोड़ न केवल एक कर्मचारी का शोषण कर रहा था, बल्कि सुशासन के दावों की धज्जियां भी उड़ा रहा था। पटना से आई टीम ने जिस तरह इस ‘सफेदपोश नेटवर्क’ को तोड़ा है, वह भागलपुर के अन्य सरकारी विभागों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।

भागलपुर | 30 मार्च, 2026

​बिहार की प्रशासनिक राजधानी पटना से करीब 250 किलोमीटर दूर, सिल्क सिटी भागलपुर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण सरकारी पते—एसडीएम कार्यालय—में सोमवार को वह हुआ जिसकी कल्पना शायद वहां कुर्सी जमाए बैठे ‘साहबों’ ने नहीं की थी। जब पूरा शहर अपनी रोजमर्रा की रफ्तार में था, तभी पटना निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की एक विशेष टीम ने खामोशी से घेराबंदी की और दो भ्रष्ट कर्मियों के ‘अहंकार’ को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरफ्तारी भागलपुर जिला प्रशासन की छवि पर एक गहरा दाग है, जो बताता है कि फाइलों के पहिये बिना ‘ग्रीस’ (रिश्वत) के आज भी नहीं घूमते।

अभिजीत की हिम्मत और सिस्टम का लालच: सेवा संपुष्टि का ‘रेट कार्ड’

​इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में नाथनगर आपूर्ति कार्यालय में पदस्थापित कर्मी अभिजीत कुमार का वह संघर्ष है, जो वे पिछले कई दिनों से अपने ही विभाग के गलियारों में लड़ रहे थे। सरकारी सेवा में एक निश्चित समय के बाद ‘सेवा संपुष्टि’ (Service Confirmation) एक सामान्य प्रक्रिया है, जो किसी भी कर्मचारी के करियर की स्थिरता के लिए अनिवार्य होती है। अभिजीत ने इसके लिए आवेदन दिया था, लेकिन उनकी फाइल एसडीएम कार्यालय के दो ‘द्वारपालों’—लिपिक मयंक कुमार और स्टेनो प्रेम कुमार—के पास आकर अटक गई।

​अभिजीत का आरोप है कि मयंक और प्रेम ने उनकी फाइल को आगे बढ़ाने के बदले 70 हजार रुपये का ‘नजराना’ मांगा। एक तरफ करियर की चिंता थी और दूसरी तरफ ईमानदारी का सवाल। अभिजीत ने हार मानने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने का फैसला किया और पटना जाकर निगरानी विभाग को अपनी आपबीती सुनाई।

डीएसपी विद्यांचल प्रसाद का ‘ट्रैप’: 9 सदस्यीय टीम का ‘सीक्रेट मिशन’

​अभिजीत की शिकायत पर निगरानी विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। विभाग के डीएसपी विद्यांचल प्रसाद के नेतृत्व में 9 तेज-तर्रार सदस्यों की एक टीम बनाई गई। इस टीम को निर्देश थे कि कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए कि आरोपियों को संभलने का मौका न मिले। सोमवार को यह टीम भागलपुर पहुँची और सादे लिबास में एसडीएम कार्यालय के आसपास अपनी पोजीशन ले ली।

​योजना के अनुसार, अभिजीत कुमार रिश्वत की रकम (70 हजार रुपये) लेकर कार्यालय के भीतर दाखिल हुए। वहां स्टेनो प्रेम कुमार ने बेहद शातिराना अंदाज में अभिजीत को इशारा किया कि वे यह राशि लिपिक मयंक कुमार को सौंप दें। जैसे ही अभिजीत ने रुपयों से भरा लिफाफा मयंक के हाथों में थमाया, पहले से ही मुस्तैद निगरानी की टीम ने बिजली की रफ्तार से दोनों को दबोच लिया। रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद मयंक और प्रेम के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं, लेकिन कानून का फंदा उन पर कस चुका था।

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एसडीएम कार्यालय में मची भगदड़: ‘साहब’ भी हुए हैरान

​जिस समय यह छापेमारी हुई, उस समय एसडीएम कार्यालय में आम जनता और वकीलों की भारी भीड़ थी। जैसे ही यह खबर फैली कि पटना की टीम ने मयंक और प्रेम को ‘सेट’ कर लिया है, वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई अन्य कर्मचारी जो फाइलों के नीचे ‘नजराने’ की उम्मीद में बैठे थे, वे अपनी सीटें छोड़कर खिसकते नजर आए। यह पहली बार है जब भागलपुर के अनुमंडल कार्यालय के भीतर इतनी बड़ी और सीधी कार्रवाई की गई है।

​अधिकारियों के बीच कानाफूसी शुरू हो गई है कि क्या इस घूसखोरी के खेल में केवल ये दो छोटे प्यादे ही शामिल थे या इनके पीछे किसी बड़े ‘हाथ’ का संरक्षण भी था। डीएसपी विद्यांचल प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि वे इस सप्लाई चेन की जड़ तक जाएंगे।

केस फाइल: निगरानी की सर्जिकल स्ट्राइक का पूरा ब्यौरा

विवरण

तथ्य और जानकारी

घटना स्थल

अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) कार्यालय, भागलपुर

गिरफ्तार कर्मी 1

मयंक कुमार (लिपिक)

गिरफ्तार कर्मी 2

प्रेम कुमार (स्टेनो)

शिकायतकर्ता

अभिजीत कुमार (नाथनगर आपूर्ति कार्यालय कर्मी)

रिश्वत की राशि

70,000 रुपये (नकद)

कारण

सेवा संपुष्टि (Service Confirmation) के बदले

मुख्य जांच अधिकारी

विद्यांचल प्रसाद, डीएसपी (निगरानी विभाग, पटना)

टीम की संख्या

09 सदस्यीय विशेष दस्ता

 

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