नीतीश कुमार ने छोड़ा विधान परिषद का साथ, फफक कर रो पड़े मंत्री अशोक चौधरी; 20 साल के ‘सफर’ के अंत पर भावुक हुआ जदयू खेमा

समाचार के मुख्य बिंदु: सत्ता के गलियारे में ‘विदाई’ की सबसे मार्मिक तस्वीरें

  • ऐतिहासिक इस्तीफा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से अपना आधिकारिक त्यागपत्र सौंप दिया।
  • भावुक माहौल: इस्तीफे की प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री आवास ‘एक अणे मार्ग’ का दृश्य अत्यंत भावुक रहा, जहाँ जदयू के कई दिग्गज मंत्री और कार्यकर्ता अपने आंसू नहीं रोक पाए।
  • अशोक चौधरी का क्रंदन: ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद सार्वजनिक रूप से फफक-फफक कर रोते नजर आए। उनके इस रूप ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।
  • 20 साल का अटूट नाता: नीतीश कुमार वर्ष 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब वे राज्यसभा (संसद के उच्च सदन) में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  • विपक्ष का तंज: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इन आंसुओं को ‘कैमरा ड्रामा’ करार दिया है, जबकि जदयू इसे एक गहरे व्यक्तिगत और राजनीतिक जुड़ाव का परिणाम बता रही है।
  • VOB इनसाइट: राजनीति अक्सर कठोर निर्णयों और पत्थर दिल चेहरों के लिए जानी जाती है, लेकिन सोमवार को पटना में जो दिखा, वह सत्ता और समर्पण के बीच के मानवीय पक्ष को उजागर करता है। अशोक चौधरी का इस तरह रोना केवल एक मंत्री का अपने मुख्यमंत्री के प्रति प्रेम नहीं है, बल्कि यह उस ‘छाया’ के हटने का डर भी है जिसने पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति को एक धुरी पर थामे रखा था। नीतीश कुमार का विधान परिषद से बाहर जाना जदयू के भीतर एक बड़े भावनात्मक शून्य (Emotional Vacuum) को जन्म दे रहा है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि ये आंसू भविष्य की राजनीति में कितनी मजबूती प्रदान करते हैं या विपक्ष के ‘ड्रामा’ वाले आरोपों के आगे फीके पड़ जाते हैं।

पटना | 30 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति का वह बरगद, जिसने पिछले 20 वर्षों से बिहार विधान परिषद की जमीन को अपनी जड़ों से सींचा था, आज वहां से उखड़कर दिल्ली की क्यारियों में लगने के लिए तैयार हो गया। सोमवार का दिन बिहार के संसदीय इतिहास में ‘ब्लैक मंडे’ नहीं, बल्कि ‘इमोशनल मंडे’ के रूप में दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जैसे ही विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंपा, समूचे जदयू खेमे में उदासी की लहर दौड़ गई। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, नीतीश कुमार की विदाई का यह क्षण इतना भारी था कि सत्ता के बड़े-बड़े सूरमा बच्चों की तरह रोते नजर आए।

एक अणे मार्ग का सन्नाटा और अशोक चौधरी के आंसू

​सोमवार सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास के बाहर गहमागहमी थी। नीतीश कुमार ने 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद आज 14 दिनों की संवैधानिक समय सीमा के अंतिम दिन अपना पद छोड़ा। इस्तीफे की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जब वे अपने मंत्रियों और सहयोगियों से मिले, तो माहौल गमगीन हो गया।

​सबसे चौंकाने वाली तस्वीर ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी की रही। अशोक चौधरी, जिन्हें नीतीश कुमार का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार और ‘संकटमोचक’ माना जाता है, मुख्यमंत्री को इस्तीफा देते देख खुद पर काबू नहीं रख पाए। वे कैमरे के सामने ही फफक कर रोने लगे। उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। आसपास मौजूद सुरक्षाकर्मी और अन्य नेता उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अशोक चौधरी का क्रंदन रुक नहीं रहा था। उनके करीबियों का कहना है कि अशोक चौधरी नीतीश कुमार को केवल एक नेता नहीं, बल्कि अपना अभिभावक मानते हैं और उनका राज्य की विधायी राजनीति से दूर जाना उन्हें व्यक्तिगत क्षति जैसा महसूस हो रहा है।

भावुक हुए जदयू के मंत्री: “नीतीश बिना सूना हुआ सदन”

​केवल अशोक चौधरी ही नहीं, बल्कि जदयू के कई अन्य मंत्री और विधायक भी इस मौके पर अपनी आँखें नम कर बैठे थे। विजय कुमार चौधरी, ललन सिंह और संजय कुमार झा जैसे नेताओं के चेहरों पर भी भारी उदासी देखी गई। इन नेताओं का मानना है कि विधान परिषद में नीतीश कुमार की मौजूदगी एक सुरक्षा कवच की तरह थी। सदन के भीतर जब भी विपक्ष हमलावर होता था, नीतीश कुमार की तार्किक क्षमता और उनके अनुभव की ढाल पूरी सरकार को बचा लेती थी।

​मंत्रियों का कहना है कि भले ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के पद पर बने रहेंगे और राज्यसभा के सदस्य के रूप में दिल्ली में बिहार की आवाज बुलंद करेंगे, लेकिन बिहार विधान परिषद के गलियारों में उनकी कमी हमेशा खलेगी। 2006 से लेकर 2026 तक, नीतीश कुमार ने परिषद को अपनी कार्यशैली से एक नई ऊंचाई दी थी। उनके इस्तीफे के साथ ही उस 20 साल पुराने सिलसिले का अंत हो गया है जिसने बिहार को ‘सुशासन’ के कई ऐतिहासिक कानून और नीतियां दीं।

तेजस्वी यादव का पलटवार: “यह सब कैमरा ड्रामा और कलाकारी है”

​जदयू खेमे में बह रहे आंसुओं के सैलाब पर विपक्ष ने तीखा प्रहार किया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इन आंसुओं की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस्वी ने पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा, “आजकल राजनीति में कुछ लोग केवल कैमरा देखकर ड्रामा करते हैं। कौन रो रहा है और क्या कर रहा है, यह सब जानते हैं। यह सब कलाकारी है। जब सब कुछ हासिल कर लिया है, तो अब आंसुओं का क्या मतलब?”

​तेजस्वी ने सीधे तौर पर अशोक चौधरी का नाम लिए बिना उन पर तंज कसा कि कुछ लोग राजनीति छोड़कर अभिनय के क्षेत्र में भी जा सकते हैं। विपक्ष का मानना है कि यह सब जनता की सहानुभूति बटोरने की एक सोची-समझी कोशिश है। तेजस्वी के अनुसार, नीतीश कुमार को भाजपा ने दबाव में डालकर राज्यसभा भेजा है और यह इस्तीफा ‘खुशी का सौदा’ नहीं, बल्कि ‘मजबूरी का समझौता’ है।

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