‘संसदीय सफर’ का दुर्लभ शिखर! नीतीश कुमार ने छोड़ा विधान परिषद का साथ; विधानसभा, परिषद और लोकसभा के बाद अब राज्यसभा की बारी, चारों सदनों के सदस्य बनने वाले ‘महानायक’ बने

न्यूज डायरी: नीतीश कुमार के चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन का ‘स्वर्ण अध्याय’

  • इस्तीफे का दिन: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार (30 मार्च, 2026) को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया।
  • संवैधानिक अनिवार्यता: 16 मार्च, 2026 को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने जाने के बाद, 14 दिनों की समय सीमा के भीतर उन्हें एक सदन की सदस्यता छोड़नी थी।
  • दुर्लभ कीर्तिमान: नीतीश कुमार भारत के उन चुनिंदा राजनेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने लोकतंत्र के चारों सदनों—विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—का प्रतिनिधित्व किया है।
  • जमीनी शुरुआत: 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधायक के रूप में शुरू हुआ यह सफर अब 2026 में दिल्ली के उच्च सदन तक पहुँच गया है।
  • VOB इनसाइट: नीतीश कुमार का यह इस्तीफा केवल एक पद का त्याग नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति से उनके ‘प्रत्यक्ष विधायी’ जुड़ाव के एक लंबे दौर का समापन है। 2006 से लगातार परिषद के माध्यम से बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार का अब राज्यसभा जाना राष्ट्रीय राजनीति में उनके बढ़ते कद और भविष्य की नई भूमिकाओं का संकेत है। चारों सदनों का सदस्य होना उनकी संसदीय परिपक्वता और हर स्तर के सदन को समझने की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है।

पटना | 30 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति के ‘शिल्पी’ कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने आज अपने संसदीय जीवन का एक और बड़ा मील का पत्थर पार किया। सोमवार को विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंपकर उन्होंने परिषद के साथ अपने 20 साल पुराने रिश्ते को एक नया मोड़ दिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, नीतीश कुमार अब बिहार से निकलकर दिल्ली के उस सदन में अपनी आवाज बुलंद करेंगे, जहाँ वे अब तक सदस्य के रूप में कभी नहीं रहे थे।

चारों सदनों का ‘चौका’: अजेय राजनीतिक यात्रा का विश्लेषण

​नीतीश कुमार का राजनीतिक ग्राफ किसी पाठ्यपुस्तक की तरह है, जहाँ उन्होंने क्रमिक रूप से लोकतंत्र की हर सीढ़ी पर अपना परचम लहराया है।

1. विधानसभा (MLA): संघर्ष की शुरुआत

नीतीश कुमार ने पहली बार 1985 में हरनौत विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद 1995 में भी वे विधायक चुने गए। विधानसभा के उन दिनों ने उन्हें बिहार की बुनियादी समस्याओं और ग्रामीण राजनीति की गहरी समझ दी।

2. लोकसभा (MP): दिल्ली में ‘बिहारी’ पहचान

संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में नीतीश कुमार ने एक लंबा और सफल समय बिताया है। वे कुल 6 बार (1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004) लोकसभा के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने केंद्र में रेल मंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई।

3. विधान परिषद (MLC): दो दशक का ‘सुशासन’

2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने राज्य की ऊपरी सदन, यानी विधान परिषद का रास्ता चुना। वे लगातार 4 बार (2006, 2012, 2018 और 2024) इस सदन के सदस्य चुने गए। 2006 से लेकर 30 मार्च 2026 तक वे लगातार परिषद के सदस्य रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

4. राज्यसभा: अनुभव का नया आकाश

अब 2026 में नीतीश कुमार पहली बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। 10 अप्रैल को शपथ लेने के बाद वे आधिकारिक तौर पर उन राजनेताओं की ‘एलीट क्लब’ में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है।

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